Pilibhit News : घर का साधारण कचरा बन रहा PTR के जानवरों के लिए ‘काल’! जंगल में भूल से भी न करें ये काम

0
Pilibhit News : घर का साधारण कचरा बन रहा PTR के जानवरों के लिए ‘काल’! जंगल में भूल से भी न करें ये काम


Last Updated:

Pilibhit Tiger Reserve News : पीलीभीत टाइगर रिज़र्व के जंगलों में घर का साधारण कचरा वन्यजीवों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. प्लास्टिक, पॉलिथीन और फेंका हुआ बचा-खुचा खाना न केवल जानवरों की सेहत बिगाड़ रहा है, बल्कि उनकी जान के लिए भी खतरा बन चुका है. आइए जानते हैं कैसे?

पीलीभीत. बीते कुछ सालों में देशभर में स्वच्छता को लेकर काफी जागरूकता हुई है. मगर बावजूद इसके लोग अपनी हरकतों से बाज नहीं आते, आम जगहों पर तो कचरे के ढ़ेर देखने को मिलते ही हैं. मगर पीलीभीत में टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से गुजरने वाले मार्गो पर भी भारी मात्रा में कचरा फेंका जाता है. घर का साधारण दिखने वाला कचरा जंगली जानवरों और बेजुबान पक्षियों की जान के लिए खतरा बन सकता है. जहां प्लास्टिक, पॉलिथीन, गिलास के टुकड़े या फेंका हुआ खाना उनके लिए जानलेवा साबित होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सही निस्तारण से इन हादसों को टाला जा सकता है.

दरअसल, यूपी के पीलीभीत जिले में फैले जंगलों को वर्ष 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा मिला था. जिसके चलते संरक्षण के लिहाज से यहां तमाम नियम कायदे भी लागू होने लगे. लेकिन पूर्व से ही इस जंगल से कई ऐसे मार्ग गुजरते हैं जिनपर से सामान्य ट्रैफिक भी गुजरता है. इनमें से पीलभीत-पूरनपुर, पीलीभीत-माधोटांडा व खटीमा माधोटांडा मार्ग सबसे प्रमुख है. ऐसे में दिनभर में हजारों वाहन व राहगीर जंगल से गुजरते हैं.

क्या है जंगल के नियम
कई बार अज्ञानता तो कई बार उदंडता में राहगीर जंगल के नियमों को ताक पर रख देते हैं. जंगल के कोर क्षेत्र में उतर कर फोटोग्राफी करना, जंगल मार्ग पर गंदगी करना व जंगल में जंगली जानवरों को भोजन कराना इन मार्गों पर एक आम प्रक्रिया है. लेकिन ऐसा करना कानूनन अपराध है, ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर 500 रुपए या उससे अधिक का जुर्माना एवं वन अधिनियम के तहत कार्यवाही का प्रावधान है. लेकिन बावजूद इसके लोग अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आते. हाल ही में चलाए गए अभियान के दौरान इतने संवेदनशील इलाक़े में से भी भारी मात्रा में कचरा निकाला गया है.

बेजुबानों की जा सकती है जान
अधिक जानकारी देते हुए वरिष्ठ एवं पर्यावरण पत्रकार केशव अग्रवाल बताते हैं कि किसी भी स्थान पर कचरा फेंकना, मृदा प्रदूषण और भूमिगत जल प्रदूषण का सबसे प्रमुख कारण होता है. वहीं बात अगर जंगल की करें तो यह प्रत्यक्ष रूप से प्रदूषण के साथ ही साथ मासूम वन्यजीवों की जान के साथ भी खिलवाड़ है. अगर भोजन समझ कर कोई वन्यजीव प्लास्टिक निगल लेता है तो इसके कारण उसकी श्वास नली व पाचनतंत्र पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ता है. कई मामलों में तो महज़ एक प्लास्टिक के रैपर के चलते वन्यजीव की जान भी जा सकती है. लोकल 18 के माध्यम से सभी लोगों से अनुरोध है कि कचरे को कूड़ेदान या फिर नियत स्थान पर ही डिस्पोज करें.

लोगों को किया जाएगा जागरूक
पूरे मामले पर अधिक जानकारी देते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि जंगल से गुजरने वाले मार्ग पर सफाई अभियान चलाया गया था. लोगों को इस विषय पर जागरुक होने की आवश्यकता है, ऐसा करते पाए जाने पर नियमनुसार कारवाई अमल में लाई जाएगी.

मृत्‍युंजय बघेल

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

homeuttar-pradesh

Pilibhit News : घर का साधारण कचरा बन रहा PTR के जानवरों के लिए ‘काल’!



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *