गाजियाबाद में दुकान चलाने वाले हो जाएं सावधान! फटाफट कर लें ये काम, वरना हो जाएगी सील

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गाजियाबाद में दुकान चलाने वाले हो जाएं सावधान! फटाफट कर लें ये काम, वरना हो जाएगी सील


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Ghaziabad News: गाजियाबाद में जीडीए ने आवासीय मकानों में दुकान चलाने वालों पर कार्रवाई शुरू की है, लेकिन उन्हें दुकान वैध कराने का मौका भी दिया जा रहा है. समय पर नक्शा जमा करना जरूरी है.

गाजियाबाद : गाजियाबाद में घरों से दुकान चलाने वालों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं. गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने ऐसे सभी मकान मालिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है, जो आवासीय मकानों में नियम तोड़कर दुकान चला रहे हैं. लेकिन इस बार परेशानी के साथ-साथ इन्हें अपनी दुकान को वैध कराने का मौका भी दिया जा रहा है. जीडीए की टीमें इस समय शहरभर का सर्वे कर रही हैं. अनुमान है कि पांच लाख से ज्यादा मकान आवासीय नक्शे पर बने हैं, लेकिन उनमें दुकानें चलाई जा रही हैं. कविनगर, राजनगर, नेहरूनगर, वैशाली, वसुंधरा, शालीमार गार्डन, राजेंद्र नगर, शास्त्री नगर, कौशांबी, गोविंदपुरम और स्वर्णजयंतीपुरम जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आए हैं.

नोटिस मिलने पर क्या करना होगा?
नोटिस मिलने के बाद मकान मालिक को तय समय सीमा में यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
आर्किटेक्ट से नियमों के अनुसार नक्शा बनवाकर जीडीए में जमा करना होगा.
जीडीए द्वारा नक्शे की जांच करवानी होगी.
नक्शा सही पाए जाने पर समन शुल्क और अन्य चार्जेज जमा करना होगा.

जीडीए अधिकारियों का क्या है कहना

जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा लोग नोटिस का इंतजार करें और समय पर नक्शा व जरूरी दस्तावेज जमा करके अपने निर्माण को वैध कराएं. ऐसा करने से वे भविष्य में किसी भी सीलिंग की कार्रवाई से बच सकेंगे.

जीडीए के ए. ई रुद्रेश शुक्ला ने पूरी प्रक्रिया और शुल्क को स्पष्ट करते हुए बताया शासन की मंजूरी के बाद लागू हुए मॉडर्न बिल्डिंग लॉस 2025 के तहत 24 मीटर या उससे चौड़ी सड़कों पर अब मिक्स लैंडयूज की अनुमति है.  यानी अगर कोई मकान ऐसी सड़क पर है और उसमें पहले से दुकान चल रही है या कोई कमर्शियल एक्टिविटी करना चाहता है तो वह कंपाउंडिंग करा सकता है. इसके लिए प्राधिकरण अपील कर रहा है कि लोग समय रहते अपना

नक्शा जमा करें.
जहां तक फीस की बात है अगर किसी मकान का नक्शा पहले से रेजिडेंशियल पास है और उसे कमर्शियल में बदलना है तो डेवलपमेंट फीस दोबारा नहीं लगेगी. जिनका नक्शा पास ही नहीं है, उन्हें सिर्फ 4100 रुपए वन टाइम डेवलपमेंट फीस जमा करनी होगी. इसके अलावा कुछ छोटे-छोटे चार्जेज भी हैं जैसे 1000 रुपए लीगल फीस, निरीक्षण शुल्क और 10 रुपए प्रति वर्गमीटर प्लान फीस. अगर कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उसके लिए कुछ अतिरिक्त माइनर चार्ज भी तय किए गए हैं. इन शुल्कों का भुगतान करते ही दुकान कानूनी मान्यता पा लेगी.

चुनौती और अवसर दोनों
यह कदम गाजियाबाद के हजारों लोगों के लिए चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है. चुनौती इसलिए क्योंकि समय पर नक्शा जमा न करने पर उनकी दुकानों को सील कर दिया जाएगा और अवसर इसलिए क्योंकि पहली बार उन्हें मौका मिल रहा है कि वे अपने घरों में चल रहे व्यापार को पूरी तरह कानूनी मान्यता दिला सकें.

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Lalit Bhatt

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में एक दशक से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2010 से नई दुनिया अखबार से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर हिंदुस्तान, ईटीवी भारत, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया समे… और पढ़ें

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