ये है ‘तालों का बाप’.. 75 नंबर ताला नाम भी यूं ही नहीं दिया गया.. जानें खासियत

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ये है ‘तालों का बाप’.. 75 नंबर ताला नाम भी यूं ही नहीं दिया गया.. जानें खासियत


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Aligarh News : तालों की इस दुनिया में 75 नंबर का ताला सबसे मजबूत और उम्दा किस्म का माना जाता है. जो सबसे ज्यादा हाईएस्ट क्वालिटी का होता है. यह 75 नंबर का ताला घर के दरवाज़े दुकान, फ्लैट व शटर में भी इस्तेमाल कि…और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • 75 नंबर का ताला घर के दरवाज़े दुकान, फ्लैट व शटर में भी इस्तेमाल किया जाता है.
  • सबसे ज्यादा हाईएस्ट क्वालिटी का होता है.
  • यह ताला सबसे मजबूत और उम्दा किस्म का माना जाता है.
अलीगढ़. उत्तर प्रदेश का जनपद अलीगढ़ को यूं ही ताले की नगरी नहीं कहा जाता. यहां के बने ताले देशभर में अपनी मजबूती और गुणवत्ता के लिए मशहूर हैं. इन्हीं में से एक खास ताला है, 75 नंबर का ताला. इसे अलीगढ़ के ताला कारोबारी मोहम्मद खालिद सबसे उम्दा और मजबूत बताते हैं. यह इतना मजबूत है बाकी सब ताले इसके आगे पानी भरते हैं. यह सबसे ज्यादा सुरक्षित है. खास बात ये है कि यह केवल एक धातु का टुकड़ा नहीं बल्कि 30 से 35 प्रक्रियाओं से गुजरकर तैयार होती एक बेहतरीन कारीगरी का नमूना है. इसकी डिमांड सिर्फ अलीगढ़ में ही नहीं, बल्कि दूसरे कई राज्यों में भी है. 75 नंबर का ताला, न सिर्फ एक उत्पाद है, बल्कि अलीगढ़ की मेहनत, परंपरा और पहचान का प्रतीक बन चुका है.

ताला कारोबारी मोहम्मद खालिद बताते हैं कि हमारे यहां यह सबसे मजबूत 75 नंबर का ताला बनता है. जो 75 एमएम का होता है. इस ताले की खासियत यह है कि यह एक तो मजबूत बहुत होता है. और दूसरा हर एक चीज में यह सबसे उम्दा किस्म का ताला होता है. इसमें सबसे ज्यादा 12 लिवर होते हैं. इसका कड़ा भी मजबूत होता है. इसके साथ ही इस ताले की बनने वाली चाबी भी बाकी दूसरे तालों की चाबियां से काफी मजबूत होती है.

दरअसल, अलीगढ़ में 40 नंबर, 50 नंबर का ताला बनता है, लेकिन सबसे हाईएस्ट 75 नंबर ताला बनता है. यह नंबर इन तालों की क्वालिटी और मजबूती के हिसाब से दिया जाता है. यही नंबर इन तालों की पहचान बन जाता है. तालों की इस दुनिया में 75 नंबर का ताला सबसे मजबूत और उम्दा किस्म का माना जाता है. जो सबसे ज्यादा हाईएस्ट क्वालिटी का होता है. यह 75 नंबर का ताला घर के दरवाज़े दुकान, फ्लैट व शटर में भी इस्तेमाल किया जाता है.

75 नंबर ताले की मार्केट में बहुत अच्छी डिमांड

मोहम्मद खालिद बताते हैं कि यह ताला कई हाथों में होकर गुजरता है, जिसकी प्रक्रिया कुछ इस तरह है कि यह लाचाई के लिए जाता है. पत्ती कटती है. जड़ाई होती है. मंजयइ होती है. ब्राइट के लिए जाता है. इस तरह के 30 से 35 प्रोसेस होते हैं, जब यह ताला तैयार होता है. हमारे यहां यह 75 नंबर ताला एक दिन में तकरीबन ढाई सौ से 300 ताले तैयार किए जाते हैं. इस 75 नंबर ताले की मार्केट में बहुत अच्छी डिमांड रहती है. हमारे यहां से यह ताले कई दूसरे राज्यों में जाते हैं जैसे कि रुड़की है, मुंबई और गुजरात जैसे कई राज्यों मे जाता है. बात अगर इस ताले की कीमत की की जाए तो यह ताला तकरीबन 65 रुपए का मार्केट में जाता है. जहां इसको 100 से डेढ़ सौ रुपए प्रति पीस तक के हिसाब से बेचा जाता है.

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Senior Assistant Editor in News18 Hindi with the responsibility of Regional Head (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Bihar, Jharkhand, Rajasthan, Madhya Pradesh, Chhattisgarh, Himachal Pradesh, Haryana). Active in jou…और पढ़ें

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