जहां राम-सीता ने किया था विश्राम…चित्रकूट आएं तो इन 5 स्थलों के दर्शन जरूर करें
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Chitrakoot Must Visit Religious Places: धर्म नगरी चित्रकूट सिर्फ एक तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के वनवास काल की यादों को संजोए हुए पवित्र भूमि है. मान्यता है कि यहां भगवान राम ने अपने वनवास के कई महत्वपूर्ण पल बिताए थे. अगर आप चित्रकूट दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो रामघाट, कामदगिरि पर्वत, भरत मिलाप मंदिर, रामशैया और प्रभु श्रीराम की पर्णकुटी जैसे इन पांच प्रमुख स्थानों के दर्शन करना बिल्कुल न भूलें. इन जगहों पर आज भी रामायण काल की आस्था और पौराणिक मान्यताओं की झलक देखने को मिलती है.
धर्म नगरी चित्रकूट को प्रभु श्रीराम की तपोस्थली के रूप में जाना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने यहां काफी समय बिताया था. आज भी हर साल लाखों श्रद्धालु चित्रकूट पहुंचकर यहां मौजूद मठ-मंदिरों और पवित्र स्थलों के दर्शन करते हैं. अगर आप भी चित्रकूट आने का प्लान बना रहे हैं और प्रभु श्रीराम से जुड़े स्थानों के दर्शन करना चाहते हैं, तो इन पांच प्रमुख जगहों पर जाना बिल्कुल न भूलें.
चित्रकूट का रामघाट यहां के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में से एक है. इसी स्थान से मां मंदाकिनी नदी बहती है. मान्यता है कि वनवास काल के दौरान जब प्रभु श्रीराम चित्रकूट आए थे, तब उन्होंने मंदाकिनी नदी में स्नान किया था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी रामघाट पर अमावस्या के दिन गोस्वामी तुलसीदास को प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए थे. आज भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर मंदाकिनी नदी में स्नान और पूजा-अर्चना करते हैं.
चित्रकूट का कामदगिरि पर्वत धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने इस पर्वत पर काफी समय बिताया था. आज भी देशभर से आने वाले श्रद्धालु कामदगिरि पर्वत की परिक्रमा करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि प्रभु श्रीराम ने इस पर्वत को आशीर्वाद दिया था, जिसके कारण यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि कामदगिरि की परिक्रमा का विशेष महत्व माना जाता है.
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चित्रकूट परिक्रमा मार्ग पर स्थित भरत मिलाप मंदिर भी बेहद खास धार्मिक स्थल है. मान्यता है कि वनवास के दौरान इसी स्थान पर प्रभु श्रीराम और उनके छोटे भाई भरत का मिलन हुआ था. कहा जाता है कि दोनों भाइयों के बीच काफी देर तक भावुक बातचीत हुई थी. उनके प्रेम और भावनाओं को देखकर यहां मौजूद पत्थर भी मोम की तरह पिघल गए थे. इस अद्भुत जगह को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.
चित्रकूट में स्थित रामशैया स्थान भी प्रभु श्रीराम से जुड़ी महत्वपूर्ण जगहों में शामिल है. धार्मिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम माता सीता के साथ इसी स्थान पर रात्रि विश्राम किया करते थे. यहां मौजूद पत्थर को रामशैया के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि प्रभु श्रीराम और माता सीता के विश्राम के समय पत्थर भी मोम की तरह नरम हो गए थे, जिसके निशान आज भी यहां देखने को मिलते हैं.
रामघाट के पास स्थित पर्णकुटी स्थान भी चित्रकूट के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. मान्यता है कि वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने अपने हाथों से इस कुटिया का निर्माण किया था. कहा जाता है कि स्नान करने के बाद प्रभु श्रीराम इसी कुटिया में बैठकर भगवान का स्मरण करते थे और साधु-संतों से मुलाकात किया करते थे. आज भी यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है.
यह सभी चित्रकूट के वह पांच प्रमुख स्थान हैं, जहां धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रभु श्रीराम ने वनवास काल के दौरान समय बिताया था. हालांकि चित्रकूट में ऐसे कई अन्य स्थान भी मौजूद हैं, जिनका संबंध प्रभु श्रीराम के वनवास काल से बताया जाता है. श्रद्धालु आज भी इन पवित्र स्थलों के दर्शन करने और धार्मिक अनुभव प्राप्त करने के लिए यहां पहुंचते हैं.
अगर आप चित्रकूट घूमने या दर्शन करने का प्लान बना रहे हैं, तो प्रभु श्रीराम से जुड़े इन पांच प्रमुख स्थानों के दर्शन जरूर करें. इन जगहों पर पहुंचकर आपको धार्मिक आस्था, इतिहास और आध्यात्मिक शांति का अनोखा अनुभव मिलेगा. चित्रकूट की यही खासियत है कि यहां हर स्थान प्रभु श्रीराम के जीवन से जुड़ी किसी न किसी कहानी को अपने अंदर समेटे हुए है.