AI कोर्स करते ही गरीब युवक बना करोड़पति, जीने लगा लग्जरी लाइफ, अब खुला कमाई का राज

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AI कोर्स करते ही गरीब युवक बना करोड़पति, जीने लगा लग्जरी लाइफ, अब खुला कमाई का राज


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Mahoba News: एआई के आने के बाद जहां लोगों के घंटों के काम मिनटों में हो रहे हैं. वहीं अपराधियों के लिए भी एआई वरदान साबित हो रहा है. एआई के द्वारा अपराधियों ने खनन विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर करोड़ों की ठगी की …और पढ़ें

AI कोर्स करते ही गरीब युवक बना करोड़पति, जीने लगा लग्जरी लाइफ, अब खुला राजAI का इस्तेमाल कर कमाएं करोड़ों. (सांकेतिक तस्वीर)
महोबा. उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद से एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल देश को तकनीकी रूप से मजबूत बना रहा है. वहीं दूसरी ओर कुछ शातिर दिमाग लोग इसका दुरुपयोग कर सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं. AI कोर्स कर चुके एक युवक ने अपने साथियों के साथ मिलकर खनिज विभाग जैसी नकली वेबसाइट बनाकर करोड़ों रुपये की फर्जी रॉयल्टी का गोरखधंधा खड़ा कर दिया.

मामला कबरई थाना क्षेत्र का है, जो प्रदेश की सबसे बड़ी क्रेशर मंडी के लिए जाना जाता है. यहां से निकलने वाली गिट्टी का प्रयोग राज्य भर के निर्माण कार्यों में होता है और इसके लिए वैध रॉयल्टी प्रपत्र आवश्यक होता है. इसी मांग का फायदा उठाकर आरोपी विजय सैनी, जिसने AI का कोर्स किया हुआ है, उन्होंने अपने साथियों बिंदादीन कुशवाहा और विकास राजौलिया के साथ मिलकर खनिज विभाग की वेबसाइट upmines.updsc.gov.in से मिलती-जुलती फर्जी वेबसाइट www.upmines-upsdc.gov.ink बनाई और इस पर ई-ट्रांजिट पास जारी करने का खेल शुरू कर दिया.

शिकायत के बाद साइबर सेल और सर्विलांस टीम ने की संयुक्त कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने स्वाट, साइबर सेल और सर्विलांस टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उनके कब्जे से 1206 बिना प्रिंटेड खनिज परिवहन प्रपत्र, 1532 फर्जी रॉयल्टी, 11 जाली सिक्योरिटी पेपर, एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, चार एंड्रॉइड मोबाइल और 1.10 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं.

आरोपियों के लैपटॉप से मिले 10 हजार से अधिक फोल्डर

पुलिस अधीक्षक प्रबल प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपियों के लैपटॉप से 10 हजार से अधिक फोल्डर मिले हैं, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. जांच में सामने आया कि ये शातिर पट्टा धारकों के आईडी, पासवर्ड और सिक्योरिटी पेपर की जानकारी मुनीमों से साठगांठ कर प्राप्त करते थे और फिर बारकोड स्कैनिंग लिंक में छेड़छाड़ कर फर्जी रॉयल्टी तैयार करते थे. यह रॉयल्टी ठेकेदारों और बिचैलियों के जरिए कार्यदायी संस्थाओं को दी जाती थी, जो इन्हें सरकारी बिलों में लगाकर भुगतान प्राप्त करते थे.

SP के अनुसार, आरोपी AI की मदद से 5 से 10 मिनट में यह जांच लेते थे कि किन प्रपत्रों का उपयोग नहीं हुआ है और फिर उन्हीं की हूबहू नकली रॉयल्टी तैयार कर देते थे. इस फर्जीवाड़े में 6 अन्य आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है. पुलिस ने ऐसे कई कार्यदायी संस्थाओं की पहचान की है जिनके खिलाफ जिलाधिकारी द्वारा नोटिस भी जारी किए गए हैं.

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Abhijeet Chauhan

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

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