चित्रकूट में मिली खतरनाक बीमारी, किडनी और लीवर के पीछे पड़ा कीड़ा, की जा रही अपील
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Chitrakoot News : ये खबर किसी को भी परेशान कर सकती है. चित्रकूट का ये पहला केस है. यूपी का भी पहला हो सकता है. डायलिसिस के बाद भी मरीज की हालत में सुधार नहीं हुआ. लखनऊ रेफर करना पड़ा है.
चित्रकूट. कोरोना वायरस के बारे में तो सभी ने सुना. उसका तांडव भी सभी ने देखा. चित्रकूट में अब एक नये खतरे ने दस्तक दी है. यह बीमारी जंगली कीड़े के काटने से फैलती है और अगर समय पर इलाज न हो तो मरीज की हालत बेहद गंभीर हो सकती है. चित्रकूट जिले में इसका पहला मामला सामने आया है, जिसे उत्तर प्रदेश का पहला मामला भी बताया जा रहा है. राजापुर निवासी संजय नामक शख्स स्क्रब टायफस से संक्रमित मिला है. शुरू में उसे तेज बुखार के कारण जानकी कुंड अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन सुधार न होने पर प्रयागराज रेफर कर दिया. वहां जांच में किडनी की समस्या सामने आई और डायलिसिस भी करना पड़ा. 31 जुलाई को डायलिसिस के बाद भी हालत न सुधरने पर 1 अगस्त को लखनऊ के मेदांता अस्पताल भेज दिया गया.
ये हैं बीमारी के लक्षण
4 अगस्त को मेदांता की माइक्रोबायोलॉजी लैब में हुई जांच में स्क्रब टायफस की पुष्टि हुई. डॉक्टरों के अनुसार यह बीमारी साधारण बुखार से शुरू होती है, लेकिन धीरे-धीरे किडनी, लीवर और दूसरे जरूरी अंगों को प्रभावित कर सकती है. मांसपेशियों में दर्द, कीड़े के काटने वाली जगह पर दाना और काला निशान इसके आम लक्षण हैं. यह संक्रमण मुख्य रूप से जंगलों, झाड़ियों और घास के मैदानों में पाए जाने वाले कीड़ों से फैलता है, जो लोगों के लिए घातक साबित होता है.
परिवार का एक बच्चा भी शिकार
चित्रकूट के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भूपेश द्विवेदी ने बताया कि मरीज के पॉजिटिव पाए जाने के बाद परिवार के लगभग 10 सदस्यों की जांच कराई गई. इनमें से एक बच्चा भी संक्रमित मिला है. हालांकि वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे कोई गंभीर लक्षण नहीं हैं. स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है और लोगों से खेत या जंगल में जाते समय पूरी बांह के कपड़े और जूते पहनने की अपील की है, ताकि जंगली कीड़े के काटने से बचा जा सके. फिलहाल पीड़ित का इलाज लखनऊ में चल रहा है और स्वास्थ्य विभाग उसकी निगरानी कर रहा है.