गाजीपुर की अर्पिता ने JRF में मारी बाजी, ताने मारने वाले भी हुए साइलेंट…

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गाजीपुर की अर्पिता ने JRF में मारी बाजी, ताने मारने वाले भी हुए साइलेंट…


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Net JRF Result: गाजीपुर की अर्पिता पांडे ने ऑप्टिक पैरेलल की समस्या के बावजूद नेट और जेआरएफ परीक्षाएं पास कीं. संस्कृत में रिसर्च कर समाज में बदलाव लाना चाहती हैं. दादाजी से प्रेरित होकर संस्कृत से लगाव हुआ.

हाइलाइट्स

  • अर्पिता पांडे ने नेट और जेआरएफ परीक्षा पास कीं.
  • वह संस्कृत में रिसर्च कर समाज में बदलाव लाना चाहती हैं.
  • दादाजी से प्रेरित होकर संस्कृत से लगाव हुआ.
गाजीपुर( उत्तर प्रदेश): गाजीपुर की बेटी अर्पिता पांडे आज गांव और शहरों में चर्चा का विषय बनी हुई हैं. वजह है उनकी मेहनत और मजबूत हौसला. अर्पिता जन्म से ही एक विशेष स्थिति में रहीं. उनकी आंखों में ऑप्टिक पैरेलल (Optics Parallel) की समस्या है, यानी वह एक आंख से बिल्कुल नहीं देख सकतीं. कई बार लोगों ने उनके भविष्य को लेकर ताने भी मारे—”इसकी शादी कैसे होगी?” लेकिन अर्पिता ने अपने जज़्बे और मेहनत से सबको गलत साबित कर दिया.

शिक्षा का सफर और सफलता की शुरुआत
अर्पिता ने अपनी शुरुआती पढ़ाई सरस्वती विद्या मंदिर, रायगंज, गाजीपुर से की. इसके बाद बी.ए. की पढ़ाई महिला डिग्री कॉलेज से पूरी की और फिर एम.ए. (संस्कृत) पीजी कॉलेज से किया. उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि उन्होंने पिछले डेढ़ साल में नेट और जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) जैसी कठिन परीक्षाएं पास कर लीं. वह कहती हैं—”ये मेरी जिंदगी का पहला अध्याय है.”

संस्कृत से लगाव और दादाजी की प्रेरणा
संस्कृत के प्रति प्रेम उन्हें अपने दादाजी से मिला. उनके दादा गांव में रामायण का पाठ करते थे और अर्पिता भी उनके साथ बैठकर रामायण पढ़ती थीं. तभी से उन्हें संस्कृत में दिलचस्पी होने लगी. अर्पिता मानती हैं कि संस्कृत सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक, आयुर्वेदिक और सांस्कृतिक नजरिए से भी बेहद जरूरी भाषा है.

शोध के ज़रिए समाज में बदलाव लाना चाहती हैं अर्पिता
अब अर्पिता संस्कृत में रिसर्च करना चाहती हैं. उनका उद्देश्य है कि नीति शास्त्र और कौटिल्य अर्थशास्त्र जैसे विषयों पर रिसर्च करें ताकि समाज में मौजूद बुराइयों और महिलाओं के शोषण जैसे मुद्दों को संस्कृत के माध्यम से बेहतर समझा जा सके. वह कहती हैं—”अगर हम अपनी संस्कृति की छोटी-छोटी बातों को भी अपनाएं, तो जीवन में नैतिकता और अच्छाई की राह पकड़ सकते हैं.”

ऐसे की जेआरएफ की तैयारी
जेआरएफ की तैयारी के लिए अर्पिता ने बी.ए. और एम.ए. की मूल किताबों को बार-बार पढ़ा. खुद से नोट्स बनाए और हर दिन रिवीजन किया. साथ ही ‘सरल संस्कृत व्याकरण’ (अरुण पांडे यूट्यूब चैनल) से ऑफलाइन क्लास की और सतीश पेनरू सर से प्रश्नोत्तरी में मदद ली. अर्पिता मानती हैं कि संस्कृत व्याकरण गणित जैसी है. हलंत और विसर्ग जैसी छोटी गलती भी अंक कटवा देती है.
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युवाओं को दिया ये खास संदेश
अर्पिता का मानना है कि किसी भी विषय को गहराई से समझने के लिए उसकी जड़ों तक जाना जरूरी होता है. वह कहती हैं “संस्कृति को समझने के लिए उसकी छोटी-छोटी इकाइयों को समझना और अपनाना जरूरी है. तभी हम सही मायनों में आगे बढ़ सकते हैं.”

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