ग्रेटर नोएडा वेस्ट: लापता बच्चों की बढ़ती घटनाओं ने माता-पिता की बढ़ाई चिंता, मोबाईल पर कर रहे लोकेशन ट्रैक
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ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बच्चों और खासकर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता की चिंता बढ़ गई है. दिल्ली-एनसीआर में लापता होने वाली महिलाओं और बच्चों की खबरों के बाद पेरेंट्स अपने बच्चों की गतिविधियों पर पहले से कहीं ज्यादा नजर रख रहे हैं. मोबाइल ट्रैकिंग, सीसीटीवी और लगातार समझाइश के बावजूद, सोसाइटी के बाहर बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की सतर्कता में कोई कमी नहीं आई है.
ग्रेटर नोएडा. वेस्ट में इन दिनों बच्चों और खासकर बच्चियों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों की चिंता साफ़ तौर पर देखी जा सकती है. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स पर दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और बच्चों के लापता होने से जुड़ी खबरों ने माता-पिता को और ज्यादा सतर्क कर दिया है. यही वजह है कि अब पेरेंट्स बच्चों की रोजमर्रा की गतिविधियों पर पहले से कहीं ज्यादा नजर रख रहे हैं. ग्रेटर नोएडा वेस्ट की निवासी अनीता प्रजापति ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी को मोबाइल तो दिया है, लेकिन पूरी सावधानी के साथ. मोबाइल में लोकेशन ट्रैकिंग जैसी सेटिंग्स ऑन रखी गई हैं, जिससे यह पता चलता रहता है कि बच्ची किस समय कहां है और सुरक्षित घर लौट रही है या नहीं. अनीता का कहना है कि “लड़की होने के कारण सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता रहती है. आजकल की खबरें डराने वाली हैं, इसलिए थोड़ी सी सख्ती और निगरानी जरूरी हो गई है.
वहीं स्थानीय निवासी पलक का मानना है कि बच्चों को सिर्फ घर या सोसाइटी तक ही सीमित समझकर निश्चिंत नहीं हुआ जा सकता. उन्होंने कहा कि अगर बच्चा पार्क में खेलने भी जाता है तो यह जानना जरूरी है कि वह किसके साथ खेल रहा है और आसपास कौन लोग हैं. पलक ने बताया कि वे अपने बच्चे को लगातार यह समझाती हैं कि किसी भी अजनबी की बातों में न आएं, कोई खाने-पीने की चीज़ दे तो उसे न लें और अगर कोई कहीं ले जाने की बात करे तो साफ़ मना करें. साथ ही बच्चों को यह भी सिखाया जा रहा है कि ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत माता-पिता या टीचर को जानकारी दें.
सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरे
सोसाइटी में लगे सीसीटीवी कैमरे जहां कुछ हद तक राहत देते हैं, वहीं सोसाइटी के बाहर निकलते ही डर और बढ़ जाता है. स्थानीय निवासी सारिका ने बताया कि उनकी बेटी अब आठवीं कक्षा में जाने वाली है और जैसे-जैसे बच्ची बड़ी हो रही है, वैसे-वैसे सतर्कता भी बढ़ानी पड़ रही है. सोसाइटी के अंदर कैमरे लगे हैं, इसलिए थोड़ी सुरक्षा महसूस होती है, लेकिन बाहर अलग-अलग तरह के लोग होते हैं, जिन पर भरोसा करना मुश्किल है. अभिभावकों का कहना है कि अब केवल तकनीक पर निर्भर रहना काफी नहीं है, बल्कि बच्चों को भी मानसिक रूप से मजबूत और जागरूक बनाना जरूरी है.
उन्हें अच्छे और बुरे स्पर्श का फर्क समझाया जा रहा है और यह बताया जा रहा है कि डरने या चुप रहने की बजाय किसी भी गलत स्थिति में तुरंत मदद मांगे. ग्रेटर नोएडा वेस्ट के कई रेजिडेंट्स ने प्रशासन और पुलिस से भी मांग की है कि सोसाइटी के बाहर गश्त बढ़ाई जाए, पार्कों और सार्वजनिक जगहों पर निगरानी मजबूत की जाए और स्कूलों के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हों. उनका कहना है कि जब तक बाहर का माहौल सुरक्षित नहीं होगा, तब तक माता-पिता की चिंता खत्म नहीं होगी.
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