Fact Check: हाथरस में भ्रामक वीडियो से माहौल बिगाड़ने की कोशिश, पुलिस ने बताया अफवाह का सच

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Fact Check: हाथरस में भ्रामक वीडियो से माहौल बिगाड़ने की कोशिश, पुलिस ने बताया अफवाह का सच


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Fact Check: सोशल मीडिया पर हाथरस के लाड़पुर गांव में अनुसूचित जाति के परिवार की हत्या का दावा करते हुए एक वीभत्स वीडियो वायरल हो रहा है. पुलिस जांच में यह दावा फर्जी निकला. जानिए पूरी सच्चाई इस फैक्ट चेक रिपोर्ट में…

Photo-AI
Fact Check News: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक घर में महिलाओं और बच्चों को खून से लथपथ हालत में दिखाया गया है. वीडियो के साथ ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो हाथरस जिले के लाड़पुर गांव का है. यहां एक अनुसूचित जाति के परिवार की हत्या दबंगों द्वारा कर दी गई है और सरकार इस पर चुप है.

सच्चाई क्या है?
हाथरस पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की कोई घटना जिले में घटी ही नहीं है. वायरल वीडियो में दिखाई गई घटना और स्थान पूरी तरह फर्जी और भ्रामक हैं. उक्त वीडियो साल 2024 का पाकिस्तान के मुजफ्फरनगढ का है. भ्रामक तथ्यों के साथ पाकिस्तान के वीडियो को हाथरस का बताकर झूठी अफवाह फैलाई जा रही है.

झूठी अफवाह फैलाने वाले व्यक्ति के विरूद्ध थाना हाथरस जंक्शन में सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्रवाई की जा रही है. उक्त वीडियो का हाथरस जिले से कोई संबंध नहीं है. पूर्व में उक्त वीडियो भ्रामक तथ्यों के साथ वायरल करने के संबंध में मुजफ्फरनगर में भी 13 व्यक्तियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई की गई थी.

हाथरस पुलिस ने दर्ज की FIR
लाड़पुर चौकी प्रभारी भारत भूषण झा की ओर से इस मामले में “बहुजन वॉइस-74” नामक एक्स (पूर्व में ट्विटर) आईडी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है. पुलिस के अनुसार, यह वीडियो जानबूझकर गलत स्थान और जातीय संदर्भ के साथ प्रसारित किया गया है, जिससे समाज में भय, भ्रम और असंतोष फैलाया जा सके. एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

अफवाह फैलाने की साजिश
यह वीडियो केवल जातीय भावनाओं को भड़काने और लोकशांति भंग करने की मंशा से फैलाया गया है. वीडियो के साथ जो कैप्शन जोड़े गए हैं, वे पूरी तरह से भ्रामक हैं और देशभर में असंतोष फैलाने का प्रयास करते हैं.

जनता से अपील
हाथरस पुलिस और प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से अपील की गई है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी हिंसक या संवेदनशील वीडियो को बिना सत्यापन के शेयर न करें. भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट और आपराधिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी.

निष्कर्ष (Conclusion):
दावा: हाथरस के लाड़पुर गांव में अनुसूचित जाति के परिवार की हत्या.
सच्चाई: ऐसी कोई घटना नहीं हुई, वीडियो फर्जी है और जातीय विद्वेष फैलाने के लिए प्रसारित किया गया है.

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राहुल गोयल

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें

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