Ground Report: ‘सोने से ज्यादा कीमती है ये पानी’, पहली बार गांवों में नल से पहुंचा जल
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Chitrakoot Ground Report : चित्रकूट पाठा क्षेत्र में हर घर नल योजना से काफी बदलाव आया है. अब यहां लोग अपने घर के सामने टोटियों से पानी भर रहे है. ये लोग अपने काम में भी समय से जा रहे है. यहां तक की घर में खाना भी वक्त पर बन पा रहा है. कई गांवों की महिलाओं का मानना है कि यह पानी उनके लिए किसी सोने से कम नहीं है. यहां आजादी के बाद पहली बार नल से पानी आया है, वो भी घर के सामने ही. इसने लोगों की जिंदगी एकदम बदल दी है. आइये देखते हैं इस रिपोर्ट में..
चित्रकूट : बुंदेलखंड के चित्रकूट का पाठा क्षेत्र हमेशा से पानी की किल्लत से जूझता आया है. यहां की हर सुबह लोगों के मन में बस एक ही बात आती रही थी कि आज पानी कहां से मिलेगा. लोग सुबह से ही गांव के आस पास मौजूद कुएं या हैडपंपों में पानी भरते नज़र आते थे… आजादी के बाद से ही यहां ऐसे ही हालात थे. इनकी जिंदगी यूं ही पानी लाने की जद्दोजहद में गुजरती रही. लेकिन अब समय बदला है और वक्त के साथ उनके हालात भी बदले. आज वही पाठा के अधिकतर गांव के लोग अपने घर में ही टोटियों से स्वच्छ पानी पा रहे है. टोंटियों से पानी आना उनके लिए किसी सपने के पूरे होने से कम नहीं है. आज यहां गांव के हर शख्स के चेहरे पर मुस्कान है. खासकर उन महिलाओं के लिए जो पानी ढोने की जद्दोजहद में लगी रहती थीं. सोचिये कितनी मुश्किल रही होगी इनकी जिंदगी. आइये जानते हैं लोकल18 की इस ग्राउंड रिपोर्ट में…
हम बात कर रहे हैं चित्रकूट के मानिकपुर पाठा क्षेत्र के मारकुंडी, भौढी पुरवा, गोबरहाई, डोडामाफी, अमचूर नेरूआ, करौहा गांव की.. और भी कई गांव-बस्तियां इसमें शामिल हैं. जहां करीब एक लाख लोगों की आबादी रहती है. देश को आजादी मिलने के बाद से अब तक यहां रहने वाले ये लोग एक बाल्टी पानी के लिए कोसों दूर भटकते थे. दिन हो या रात, हर घर को एक ही चिंता सताती थी कि आखिर कल के लिए पानी कहां से मिलेगा और कैसे बिन पानी के गुजारा होगा? लोग हाथों में बाल्टी लेकर कुआं या हैंड पंप के पास पानी भरने की कतार में खड़े रहते थे. लेकिन अब उनके जीवन में हर घर नल योजना से काफी बदलाव आया है. अब ये लोग अपने घर के सामने पानी की टोटियों से पानी भर रहे हैं और अपने काम पर भी समय से जा पा रहे है. गांव की महिलाओं का मानना है कि यह पानी हमारे लिए किसी सोने से कम नहीं है.
पानी को बहुत संभालकर यूज करते हैं- रिंकी
भौठी पुरवा गांव की रहने वाली रिंकी ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पहले हम लोग का पूरा समय पानी भरने, लाने में निकल जाता था. हम लोग पानी भरने के कारण ना तो समय से खाना बना पाते थे और ना ही अपने काम पर जा पाते थे.. लेकिन जब से हमारे घर के सामने ही टोटी से पानी आने लगा है, हम लोगों के जीवन में काफी बदलाव आया है. समय से खाना बन सकता है और हम लोग समय से अपने काम पर भी निकल जाते हैं. हमने कभी सोचा नहीं था कि हमारे गांव में टोटी से पानी हमारे घर में आएगा. रिंकी ऐसी बात कहती हैं, जिस पर शहर में रहने वाले लोगों को भी अमल करना चाहिए. वह कहती हैं कि हम पानी को बहुत संभालकर यूज करते हैं. गिराते नहीं हैं. जब हमारा बर्तन भर जाता है, तो हम टोंटी बंद कर देते हैं. हमारे लिए पानी बहुत कीमती है.
यह पानी हमारे लिए किसी सोने से कम नहीं- बेनी बाई
वहीं, पाठा गोबरहाई की रहने वाली बेनी बाई ने लोकल 18 को जानकारी में बताया कि पहले हम लोग गांव से कोसों दूर तालाब से पानी लाया करते थे. लेकिन गर्मी के समय में तालाब भी सूख जाते थे. और गांव के हैंड पंप से गंदा पानी निकलता था. हमारा रात दिन पानी भरने में ही निकल जाता था, जब से यह पानी हमको टोटियों से मिलने लगा है. हम लोगों को काफी राहत हुई है. यह पानी हमारे लिए किसी सोने से कम नहीं है, क्योंकि पानी के बिना हमारा जीवन अधूरा था.
वही मारकुंडी निवासी अंकिता त्रिपाठी कहती हैं कि कि योजना ने गर्मी में गंदा पानी पीने से डायरिया जैसी होने वाली वाली खतरनाक बीमारी को भी खत्म कर दिया है. पहले हम लोग गांव से दूर बने तालाब व हैंडपंप का पानी उबालकर या छान कर पीते थे. लेकिन अब हमें एकदम साफ पानी निकला है. हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि हमें पानी हमारे घर में मिलेगा.हमारी वर्षों पुरानी समस्या अब दूर हो गई है.
50 साल बाद हमारे यहां टोंटी लगीं
एक और बुजुर्ग महिला ने कहा कि टोंटी से पानी जबसे हमारे घरों तक आया है, जीवन में बहुत बदलाव आया है. कम से कम सरकार ने सुविधा दे दी. अब खाना पीना भी टाइप से बन जाता है. कम से कम 50 साल हो गए, हमें यहां आए. तबसे पहली बार टोंटी पानी आया है. ये हमारे लिए बहुत कीमती है.
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I currently serve as a Senior Assistant Editor at News18 Hindi, leading State & Local18 operations across Uttar Pradesh, Uttarakhand, Delhi, Himachal Pradesh and Haryana. With over 17 years of experience in jou…और पढ़ें