PHOTOS: राम और कृष्ण को किसने बांधी राखी? जानिए इनकी बहनों की अनसुनी कहानी

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PHOTOS: राम और कृष्ण को किसने बांधी राखी? जानिए इनकी बहनों की अनसुनी कहानी


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अयोध्या: सनातन धर्म में रक्षाबंधन का पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है. यह पर्व भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक होता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि अयोध्या के राजा राम को राखी कौन बांधता है? या फिर भगवान श्रीकृष्ण की कलाई पर रक्षा सूत्र किसने बांधा था? इन सवालों के जवाबों से जुड़े रोचक धार्मिक प्रसंग और परंपराएं हैं, जिन्हें हम आपको इस रिपोर्ट में तस्वीरों के माध्यम से दिखाएंगे.

इस साल रक्षाबंधन सावन माह की पूर्णिमा तिथि को है जो 9 अगस्त को मनाया जाएगा. रक्षाबंधन के दिन बहन अपने भाई की कलाई में राखी बांधती है, जिसके बदले में भाई बहन को रक्षा करने का वचन भी देता है. रक्षाबंधन की परंपरा अति प्राचीन परंपरा है. द्वापर युग, त्रेता युग में इसके कई प्रमाण देखने को मिलते हैं.

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प्रभु राम को राखी उनकी बहन शांता ने बांधी थी. कलयुग में अयोध्या के राजा राम के लिए रक्षाबंधन पर हर साल सिंगी ऋषि आश्रम से राखी आती है, जहां उनकी बहन शांता का भी मंदिर स्थित है. इसी मंदिर से हर साल राखी आती है और अवध के राम को बड़े ही श्रद्धा भाव से वह राखी बांधी जाती है.

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सिंगी ऋषि आश्रम पर रक्षाबंधन का विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन करने के बाद शोभायात्रा के माध्यम से यह रक्षाबंधन राजा राम, बालक राम, माता जानकी और तीनों भाइयों के साथ पवनपुत्र हनुमान को समर्पित किया जाएगा. इसे कल राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा जाएगा.

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श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त पर सभी विग्रहों को बड़ी बहन शांता की ओर से मधुबनी शैली में बनी जरी और मोतियों की राखियां बांधी जाएंगी. ये राखियां महाराष्ट्र के प्रसिद्ध कारीगर शत्रुघ्न राखी वाला की ओर से तैयार की गई हैं. इसके साथ ही, लखनऊ में केले के रेशे से बनी विशेष राखी भी राम लला और राजा राम को भेंट स्वरूप अर्पित की जाएगी. 

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धार्मिक मान्यता के अनुसार, पुत्रेष्ठि यज्ञ के मूर्धन्य आचार्य श्रृंगी ऋषि का विवाह चक्रवर्ती महाराज दशरथ की पुत्री देवी शांता से हुआ था. इसी कारण रक्षाबंधन के अवसर पर देवी शांता की ससुराल, यानी श्रृंगी ऋषि आश्रम से, हर साल प्रभु श्रीराम और उनके अनुजों के लिए रक्षा सूत्र राम मंदिर भेजा जाता है. यह रक्षा सूत्र विधिवत पूजन के पश्चात भगवान को समर्पित किया जाता है.

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महाभारत जैसे पौराणिक ग्रंथ में वर्णित कथा के अनुसार, जब शिशुपाल ने भगवान श्रीकृष्ण के अपमान की सीमा पार कर दी, तब श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका वध कर दिया. इस दौरान उनकी उंगली कट गई. यह देखकर द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का आंचल फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया. संयोगवश वह दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी. मान्यता है कि उसी घटना को रक्षाबंधन पर्व की शुरुआत के रूप में देखा जाता है और उस बंधन के बदले भगवान कृष्ण ने हमेशा द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया. 

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पहली बार जब बालक राम 500 साल बाद भव्य राम मंदिर में विराजमान हुए थे, तो उस ऐतिहासिक अवसर पर भी रक्षाबंधन पर्व बहन शांता के नाम से ही मनाया गया था. सिंगी ऋषि आश्रम से रक्षा सूत्र अयोध्या लाया गया था और विधिपूर्वक प्रभु श्रीराम की कलाई में बांधा गया था. उसी परंपरा का निर्वहन करते हुए इस बार भी गाजे-बाजे और भव्य शोभायात्रा के साथ रक्षाबंधन सिंगी ऋषि आश्रम से अयोध्या लाया जाएगा और राम मंदिर ट्रस्ट को समर्पित किया जाएगा. 

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