अब हर टीचर के साथ होगा सारथी! यूपी के स्कूलों में बदल जाएगी पढ़ाई की तस्वीर, जानें प्लान
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Lucknow News: उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने वाला है. योगी सरकार ने शिक्षकों को तकनीक से जोड़ने और पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए ‘निपुण शिक्षक सारथी’ नाम का एक नया पायलट मॉडल शुरू किया है. चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर जैसे जिलों में शुरू हुई इस पहल का मकसद शिक्षकों को तकनीक के जरिए और ज्यादा मजबूत बनाना है. अब कक्षा 2 के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि उनकी भाषा और गणित की नींव पक्की हो सके.
योगी सरकार ने यूपी के 5 जिलों में निपुण शिक्षक सारथी पायलट मॉडल लॉन्च किया है.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अब पढ़ाई का तरीका बदलने वाला है. योगी सरकार ने निपुण भारत मिशन को जमीन पर उतारने के लिए एक शानदार पहल की है, जिसका नाम है ‘निपुण शिक्षक सारथी’. इस कार्यक्रम के जरिए सरकार शिक्षकों को तकनीक से लैस कर रही है ताकि वे बच्चों को और बेहतर तरीके से पढ़ा सकें. इस योजना की खास बात यह है कि अब शिक्षक केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि तकनीक का हाथ थामकर बच्चों के भविष्य के असली सारथी बनेंगे. फिलहाल इसे राज्य के 5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है.
इन 5 जिलों से होगी बदलाव की शुरुआत
सरकार ने इस नई व्यवस्था को लागू करने के लिए चित्रकूट, सोनभद्र, बलरामपुर, गोरखपुर और सीतापुर को चुना है. इनमें से चित्रकूट, सोनभद्र और बलरामपुर जैसे पिछड़े (आकांक्षी) जिलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जबकि गोरखपुर और सीतापुर के कुछ खास ब्लॉक इसमें शामिल किए गए हैं. इन इलाकों में शिक्षा के स्तर को सुधारने और शिक्षकों को हर कदम पर मदद देने के लिए इस मॉडल को प्राथमिकता दी गई है.
15 खास सारथी करेंगे शिक्षकों की मदद
इस पूरे प्रोग्राम को चलाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने 15 राज्य स्तरीय विशेषज्ञों को तैयार किया है. इनका दो दिन का विशेष प्रशिक्षण 16 अप्रैल को पूरा हो गया है. ये विशेषज्ञ तकनीक के जरिए सीधे शिक्षकों से जुड़े रहेंगे. अगर किसी शिक्षक को क्लास में पढ़ाने के दौरान कोई दिक्कत आती है, तो ये सारथी तुरंत उसका समाधान करने में मदद करेंगे. इससे शिक्षकों को अकेलापन महसूस नहीं होगा और उन्हें लगातार नया सीखने को मिलेगा.
फोन और तकनीक से बढ़ेगा संवाद
इस नए मॉडल में सबसे बड़ा बदलाव बातचीत के तरीके में किया गया है. पहले जहां तकनीकी टीम और शिक्षकों के बीच दिन भर में मुश्किल से एक या दो बार बात हो पाती थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 18 से 20 बार किया गया है. यानी अब शिक्षक और एक्सपर्ट्स आपस में ज्यादा संवाद कर सकेंगे. इसका सीधा फायदा यह होगा कि शिक्षकों को उनकी जरूरत के हिसाब से सही सलाह और मार्गदर्शन मिल पाएगा.
कक्षा 2 के बच्चों पर रहेगा खास फोकस
योगी सरकार का पूरा जोर इस बात पर है कि बच्चों की नींव शुरू से ही मजबूत रहे. इसीलिए इस कार्यक्रम के तहत कक्षा 2 के बच्चों की भाषा और गणित सुधारने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. अगर बच्चा शुरुआती कक्षाओं में ही इन विषयों में पक्का हो जाएगा, तो आगे की पढ़ाई उसके लिए बहुत आसान हो जाएगी. खेल-खेल में और बिना किसी मानसिक दबाव के बच्चों को सिखाना इस मुहिम का मुख्य हिस्सा है.
कम समय और कम खर्च में बेहतर रिजल्ट
डिजिटल तकनीक पर आधारित होने के कारण इस मॉडल से समय और पैसा दोनों बचेगा. अब अधिकारियों को बार-बार दूर-दराज के स्कूलों का चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, बल्कि तकनीक के जरिए वे हर शिक्षक तक पहुंच सकेंगे. इस पहल में उन स्कूलों को सबसे पहले चुना गया है जिनका प्रदर्शन पिछले कुछ समय में थोड़ा कमजोर रहा है. सरकार की कोशिश है कि हर बच्चे को बराबरी की और अच्छी शिक्षा मिल सके.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें