Sambhal Masjid Vivad: मस्जिद या मंदिर? संभल विवाद पर हाईकोर्ट खोलेगा कल फैसला का दरवाजा
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Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट सोमवार को संभल जामा मस्जिद सर्वे मामले में फैसला सुनाएगी. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच दोपहर 2 बजे निर्णय देगी. मस्जिद कमेटी की अर्जी पर 13 मई को फैसला सुरक्षित हुआ …और पढ़ें
संभल मस्जिद विवाद.
प्रयागराज. यूपी का इलाहाबाद हाईकोर्ट संभल जामा मस्जिद सर्वे मामले में सोमवार को अपना फैसला सुनाएगी. हाई कोर्ट ने संभल के जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद पर मस्जिद कमेटी की ओर से दाखिल सिविल डिवीजन अर्जी पर बहस पूरी होने के बाद 13 मई को फैसला सुरक्षित कर लिया था. जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल की सिंगल बेंच अब सोमवार को दोपहर 2:00 बजे अपना फैसला सुनाएगी. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले से यह तय होगा कि संभल के जिला अदालत में जामा मस्जिद के सर्वे का मुकदमा चलेगा या नहीं चलेगा.
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन और सात अन्य ने सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल की अदालत में एक मुकदमा दायर किया है. जिसमें यह तर्क दिया गया है कि संभल के कोट पूर्वी स्थित जामा मस्जिद एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी. वादियों की ओर से इसे हरिहर मंदिर बताया गया है. वादी ने हरिहर मंदिर में प्रवेश के अधिकार की घोषणा की मांग की है.
दीवानी अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए एएसआई को एडवोकेट कमिश्नर के साथ सर्वे का निर्देश दिया था और मुकदमे की पोषणीयता पर भी सवाल उठाया था. हाईकोर्ट ने संभल की दीवानी अदालत के समक्ष लंबित मूल मुकदमे की कार्रवाई पर 8 जनवरी 2025 को अंतरिम आदेश से रोक लगा दी थी. जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी की पुनरीक्षण याचिका यानि रिवीजन पिटीशन पर हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग यानि एएसआई को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था. कोई हलफनामा दाखिल नहीं होने पर कोर्ट ने आगे का समय दिया.
यह पुनरीक्षण याचिका सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद की गई, जिसमें संभल की दीवानी अदालत के समक्ष पूरी कार्रवाई के साथ मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती दी गई. याचिका में कहा गया है कि मुकदमा 19 नवंबर 2024 की दोपहर दाखिल किया गया था और कुछ ही घंटों के भीतर अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया. साथ ही उसे मस्जिद में प्रारंभिक सर्वेक्षण का निर्देश दिया, जो उसी दिन यानी 19 नवंबर को और फिर 24 नवंबर 2024 को किया गया था. अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट 29 नवंबर तक दाखिल की जाए.
दीवानी अदालत ने 19 नवंबर को ही हिंदू पक्ष के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि मस्जिद मुगल सम्राट बाबर द्वारा 1526 में संभल में हरिहर मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी. हालांकि इस बीच 12 मार्च के हाईकोर्ट के आदेश से संभल जामा मस्जिद की रंगाई पुताई का काम भी एएसआई की देखरेख में पूरा कर लिया गया है. हालांकि कोर्ट के आदेश से सिर्फ बाहरी हिस्से में रंगाई पुताई की गई है.
न्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.
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