कानपुरः 73 साल की उम्र में भी बाल गोविंद शतरंज में दे रहे दिग्गज खिलाड़ियों को मात

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कानपुरः 73 साल की उम्र में भी बाल गोविंद शतरंज में दे रहे दिग्गज खिलाड़ियों को मात


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Kanpur news: कानपुर के गोविंद नगर निवासी बाल गोविंद अवस्थी इस सोच को पूरी तरह बदल रहे हैं. 73 साल की उम्र में भी उनका सबसे बड़ा साथी शतरंज की बिसात है. हर दिन कई घंटे तक शतरंज खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. उनकी तेज सोच और शानदार चालों के आगे अब तक 30 देशों के खिलाड़ी हार मान चुके हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय शतरंज संस्था फिडे (FIDE) की रेटिंग में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है.

कानपुर: आमतौर पर 70 साल की उम्र के बाद लोग अपनी सेहत और आराम को लेकर ज्यादा सोचने लगते हैं. लेकिन कानपुर के गोविंद नगर निवासी बाल गोविंद अवस्थी इस सोच को पूरी तरह बदल रहे हैं. 73 साल की उम्र में भी उनका सबसे बड़ा साथी शतरंज की बिसात है. हर दिन कई घंटे तक शतरंज खेलना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है. उनकी तेज सोच और शानदार चालों के आगे अब तक 30 देशों के खिलाड़ी हार मान चुके हैं. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय शतरंज संस्था फिडे (FIDE) की रेटिंग में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है.

बाल गोविंद अवस्थी बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही शतरंज पसंद था. मुंशी प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी शतरंज के खिलाड़ी पढ़ने के बाद इस खेल के प्रति उनका लगाव और बढ़ गया था. हालांकि उस समय सही मार्गदर्शन नहीं मिलने से यह शौक आगे नहीं बढ़ सका. कई साल बाद उनके घर के पास डीबीएस डिग्री कॉलेज के एक कर्मचारी ने उन्हें शतरंज की बारीकियां सिखाईं. बस यहीं से उनका पुराना जुनून फिर जाग उठा. उन्होंने लगातार अभ्यास किया और देखते ही देखते राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना ली.

शतरंज दिमाग को रखता है हमेशा सक्रिय

बाल गोविंद अवस्थी का मानना है कि शतरंज सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि दिमाग की सबसे अच्छी एक्सरसाइज है. उनका कहना है कि उम्र चाहे 80, 90 या 100 साल ही क्यों न हो जाए, अगर इंसान नियमित शतरंज खेलता रहे तो उसकी सोचने-समझने की क्षमता मजबूत बनी रहती है. वह कहते हैं कि दूसरे खेलों में टीम या साथी की जरूरत होती है, लेकिन शतरंज अकेले भी खेला जा सकता है. आज मोबाइल और कंप्यूटर पर भी यह खेल आसानी से उपलब्ध है, इसलिए हर उम्र के लोगों को इसे जरूर खेलना चाहिए.वह बताते हैं कि हर रविवार उनके घर पर शतरंज प्रेमियों की अच्छी-खासी भीड़ जुटती है. कई खिलाड़ी उनसे मुकाबला करने आते हैं और उनसे नई चालें सीखते हैं. वर्षों तक शिक्षक रहने वाले अवस्थी कहते हैं कि शतरंज ने उन्हें हमेशा सीखने और सिखाने का अवसर दिया है.

100 साल तक खेलते रहने का सपना

बाल गोविंद अवस्थी आज भी खुद को पूरी तरह फिट महसूस करते हैं. उनका कहना है कि उन्हें न शुगर है और न ही ब्लड प्रेशर की कोई समस्या. वह रोजाना तीन से चार घंटे शतरंज खेलते हैं और यही उनकी फिटनेस का सबसे बड़ा राज है. मुस्कुराते हुए वह कहते हैं कि उन्होंने तय कर लिया है कि 100 साल की उम्र तक शतरंज खेलते रहेंगे.उन्हें साल 2011 का एक मुकाबला आज भी याद है, जब पोस्ट ऑफिस कर्मचारी और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हरिओम शर्मा के साथ उनकी कड़ी बाजी हुई थी. कई घंटे तक चले मुकाबले के बाद खेल ड्रॉ रहा, लेकिन वह मुकाबला आज भी उनकी यादों में ताजा है.अब उनका अगला लक्ष्य सितंबर में दिल्ली में होने वाला रैपिड चेस टूर्नामेंट और दिसंबर में उदयपुर में आयोजित प्रतियोगिता है. 73 साल की उम्र में भी उनका जोश और आत्मविश्वास यही संदेश देता है कि अगर जुनून जिंदा हो, तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …

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