जिस शहर का नाम आम-रोहू से पड़ा, वहां पांडवों ने बिताया था अज्ञातवास, जानें

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जिस शहर का नाम आम-रोहू से पड़ा, वहां पांडवों ने बिताया था अज्ञातवास, जानें


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उत्तर प्रदेश का हर शहर अपने भीतर ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक विरासत की अनगिनत कहानियां समेटे हुए है. ऐसा ही एक अनोखा शहर है अमरोहा, जिसकी पहचान उसकी गूंजती ढोलक की थाप, मीठे आम और ऐतिहासिक व धार्मिक महत्ता से …और पढ़ें

हाइलाइट्स

  • अमरोहा का नाम आम और रोहू मछली से पड़ा.
  • महाभारत काल से जुड़ा है अमरोहा का इतिहास.
  • शहर की पहचान ढोलक, आम और धार्मिक महत्ता से है.

पीयूष शर्मा. यूपी का हर जिला और हर शहर अपने गौरवशाली इतिहास को समेटे हुए है. कई ऐसे भी जिले और शहर हैं, जिन्होंने पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ी है. ऐसा ही एक शहर अमरोहा है, जिसकी ढोलकों की थाप पर पूरी दुनिया थिरकती है. यहां के आम ने विदेशों में अलग ही जगह बनाई है. यह स्थान प्राचीन काल से ही समृद्ध और महत्वपूर्ण रहा है. यह स्थान महाभारतकालीन इतिहास से भी जुड़ा हुआ है और वासुदेव तीर्थस्थल यहां स्थित है, जो पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ा है. अमरोहा में वासुदेव सरोवर में भगवान श्रीकृष्ण ने स्नान किया था और अपने हाथों से शिवलिंग की स्थापना की थी.

आम और रोहू मछली से पड़ा अमरोहा नाम
इतिहासकार डॉ. राजीव सक्सेना बताते हैं कि अमरोहा एक मध्यकालीन शहर है. अमरोहा को अपना नाम यहां के प्रसिद्ध आम और प्रचुर मात्रा में पाई जाने वाली रोहू मछली से मिला. मुरादाबाद गजेटियर, 1911 में अमरोहा शहर के विषय में जानकारी दी गई है. कहा जाता है कि इस शहर का नाम शाह विलायत ने रखा था, जो ईरान के एक सूफी संत थे. उनके गुरु ने उन्हें सलाह दी थी कि अपना अंतिम ठिकाना उस स्थान को बनाना जहां आम और रोहू मछली एक साथ मिलें. जब शाह विलायत दुनियाभर की यात्रा करते हुए उत्तर भारत पहुंचे तो अमरोहा की एक मंडी में उन्होंने आम और रोहू मछली को एक साथ बिकते देखा. तभी उन्होंने तय कर लिया कि यही वह स्थान है जिसे उन्हें अपना स्थायी ठिकाना बनाना है. यहीं से शहर का नाम अमरोहा पड़ा.

काफी मशहूर है बिच्छू वाली मजार और वासुदेव मंदिर
इसके साथ ही शाह विलायत ने जिस स्थान को अपना ठिकाना बनाया, उसे भी अपनी उपस्थिति से खास बना दिया. उनके कई मुरीद उनसे मिलने अमरोहा ही आया करते थे. अमरोहा में एक नाम बहुत प्रसिद्ध है, जिस बिच्छू वाली मजार कहा जाता है. इस मजार को लेकर कई धार्मिक और लोक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. ऐसा कहा जाता है कि यदि किसी दंपत्ति को संतान नहीं हो रही हो, तो यहां चादर चढ़ाने से उन्हें संतान सुख प्राप्त हो जाता है. इसके अलावा एक प्रचलित मान्यता यह भी है कि अगर किसी का जानवर—जैसे घोड़ा, गधा या अन्य पशु—गुम हो गया हो और कहीं भी न मिल रहा हो, तो बिच्छू वाली मजार पर मन्नत मांगने से वह पशु वापस मिल जाता है. इस प्रकार अमरोहा से जुड़ी कई कहानियां और लोकविश्वास हैं, जो न केवल रोचक हैं बल्कि इस शहर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को भी उजागर करते हैं.


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