Public opinion Ghazipur: UP में 50% हाइक से जनता चीख उठी, बाेली- बिजली महंगी, इनकम वही घर चलाना हुआ इंपॉसिबल
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expensive lightning strike: उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में 40-50% बढ़ोतरी के प्रस्ताव ने जनता की चिंता बढ़ा दी है. किसानों को सिंचाई महंगी होने से खेती पर संकट दिख रहा है, वहीं ई-व्हीकल मालिक और मिडिल क्लास भी अतिरिक्त बोझ से परेशान हैं. स्मार्ट मीटर से बढ़े बिलों ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं. लोग 100 यूनिट तक मुफ्त बिजली की मांग कर रहे हैं। जनता का मानना है कि यह बढ़ोतरी सीधे उनकी रोज़मर्रा की जिंदगी पर हमला है.
ई-व्हीकल मालिकों की चिंता, विकल्प खत्म
पेट्रोल-डीज़ल की महंगाई से बचने के लिए ई-व्हीकल अपनाने वाले लोग अब बिजली दरों से परेशान हैं. शिक्षक अवनीश प्रताप सिंह रघुवंशी ने कहा कि मैंने इलेक्ट्रिक बाइक खरीदी थी ताकि पेट्रोल के बढ़ते दाम से बच सकूं लेकिन अगर बिजली भी इतनी महंगी हो जाएगी तो चार्जिंग पर ही खर्च बढ़ जाएगा. आम आदमी आखिर किस रास्ते पर जाए- पेट्रोल महंगा या बिजली महंगी?
स्मार्ट मीटर और नई दरें: मिडिल क्लास की जेब पर वार
मुफ्त बिजली की मांग और गुस्से का इजहार
स्थानीय निवासी शुभम सिंह ने कहा कि सरकार को कम-से-कम 100 यूनिट तक बिजली मुफ्त देनी चाहिए. उन्होंने बताया कि उनका बिल पहले 200-300 रुपये आता था, लेकिन अब 400-500 रुपये तक पहुंच रहा है। यह सीधे मिडिल क्लास की आय पर हमला है.
वहीं कुछ निवासियों ने यह आरोप भी लगाया कि आज भी बहुत से लोग ‘कटिया कनेक्शन’ से मुफ्त बिजली का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि ईमानदारी से बिल भरने वालों पर बोझ डाला जा रहा है.
विकास या जनता की जेब पर बोझ?
जनता की राय साफ है कि बिजली दरों में यह प्रस्तावित बढ़ोतरी किसी भी हाल में उचित नहीं है. पहले से महंगाई, स्मार्ट मीटर की परेशानियाँ और अब बिजली का अतिरिक्त बोझ—इन सबने आम आदमी की नाक में दम कर दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या विकास का मतलब जनता की जेब खाली करना है? अगर यह फैसला लागू हुआ, तो यह सीधे तौर पर जनता की रोज़मर्रा की जिंदगी पर कुठाराघात साबित होगा.