Sultanpur News: बूढ़ी हड्डियां, जवान जज़्बा… 27 साल की नौकरी, अब 65 साल की उम्र में खींच रहे रिक्शा, संघर्ष की मिसाल हैं मांगू निषाद

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Sultanpur News: बूढ़ी हड्डियां, जवान जज़्बा… 27 साल की नौकरी, अब 65 साल की उम्र में खींच रहे रिक्शा, संघर्ष की मिसाल हैं मांगू निषाद


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Sultanpur News: सुल्तानपुर के 65 वर्षीय मांगू निषाद ने 27 साल मुंबई में मेहनत से काम किया, लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि उन्हें रिक्शा चलाकर पेट पालना पड़ रहा है. उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है और रातें रिक्शे पर ही कटती हैं. पढ़िए संघर्ष से भरी एक सच्ची और मार्मिक कहानी…

सुल्तानपुर: दो वक्त की रोटी और जीवन की मजबूरी लोगों को किस हद तक संघर्ष करने पर मजबूर कर देती है, इसका एक जीवंत उदाहरण हैं सुल्तानपुर के रहने वाले 65 वर्षीय मांगू निषाद. जिन्होंने मुंबई में 27 साल तक नौकरी की, लेकिन आज वो सुल्तानपुर की सड़कों पर माल ढोने वाला रिक्शा चला रहे हैं. उनका कोई स्थायी ठिकाना नहीं है. दिन भर मेहनत करने के बाद रात में कहीं भी रिक्शा खड़ा करके उसी पर सो जाते हैं. महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बोझ ने उन्हें इस हाल में ला खड़ा किया है.

मुंबई की कमाई, लेकिन गांव में गरीबी
नांदे ग्राम बेलहरी के रहने वाले मांगू निषाद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी के 27 साल मुंबई में नौकरी करते हुए बिताए. लेकिन, अब पारिवारिक परिस्थितियों के कारण उन्हें वापस अपने गांव लौटना पड़ा, जहां वे रोज़ाना सुबह 6 बजे से लेकर देर शाम तक ठेला चलाकर माल ढोते हैं.

पांच बच्चों की जिम्मेदारी, कमाई में नहीं है दम
मांगू के परिवार में तीन बेटियां और दो बेटे हैं. घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है. वह रोज करीब 300 से 400 रुपए तक की कमाई कर लेते हैं, लेकिन आज की महंगाई के दौर में यह रकम जीवन यापन के लिए बिल्कुल नाकाफी है.

रिक्शा ही है घर, सड़क किनारे ही मिलती है नींद
जब उनसे पूछा गया कि रात को कहां सोते हैं, तो मांगू ने बताया कि सुल्तानपुर बस स्टैंड से लेकर पंचो पिरान तक-जहां भी जगह मिल जाती है, वहीं पर अपना रिक्शा खड़ा कर लेते हैं और उसी पर सो जाते हैं. दिनभर की थकावट इतनी अधिक होती है कि मच्छरों के काटने या किसी कीट के डसने का भी असर महसूस नहीं होता. थकान के आगे सब फीका लगता है.

राहुल गोयल

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें

राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्‍थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें

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बूढ़ी हड्डियां, जवान जज़्बा…, अब 65 साल की उम्र में खींच रहे रिक्शा



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