‘खनिज हमारा, पानी हमारा… फिर विकास क्यों नहीं?’, राजा बुंदेला ने भरी हुंकार
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Chitrakoot News: राजा बुंदेला का वास्तविक नाम राज राजेश्वर प्रताप सिंह जूदेव है. पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख राजा बुंदेला ने जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की अपनी अलग पहचान, संस्कृति और प्राकृतिक संपदा है, लेकिन वर्षों से यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पीछे छूटता रहा है.
चित्रकूट: बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है. इसी अभियान के तहत पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के प्रमुख चेहरे और अभिनेता-राजनेता राजा बुंदेला शनिवार को चित्रकूट के मानिकपुर पहुंचे हैं. यहां उन्होंने पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष विनोद द्विवेदी के आवास पर आयोजित जनसभा में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि बुंदेलखंड की अपनी अलग पहचान, संस्कृति और प्राकृतिक संपदा है, लेकिन वर्षों से यह क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से पीछे छूटता रहा है. उनका दावा है कि यदि बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा मिलता है तो क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी और यहां की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी.
आपको बता दें कि राजा बुंदेला का वास्तविक नाम राज राजेश्वर प्रताप सिंह जूदेव है. वह हिंदी फिल्मों के जाने-माने अभिनेता, निर्माता, राजनीतिज्ञ और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. उन्होंने बॉलीवुड की कई चर्चित फिल्मों स्वर्ग और ‘शोला और शबनम’ जैसी कई फिल्मों में शामिल हैं. लेकिन पिछले कई वर्षों से वह पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चला रहे हैं. इस समय वह ‘गांव-गांव, पांव-पांव’ यात्रा के माध्यम से पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं. यात्रा का उद्देश्य लोगों को पृथक राज्य आंदोलन से जोड़ना और जनसमर्थन जुटाना है.
अलग राज्य मिलने के बाद बढ़ेगा रोजगार
लोकल 18 से बातचीत में राजा बुंदेला ने कहा कि जब तक बुंदेलखंड अलग राज्य नहीं बनेगा, तब तक यहां के लोगों का समुचित विकास संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुल 14 जिलों में फैले बुंदेलखंड क्षेत्र में खनिज संपदा, जल संसाधन और बिजली उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं. लेकिन इन संसाधनों का लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल पा रहा है. बुंदेलखंड से 67% युवाओं को रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है. यदि बुंदेलखंड अलग राज्य बनता है तो यहां उद्योग, फैक्ट्रियां और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे, जिससे पलायन पर रोक लगेगी और स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार मिल सकेगा.
1956 के पहले बुंदेलखंड था अलग राज्य
उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि बुंदेलखंड की सात प्रमुख नदियों का पानी दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच रहा है, जबकि यहां के कई इलाके आज भी पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. अलग राज्य बनने के बाद जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जाएगा और स्थानीय जनता को प्राथमिकता के आधार पर इसका लाभ मिलेगा. उनका कहना है कि अंग्रेजों और मुगल काल में बुंदेलखंड की अलग पहचान थी. लेकिन 1 नवंबर वर्ष 1956 में राज्यों के पुनर्गठन के दौरान इस क्षेत्र को विभाजित कर दिया गया था, जिसके बाद इसका विकास प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करना और आंदोलन को मजबूत बनाना है, ताकि वर्ष 2027 तक हमारा बुंदेलखंड अलग राज्य बन सके.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल…
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