कांवड़‍ियों को बदनाम किया जा रहा तो मुहर्रम पर लातों के भूत बातों से नहीं सुधरेंगे.. जानें सीएम योगी के इस बयान के क्‍या हैं मायने

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कांवड़‍ियों को बदनाम किया जा रहा तो मुहर्रम पर लातों के भूत बातों से नहीं सुधरेंगे.. जानें सीएम योगी के इस बयान के क्‍या हैं मायने


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CM Yogi’s Statement On Kanwar Yatra : सीएम योगी ने कांवड़ यात्रा को एकता का संगम बताया और मुहर्रम की घटनाओं का जिक्र करते हुए विरोधियों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि मुहर्रम का हर जुलूस उत्पात का कारण बनता था…और पढ़ें

Yogi Adityanath

हाइलाइट्स

  • सीएम योगी ने मुहर्रम की घटनाओं का जिक्र किया.
  • कांवड़ यात्रा को एकता का संगम बताया.
  • रजनीश गंगवार की कविता पर विवाद हुआ.
लखनऊ : सावन के महीने में शुरू हुई कांवड़ यात्रा में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. जहां एक तरफ बीजेपी के विरोधी कांवड़ यात्रा को बदनाम करने में जुटे हुए हैं, वहीं अब सीएम योगी ने खुद विरोधियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. गौरतलब है कि सीएम योगी 2 दिनों के दौरे पर कल काशी में थे. वहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुहर्रम और सावन का जिक्र करते हुए बड़ा बयान दिया है. जौनपुर में मुहर्रम के दौरान ऊंचे ताजिए की वजह से हुई दुर्घटना के बाद लोगों के विरोध का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि मैंने पुलिस से कहा कि लाठी मार कर के बाहर करो इनको क्योंकि ये लातों के भूत हैं, बातों से मानेंगे नहीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि मुहर्रम का हर जुलूस उत्पात, आगजनी और तोड़फोड़ का कारण बनता था. दूसरी तरफ कांवड़ यात्रा चल रही है, जो एकता का अद्भुत संगम है.

सीएम योगी ने कहा कि सावन का महीना चल रहा है. इससे कुछ दिन पहले मुहर्रम था. हमने नियम बना दिए थे कि ताजिए की लंबाई सीमित रखें. इससे बिजली, पेड़ की टहनी को नुकसान पहुंचता था. जौनपुर में एक घटना हुई. वहां ताजिया इतना ऊंचा था कि हाई टेंशन लाइन की चपेट में आ गया. इस दौरान 3 लोग मारे गए, बाद में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बवाल किया और रोड जाम कर दिया. पुलिस ने मुझसे पूछा तो मैंने कहा ‘लाठी मारो इनको. ये लातों के भूत हैं, बातों से नहीं मानेंगे. इसका किसी ने सोशल मीडिया पर विरोध नहीं किया.

सही नहीं है कांवड़ यात्रा का मीडिया ट्रायल
वहीं सावन में कांवड़ यात्रा का जिक्र करते हुए सीएम योगी ने कहा कि आज कांवड़ यात्री भक्ति भावना से चलते हैं. 200 से 400 किलोमीटर कांवड़ को कंधे पर लेकर चले जाते हैं. कोई बवाल नहीं होता लेकिन उनका भी मीडिया ट्रायल होता है. उन्हें उपद्रवी आतंकवादी तक बोला जाता है. ये वो मानसिकता है, जो हर प्रकार से भारत की विरासत और आस्था को अपमानित करने का काम करती है. यही लोग सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट बनाकर जातीय संघर्ष फैलाने का काम करते हैं. आइए ये समझने की कोशिश करते हैं कि सीएम योगी ने ऐसा बयान क्यों दिया और कौन कर रहा है कांवड़ यात्रा को बदनाम.

रजनीश गंगवार की कविता… संयोग या प्रयोग?
पिछले दिनों बरेली के एक शिक्षक का वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह छात्रों को संदेश दे रहे हैं कि ‘कांवड़ लेने मत जाना, तुम ज्ञान के दीप जलाना।’ बहेड़ी के एमजीएम इंटर कॉलेज में रजनीश गंगवार की इस कविता पर बखेड़ा खड़ा हो गया था. इसका वीडियो भी सामने वायरल हुआ. बाद में हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक पर एफआईआर दर्ज की. हिंदू संगठनों के विरोध का असर भी दिखा और रजनीश गंगवार ने माफी भी मांगी लेकिन मामले में ट्विस्ट उस समय आया जब अखिलेश यादव ने रजनीश गंगवार के समर्थन में एक्स पर पोस्ट किया. उसके बाद रजनीश गंगवार ने बीजेपी और सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. हालांकि रजनीश गंगवार को दिक्कत सिर्फ कांवड़ यात्रा से है. उन्हें मुहर्रम, बुर्का प्रथा और समाज की अन्य बुराइयां नहीं दिखती और न ही कोई कविता इन मुद्दों पर रजनीश गंगवार ने लिखी है. ये संयोग है या प्रयोग ये तो सिर्फ वही जानते हैं.

पहले भी उठे हैं कांवड़ यात्रा पर सवाल
पिछले दिनों सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कांवड़ यात्रा और यूपी सरकार पर तंज कसते हुए कहा था कि सरकार को ऐसा करना चाहिए कि कमिश्नर, डीएम और एसपी को कांवड़ यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था करने के लिए तैनात किया जाना चाहिए और सीओ और एसडीएम उनके पैर दबाने के लिए. इससे शायद उन्हें राहत मिले. यह हमारी वैदिक परंपरा है. सरकार को एक आदेश जारी करना चाहिए, जिसमें कहा जाए कि डीएम, एसपी कांवड़ यात्रियों के लिए भोजन और स्वास्थ्य की व्यवस्था करेंगे और सीओ, एसडीएम उनकी पैर दबाकर सेवा करेंगे. वहीं अपनी सेक्युलर छवि को मजबूत बनाने के लिए राहुल गांधी का फेमस बयान था कि जो लोग मंदिर जाते हैं वही महिलाओं से गलत व्यवहार करते हैं.

क्या है सीएम योगी का मकसद?
2014 के बाद हिंदू युवाओं का एक ऐसा भक्त तैयार हुआ है जो छद्म धर्मनिरपेक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है. जो यह सवाल पूछ रहा कि अगर पर्दा गलत है तो बुर्का प्रथा सही कैसे. अगर कांवड़ उठाने से रोजगार नहीं मिलेगा तो मुहर्रम में लाठी चलाने से कैसे जीडीपी का ग्रोथ होगा. वहीं कांग्रेस समेत पूरा विपक्ष लगातार हिंदुओं को जातियों में बांटने और सनातन परंपरा पर सवाल खड़े कर रहा है. वहीं सीएम योगी की कोशिश इस युवा वर्ग को साधने की है.

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कांवड़‍ियों को बदनाम किया जा रहा तो मुहर्रम पर लातों के भूत बातों से नहीं…



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