कभी गायक तो कभी कारपेंटर बनते हैं गुरुजी, अनोखे अंदाज में सिखाते हैं सबक
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महराजगंज के गिरहिया बंजरीपट्टी कंपोजिट स्कूल के शिक्षक अरविंद अपनी अनोखी शिक्षण शैली के लिए चर्चा में हैं. वे कभी गाकर तो कभी खुद कारपेंटर बनकर लर्निंग टूल तैयार कर बच्चों को पढ़ाते हैं. उनकी इस रचनात्मक पहल से बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं, जिससे उनकी रुचि और समझ दोनों बढ़ रही हैं.
महराजगंज: सरकारी विद्यालयों को लेकर हमारे मन में एक स्टीरियोटाइप बना हुआ है. हमारे समाज में ऐसी बातें होती हैं कि सरकारी विद्यालय में शिक्षा व्यवस्था अच्छी नहीं होती है और वहां पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहता है. महराजगंज जिले के निचलौल क्षेत्र में स्थित कंपोजिट स्कूल गिरहिया बंजारीपट्टी सरकारी स्कूल सरकारी विद्यालयों के प्रति बने इस स्टीरियोटाइप को तोड़ता नजर आता है. इस सरकारी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था न सिर्फ हमें हैरान करती है बल्कि हमें एक बार फिर से सोचने के लिए मजबूर कर देती है.
इस विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था को लेकर हर तरफ तारीफ होती है. विद्यालय की इस अलग पहचान बनाने यहां के शिक्षकों का एक बड़ा योगदान होता है. इस विद्यालय के अध्यापक अरविंद विश्वकर्मा अपनी खास शिक्षण शैली के लिए जाने जाते हैं. उनके पढ़ने का अंदाज बहुत ही निराला है जो बच्चों को खूब पसंद आता है. बच्चों को व्यावहारिक तरीके से विषयों की जानकारी देना उनकी खास शैली है. अरविंद विश्वकर्मा बहुत ही मनोरंजक तरीके से कठिन विषयों को भी विद्यार्थियों के लिए आसान बना देते हैं.
कभी बच्चों के लिए बनते हैं गायक तो कभी कारपेंटर
कंपोजिट विद्यालय गिरहिया बंजारीपट्टी के शिक्षक अरविंद विश्वकर्मा इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं. उनके पढ़ाने का एक अलग अंदाज सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है. छोटे बच्चों को पढ़ाना काफी मुश्किल माना जाता है, लेकिन अरविंद विश्वकर्मा इसे मुश्किल नहीं बल्कि अलग शिक्षण शैली से बहुत मनोरंजन से भरपूर बना देते हैं. वह बच्चों को पढ़ाने के लिए और कठिन विषयों की जानकारी के लिए गायन शैली का भी प्रयोग करते हैं.
इसके साथ ही लकड़ियों के टुकड़ों और अन्य दूसरे वस्तुओं से लर्निंग टूल भी बनाते हैं जो पढ़ाई को आसान बनाते हैं. खास बात है कि जब वह क्लास में एंट्री करते हैं तो बच्चों के चेहरे पर एक अलग तरह की मुस्कान देखने को मिलती है. अरविंद विश्वकर्मा ने लोकेल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है. जैसे-जैसे उन्हें लगा की बच्चों को पढ़ाने के लिए जिन वस्तुओं की जरूरत है उन्होंने उसे तैयार किया. वह बच्चों को पढ़ाने के लिए कभी गायक बन जाते हैं तो कभी उनके लिए लर्निंग टूल बनाने के लिए कारपेंटर भी बन जाते हैं.
बच्चों को पढ़ाने के लिए बनाते हैं लर्निंग टूल
आज के समय में ऐसे शिक्षक बहुत ही कम देखते हैं जो बच्चों को इतने डेडीकेशन के साथ पढ़ाते हैं. अरविंद विश्वकर्मा बताते हैं कि मनोरंजक तरीके से पढ़ाने का फायदा यह है कि बच्चे किसी भी विषय को भी व्यावहारिक रूप से समझते हैं और उनके जहन में हमेशा वह चीज याद रहती हैं.
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि लर्निंग टूल बनाने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ती है. हालांकि, इसके तैयार हो जाने से बच्चों की पढ़ाई आसान हो जाती है. उन्होंने बताया कि लर्निंग टूल बनाते समय यह कोशिश करते हैं कि वह जीरो इन्वेस्टमेंट का हो लेकिन ऐसा पॉसिबल होता नहीं है. उनके बने लर्निंग टूल मैथ के अलग-अलग टॉपिक को आसानी से डिफाइन करते हैं और इससे बच्चों को गणित के सवालों को समझने की प्रक्रिया आसान हो जाती है.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें