किसी कॉलेज को ही दीजिए यूनिवर्सिटी का दर्जा…CM योगी से मिलेंगे गाजीपुर के छात्र
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Ghazipur News : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाजीपुर दौरे से पहले जिले में विश्वविद्यालय की मांग फिर तेज हो गई है. पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष दीपक उपाध्याय समेत कई छात्र नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात का समय मांगा है. उनका सवाल है कि 300 से अधिक कॉलेज होने के बावजूद गाजीपुर में अब तक विश्वविद्यालय क्यों नहीं है. लोकल 18 से पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ प्रतिनिधि दीपक उपाध्याय ने बताया कि इससे पहले भी सीएम योगी के आगमन पर उन्होंने अपने खून से पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की मांग की थी. दीपक कहते हैं कि प्रदेश सरकार की खुद की नीति एक जनपद, एक विश्वविद्यालय की है.
गाजीपुर. वीर शहीदों, महान संतों और प्रशासनिक विभूतियों की पावन धरा गाजीपुर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पूर्वांचल के अग्रणी जिलों में शुमार है. यहां के युवा हर साल उच्च शिक्षा में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि 300 से अधिक डिग्री और पीजी कॉलेज होने के बावजूद गाजीपुर में एक भी विश्वविद्यालय नहीं है. कल (30 जुलाई) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाजीपुर आगमन को लेकर एक बार फिर विश्वविद्यालय निर्माण की मांग तेज हो गई है. छात्र नेता और स्थानीय युवा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सीएम तक पहुंचाने की तैयारी में जुट गए हैं.
10 सालों से संघर्ष
पीजी कॉलेज के पूर्व छात्रसंघ प्रतिनिधि दीपक उपाध्याय पिछले एक दशक से गाजीपुर में विश्वविद्यालय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं. दीपक ने बताया कि इससे पहले भी सीएम योगी के आगमन पर उन्होंने अपने खून से पत्र लिखकर विश्वविद्यालय की मांग की थी, जो सोशल मीडिया और X (ट्विटर) पर 10 दिन तक ट्रेंड हुआ था, लेकिन अफसोस कि वह मांग धरातल पर नहीं उतर सका.
वन डिस्ट्रिक्ट, वन यूनिवर्सिटी क्या
दीपक कहते हैं कि प्रदेश सरकार की खुद की नीति एक जनपद, एक विश्वविद्यालय की है. गाजीपुर से छोटे जिलों में, जहां कॉलेजों की संख्या काफी कम है, वहां यूनिवर्सिटी बन चुकी है, लेकिन गाजीपुर का युवा आज भी छलावा और धोखे का शिकार है. हमारी मांग है कि यहां के किसी प्रतिष्ठित कॉलेज जैसे पीजी कॉलेज को ही अपग्रेड करके राज्य विश्वविद्यालय का दर्जा दे दिया जाए. हमने एसडीएम के माध्यम से सीएम से मुलाकात के लिए प्रोटोकॉल में शामिल करने की मांग की है.
2 घंटे दूर जौनपुर का चक्कर
पूर्व छात्रसंघ सदस्य अभिषेक पांडे ने यूनिवर्सिटी न होने से छात्रों को होने वाली व्यावहारिक समस्याओं के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि गाजीपुर के कॉलेज फिलहाल जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं. छोटी-छोटी त्रुटियों, अंकपत्र संशोधन या रिजल्ट की गड़बड़ियों के लिए छात्रों को 2 घंटे का सफर तय करके जौनपुर यूनिवर्सिटी जाना पड़ता है. इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है, कई बार कॉपियों के मूल्यांकन में खामियां होती हैं. अगर गाजीपुर में ही यूनिवर्सिटी बन जाए तो पठन-पाठन का एक व्यवस्थित और पारदर्शी सिस्टम विकसित होगा.
बाहर जाने का खर्च बचेगा
छात्र अमृतांश और विकास ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि गाजीपुर में गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय बनने से मध्यमवर्गीय और गरीब छात्रों को पढ़ाई के लिए बनारस, लखनऊ या दिल्ली जैसे बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा. इससे अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा और बेटियों को भी अपने ही जिले में उच्च शिक्षा हासिल करने का सुरक्षित माहौल मिलेगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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