Chitrakoot News: कभी पानी के लिए ट्रेन पर निर्भर था चित्रकूट, अब पूरे देश में पहचान, जानें कहानी

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Chitrakoot News: कभी पानी के लिए ट्रेन पर निर्भर था चित्रकूट, अब पूरे देश में पहचान, जानें कहानी


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water conservation: चित्रकूट को प्रदेश में जल संरक्षण के क्षेत्र में चौथा स्थान प्राप्त कर देशभर में अपनी पहचान बना चुका है. इस उपलब्धि पर भारत सरकार द्वारा चित्रकूट के जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन को सम्मानित करते हुए एक करोड़ रुपये की धनराशि से पुरस्कृत किया जाएगा.इनके द्वारा जल संरक्षण के लिए पाठा के क्षेत्र में काफी कार्य किए गए है.

चित्रकूट. उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र लंबे समय तक पानी की किल्लत से जूझता रहा. हालात इतने गंभीर थे कि कभी चित्रकूट में लोगों की प्यास बुझाने के लिए ट्रेन से पानी मंगवाना पड़ता था. लेकिन आज वही चित्रकूट जल संरक्षण की दिशा में प्रदेश में चौथे स्थान पर पहुंचकर देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुका है. इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए भारत सरकार द्वारा जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन को सम्मानित किया जाएगा और एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी. चित्रकूट के जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन ने बताया कि यह सफलता प्रशासनिक टीम और जनपद के लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी, औद्योगिकीकरण और जलवायु परिवर्तन के चलते भूजल स्तर लगातार गिर रहा था. ऐसे में जिले में जल संरक्षण को लेकर कई नवाचार किए गए. अब इसका सकारात्मक असर दिख रहा है और पानी की समस्या धीरे-धीरे दूर हो रही है.

किए गए प्रमुख कार्य

जिला प्रशासन ने मनरेगा, अटल भूजल योजना और अमृत सरोवर मिशन के तहत बड़े पैमाने पर काम किया. तालाब निर्माण: फेज-1 में 159 और फेज-2 में 29 तालाबों का निर्माण. शोक पिट: 1700 शोक पिट तैयार कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा. जल तारा संरचनाएं: हर ग्राम पंचायत में 5 से 10 जल संरचनाएं बनाई गईं. नाले और तालाबों का कायाकल्प: नालों में वॉटर हार्वेस्टिंग टैंक, पुराने तालाबों की सिल्ट सफाई, घाट मरम्मत और सौंदर्यीकरण का कार्य.

किसानों और ग्रामीणों को जोड़ा

जिलाधिकारी ने खेतों की मेडबंदी, वृक्षारोपण और ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीकों को अपनाकर किसानों को जल संरक्षण की दिशा में प्रेरित किया. “जल ही जीवन है” अभियान के तहत गांवों और शहरों में जनजागरूकता रैलियां, गोष्ठियां और स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए. शिवशरण अप्पा जीएन का मानना है कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब लोग जल की हर बूंद का महत्व समझेंगे. अपव्यय रोकने और संसाधनों का सही उपयोग करने से ही पानी की समस्या से स्थायी समाधान निकलेगा.

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