Barabanki News: स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान की शुरुआत, जानें इसमें किन-किन रोगों की कब तक होगी जांच
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Healthy Women, Strong Families: बाबाराबंकी जिले में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ प्रभारी मंत्री सुरेश राही ने जिला चिकित्सालय में किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर मध्यप्रदेश के धार से इस अभियान की शुरुआत कर इसे पूरे देश में एक साथ लागू किया.
17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक चलेगा अभियान
यह विशेष अभियान 17 सितम्बर से लेकर 2 अक्टूबर तक लगातार चलेगा. इस दौरान जिले के सभी सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं. इन शिविरों में कैंसर, एनीमिया, ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बीमारियों की जांच की जाएगी. साथ ही गर्भवती महिलाओं, बच्चों और किशोरियों को विशेष रूप से प्राथमिकता दी जाएगी.
महिला स्वास्थ्य पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच
डॉ. यादव ने बताया कि अभियान के तहत न केवल चिकित्सा शिविर लगाए जा रहे हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया जाएगा. इसके लिए आशा बहुओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है, जो घर-घर जाकर महिलाओं और बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली, पोषण और नियमित जांच की महत्ता समझाएंगी. दरअसल, “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार” अभियान केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाता है, जिसमें 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य शामिल है. इस लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को मज़बूत करना अनिवार्य माना गया है. यही कारण है कि यह अभियान निवारक, प्रोत्साहनात्मक और उपचारात्मक सभी स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को समुदाय तक पहुंचाने पर केंद्रित है.
जनता की भागीदारी से होगा सफल
प्रभारी मंत्री सुरेश राही ने शुभारंभ अवसर पर कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा, जब हर परिवार इसकी महत्ता को समझे और सक्रिय भागीदारी निभाए. उन्होंने बताया कि महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा से ही परिवार सशक्त होगा और जब परिवार सशक्त होंगे तभी समाज और राष्ट्र भी सशक्त बन सकेगा. इस अवसर पर जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की कि वे 2 अक्टूबर तक चलने वाले इस अभियान का अधिकतम लाभ उठाएं और अपने परिवार की महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य शिविरों में लेकर जाएं.