इस विधि से करें मछली पालन, कम जगह में होगा तगड़ा मुनाफा…

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इस विधि से करें मछली पालन, कम जगह में होगा तगड़ा मुनाफा…


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Fish Farming Benefits: रायबरेली में मछली पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. शशांक नमन बताते हैं कि बायो फ्लॉक तकनीक से कम लागत में अधिक मुनाफा संभव है. यह तकनीक पर्यावरणीय अनुकूल है और साल में दो बार उत्पादन देती…और पढ़ें

राय बरेली: मछली पालन आज के समय में न केवल किसानों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था में भी अहम योगदान देता है. पूरे विश्व में भारत मछली पालन के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है, और इसका मुख्य कारण किसानों द्वारा मुनाफा कमाना है. रायबरेली जिले में भी मछली पालन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, लेकिन अगर किसान बायो फ्लॉक तकनीक अपनाएं तो कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं. यह तकनीक खास इसलिए है क्योंकि इसमें अधिक जमीन या बड़े तालाब की आवश्यकता नहीं होती, और इससे साल में दो बार मछली का उत्पादन संभव है.

बायो फ्लॉक तकनीक क्या है?
एक्वाकल्चर के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव रखने वाले रायबरेली के मत्स्य निरीक्षक शशांक नमन (बीएससी एग्रीकल्चर, इलाहाबाद विश्वविद्यालय) बताते हैं कि बायो फ्लॉक तकनीक आधुनिक और पर्यावरणीय अनुकूल मत्स्य पालन की तकनीक है. इस प्रणाली में मछलियों द्वारा उत्पादित अपशिष्ट जैसे नाइट्रोजन को उपयोगी बायोमास में बदला जाता है. सूक्ष्म जीव अपशिष्ट को खाकर उसे प्रोटीन में बदलते हैं, जिसे मछलियां पुनः भोजन के रूप में उपयोग करती हैं.

बायो फ्लॉक कैसे तैयार करें
शशांक नमन बताते हैं कि बायो फ्लॉक का निर्माण एक बार करना होता है और यह 10 साल तक इस्तेमाल किया जा सकता है. इसे बनाने के लिए लोहे की चादर का उपयोग किया जाता है और ऊपर लोहे की जाली लगा दी जाती है जिससे यह सुरक्षित हो जाए. ऑक्सीजन आपूर्ति के लिए एयरेशन सिस्टम का प्रयोग किया जाता है, जिससे मछलियों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती रहे. लगभग दो घन मीटर के बायो फ्लॉक का निर्माण लगभग 10 हजार रुपए में किया जा सकता है.

साल में दो बार उत्पादन
बायो फ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने पर एक वर्ष में दो बार मछली का उत्पादन संभव है. इस विधि में मछलियां तेजी से बढ़ती हैं और टैंक में छोड़ने के 5-6 महीने बाद तैयार हो जाती हैं.

बायो फ्लॉक तकनीक के फायदे
बायो फ्लॉक तकनीक से मछली पालन करने के कई फायदे हैं. पानी की गुणवत्ता बनी रहती है और बार-बार पानी बदलने की जरूरत नहीं होती. मछलियों को सामान्य भोजन के अलावा सूक्ष्म जीवों का सेवन करने का मौका मिलता है, जिससे खाद्य लागत घटती है. मछलियां पर्याप्त पोषण मिलने के कारण तेजी से विकसित होती हैं. यह तकनीक जल संरक्षण में मदद करती है और कम जगह में अधिक मछलियों का उत्पादन संभव होता है.
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शशांक नमन का कहना है कि बायो फ्लॉक तकनीक अपनाकर मत्स्य पालक कम समय और कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं, साथ ही पर्यावरण की सुरक्षा में भी योगदान दे सकते हैं. रायबरेली में यह तकनीक किसानों के लिए आर्थिक रूप से लाभदायक साबित हो रही है और भविष्य में और अधिक किसान इसे अपनाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं.

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