Photo: कृष्णनगरी में गूंजा भोले बाबा का नाम, हजारों भक्तों ने किया रुद्राभिषेक
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कृष्णनगरी में भक्ति और आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला, जहां देवकीनंदन महाराज के सान्निध्य में हजारों शिवभक्तों ने पार्थिव शिवलिंग निर्माण और रुद्रमहाभिषेक जैसे पुण्य कार्यों में भाग लिया. भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हुए भक्तों ने पंचामृत, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर विश्व शांति और सनातनियों के कल्याण की कामना की.
कृष्णनगरी में देवकीनंदन महाराज के साथ शिवभक्तों ने 2 लाख 11 हजार पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधि-विधानपूर्वक रुद्रमहाभिषेक किया. भगवान भोलेनाथ को पंचामृत, बेलपत्र, पुष्प, दुग्धादि अर्पित कर अकाल मृत्यु वाले सनातनियों के कल्याण तथा विश्व शांति के लिए प्रार्थना की.

देवकीनंदन महाराज ने सभी सनातनियों को अपने जीवन में एक वृक्ष बेलपत्र का लगाकर शिवभक्ति की प्रेरणा दी. जगद्गुरू सुतीक्ष्णदास देवाचार्य महाराज ने श्रोताओं को आशीर्वचन प्रदान किये.

छटीकरा मार्ग स्थित श्री प्रियाकान्तजु मंदिर पर आयोजित 21 लाख पार्थिव शिवलिंग निर्माण, रुद्राभिषेक अनुष्ठान और महाशिवपुराण कथा का चतुर्थ दिवस पूर्ण हुआ.

प्रातः शिवभक्तों ने मिट्टी के छोटे-छोटे शिवलिंग बनाकर अक्षत, रोली लगाकर कथा परिसर में एकत्रित किया. तत्पश्चात देवकीनंदन महाराज के साथ सभी ने पार्थिव शिवलिंगों का अभिषेक कर शिव आराधना की.

शिवमहापुराण कथा के मध्य देवकीनंदन महाराज ने कहा कि सनातनी अपने घरों में बेल का वृक्ष अवश्य लगाएं. स्कंद पुराण, शिव महापुराण और अन्य अनेक ग्रंथों में लिखा है कि बेलपत्र के दर्शन मात्र से ही मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है. बेलपत्र को ‘त्रिदल’ कहा गया है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है.

उन्होने कहा कि सावन का महीना चल रहा है, लेकिन कितने ही सनातनियों के घर के पास शिव मंदिर होते हुए भी वे शिवलिंग पर जल चढ़ाने नहीं जाते, जो अत्यंत दुखद है. आज के युग में लोग मंदिर जाने की बजाय मोबाइल, टीवी, सोशल मीडिया और भोग-विलास में इतने डूब गए हैं कि उन्हें यह याद ही नहीं रहता कि जीवन का अंतिम सहारा केवल भगवान ही हैं.