चंदौली में धान उत्पादन पर संकट के बादल, सिंचाई व्यवस्था पर उठे सवाल
चंदौली: धान के कटोरे में मानसून की देरी और नहरों में पानी न आने से किसानों की चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. जिले के हजारों किसान धान की नर्सरी और बुवाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अधिकांश नहरें अभी भी सूखी पड़ी हैं, ऐसी स्थिति में किसान समय पर धान की खेती नहीं कर पा रहे हैं. इसी मुद्दे पर किसान पुत्र और पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने प्रशासन तथा सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.
नहरों में नहीं छोड़ रहा है पानी
पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि 18 जून बीत जाने के बावजूद नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया है, जबकि 20 जून तक धान की बुवाई का काम शुरू हो जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि सिंचाई विभाग गंगा में पानी कम होने का बहाना बनाकर नहरों में पानी नहीं छोड़ रहा है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर बैराजों से पानी छोड़ा जा सकता है और किसानों को राहत दी जा सकती है.
धान की बुवाई कर सकें शुरू
उन्होंने बताया कि इस संबंध में उनकी जिलाधिकारी से बातचीत भी हुई है. जिलाधिकारी ने पानी की उपलब्धता को लेकर कुछ तकनीकी कारण बताए, लेकिन उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन गंभीरता दिखाए, तो किसानों के लिए सिंचाई की व्यवस्था की जा सकती है. उन्होंने कहा कि बांधों में उपलब्ध पानी को छोड़ा जाना चाहिए और लिफ्ट कैनालों को भी तत्काल चालू किया जाना चाहिए, ताकि किसान धान की बुवाई का कार्य शुरू कर सकें.
नलकूपों की स्थिति पर जताई चिंता
रामकिशुन यादव ने सरकारी नलकूपों की स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि जिले में मौजूद सरकारी ट्यूबवेलों को नियमित बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है. यदि इन नलकूपों को पर्याप्त बिजली मिले, तो किसान निजी संसाधनों पर निर्भर हुए बिना अपनी खेती कर सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है.
किसानों की बढ़ जाएंगी मुश्किलें
नहरों में पानी न आने के पीछे चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अब तक नहरों की सफाई और खुदाई का कार्य चल रहा था, जिसे एक कारण माना जा सकता था. गोधना मोड़ के पास पुल निर्माण का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है, ऐसे में अब नहरों में पानी छोड़े जाने में और देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने उम्मीद जताई कि एक-दो दिनों के भीतर पानी छोड़ा जाना चाहिए, अन्यथा किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी.
प्रमुखता से उठा खुदाई का मुद्दा
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि किसानों के साथ लगातार उपेक्षा और अन्याय हो रहा है. उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं हैं. उन्होंने कहा कि खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जबकि जिले की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर है. बातचीत के दौरान गड़ई नदी की खुदाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा.
किसानों को हुआ था भारी नुकसान
पिछले वर्ष आई बाढ़ में जिले के कई किसानों को भारी नुकसान हुआ था. इस बार भी बरसात से पहले गड़ई नदी की समुचित सफाई और खुदाई नहीं हो पाने की आशंका जताई जा रही है. इस पर रामकिशुन यादव ने कहा कि यह पूरी तरह प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है. उन्होंने बताया कि बरसात समाप्त होने के बाद ही उन्होंने उसरौड़ी से पड़या पुल तक पदयात्रा कर गड़ई नदी की सफाई की मांग उठाई थी.
प्रदेश सरकार के मंत्री से हुई बातचीत
उन्होंने दावा किया कि इस विषय पर प्रदेश सरकार के मंत्री से भी बातचीत हुई थी और लगभग साढ़े तीन सौ करोड़ रुपये की योजना की चर्चा हुई थी, लेकिन अभी तक नदी की व्यापक खुदाई के लिए कोई बजट स्वीकृत नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो कार्य हो रहा है, वह भी स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता.
लगातार बढ़ रही है खेती की लागत
पूर्व सांसद ने किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है. खाद के दाम बढ़ चुके हैं, डीजल महंगा हो गया है और सिंचाई की व्यवस्था भी प्रभावित है, ऐसे में किसानों की आय बढ़ाने के दावे जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि समय पर बारिश नहीं हुई और सिंचाई की व्यवस्था नहीं सुधरी तो इस वर्ष धान उत्पादन पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
किसानों की अधिग्रहित हो रही हैं जमीनें
उन्होंने यह भी कहा कि जिले में तेजी से बन रही सड़कों, एक्सप्रेसवे और अन्य परियोजनाओं के कारण किसानों की जमीनें अधिग्रहित हो रही हैं. विंध्याचल एक्सप्रेसवे, ग्रीन एक्सप्रेसवे और भारतमाला परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से किसानों की जमीन तो जा रही है, लेकिन स्थानीय लोगों और किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है. उनके अनुसार जिले में उद्योग और रोजगार के अवसरों का भी पर्याप्त विकास नहीं हुआ है.
मौसम की अनिश्चितता का कर रहा सामना
बता दें कि चंदौली को कभी धान का कटोरा कहा जाता था, आज सिंचाई संकट, बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है. मानसून की देरी और नहरों में पानी की अनुपलब्धता ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है. अब जिले के किसान बारिश के साथ-साथ प्रशासनिक हस्तक्षेप का भी इंतजार कर रहे हैं, ताकि समय रहते खेती का काम शुरू हो सके और उनकी मेहनत पर संकट न आए.