इस कार्यालय में सिर्फ मिलती हैं तारीखें, दो साल से लटका गाड़ी का रजिस्ट्रेशन
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Ground Report: यूपी के अमेठी जिले में आरटीओ कार्यालय है. यहां पर गाड़ी के लाइसेंस से लेकर रजिस्ट्रेशन पेपर बनता है. लेकिन यहां पर आने वालें लोगों को काम के बदले तारीख पर तारीख मिलता है. जिस वजह से इस क्षेत्र …और पढ़ें
यह आरटीओ कार्यालय है. यहां पर कोई लाइसेंस, कोई वाहन फिटनेस, कोई वाहन बीमा तो कोई रजिस्ट्रेशन पेपर के लिए बार-बार कार्यालय का चक्कर लगा रहा है. शासन द्वारा निर्धारित फीस देने के बावजूद भी उसका काम समय पर नहीं हो रहा है. ऐसे में उसे मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है. खास करके ऐसे आवेदक जिनके घर दूर है. यहां आकर दिनभर सुबह से अपना काम करने के लिए परेशान होते हैं.
प्रतापगढ़ से अपने ट्रैक्टर का रजिस्ट्रेशन पेपर लेने के लिए आए चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि वे करीब चार दिन से लगातार कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. लेकिन, उनकी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ है. अधिकारी बाबू के पास भेजते हैं. बाबू अधिकारी के पास ऐसे में जाएं तो कहां जाएं उन्होंने कहा कि पैसा देने के बाद भी जो निर्धारित फीस है उसे जमा कर दो उसके बाद भी काम नहीं होता है. हमारा समय पैसा दोनों खर्च होता है. लेकिन निस्तारण न होने से हमें परेशानी होती है.
एक हफ्ते से अधिक समय से नहीं हुआ नंबर अपडेट
वही गौरीगंज के बरौलिया से आए एक वाहन स्वामी ने कहा कि एक हफ्ते से अधिक समय से नंबर अपडेट करने के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं. लेकिन इसका निस्तारण नहीं हुआ. यहां दिनभर लाइन में लगकर काम के लिए परेशान होना पड़ता है जब नंबर आ जाता है तो सरवर बिजी का बहाना बता कर कर्मचारी वापस भेज देते हैं. अब ऐसे में समस्या का निस्तारण कैसे हो इसका जवाब नहीं मिलता है.
वही गौरीगंज के मऊ से आए एक वाहन स्वामी ने कहा कि गाड़ी का रजिस्ट्रेशन पेपर लेने के लिए हम करीब 4 महीने से दौड़ रहे हैं. वैसे तो 2 साल हो गया लेकिन कागज अपडेट करने के बाद करीब 4 महीने से लगातार इस कार्यालय के चक्कर लगा रहा हूं. लेकिन समस्या का निस्तारण नहीं हो रहा पेपर नहीं मिल पा रहा है. अधिकारी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे.
वहीं इस पूरी समस्या पर एआरटीओ महेश बाबू ने कैमरे पर कुछ भी नहीं बोला उन्होंने इस पर बोलने से इनकार कर दिया. ऑफ कैमरा उन्होंने कहा कि जो भी शिकायती आती है. उनके निस्तारण के लिए निर्देश दिए गए हैं. लापरवाही पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. लेकिन अब ऐसे में सवाल है कि अधिकारी समस्या का निस्तारण कब और कैसे करेंगे जबकि निर्देश है कि तय नियत समय में समस्या का निस्तारण हो सके.