नवाबी दौर का ‘चकला’ क्या था? जानें कितने परगनों से मिलकर बनता था, कौन करता था वसूली

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नवाबी दौर का ‘चकला’ क्या था? जानें कितने परगनों से मिलकर बनता था, कौन करता था वसूली


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Nawabi Daur Chakla: राजस्व (टैक्स) से जुड़े कई शब्द आज भी इस्तेमाल होते है. जिनकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी. मुगल शासन के समय साम्राज्य को बेहतर तरीके से चलाने के लिए प्रशासन को कई स्तरों में बांटा गया था. आम तौर पर व्यवस्था कुछ इस तरह थी. बड़े प्रांत को ‘सूबा’ कहा जाता था. सूबे को ‘सरकार’ में बांटा जाता था. सरकार के अंदर कई ‘परगने’ होते थे. परगनों के अंदर गांव आते थे इसी के साथ समय के साथ एक और प्रशासनिक इकाई प्रचलन में आई. जिसे ‘चकला’ कहा गया.

मुगल काल और नवाबों के दौर का असर सिर्फ समाज पर ही नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक, प्रशासनिक और आर्थिक व्यवस्था पर भी गहराई से पड़ा. यही वजह है कि मुगलों के बाद आई ब्रिटिश हुकूमत भी कई ऐसी व्यवस्थाओं को पूरी तरह खत्म नहीं कर पाई जो मुगल काल में शुरू हुई थी. जैसे आज भी जिलों जनपदों में ‘परगना’ शब्द इस्तेमाल होता है जो मध्यकाल से चला आ रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं नवाबी दौर में ‘चकला’ किसे कहा जाता था? अगर नहीं, तो इसे आसान भाषा में समझते हैं.

राजस्व (टैक्स) से जुड़े कई शब्द आज भी इस्तेमाल होते है. जिनकी शुरुआत मुगल काल में हुई थी. मुगल शासन के समय साम्राज्य को बेहतर तरीके से चलाने के लिए प्रशासन को कई स्तरों में बांटा गया था. आम तौर पर व्यवस्था कुछ इस तरह थी. बड़े प्रांत को ‘सूबा’ कहा जाता था. सूबे को ‘सरकार’ में बांटा जाता था. सरकार के अंदर कई ‘परगने’ होते थे. परगनों के अंदर गांव आते थे इसी के साथ समय के साथ एक और प्रशासनिक इकाई प्रचलन में आई. जिसे ‘चकला’ कहा गया.

कैसा होता था चकला क्षेत्र?
इतिहास और राजस्व व्यवस्था पर जानकारी रखने वाले विक्रम बृजेंद्र सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि ‘चकला’ मूल रूप से एक ऐसा प्रशासनिक और राजस्व क्षेत्र था. जिसमें कई परगने शामिल होते थे. चकला बनाने का मुख्य उद्देश्य था. राजस्व (टैक्स) की वसूली को आसान बनाना. कानून-व्यवस्था बनाए रखना. शासन के कामकाज को ज्यादा प्रभावी बनाना चकला का एक जिम्मेदार अधिकारी होता था. जिसे ‘चकलादार’ कहा जाता था. चकलादार की जिम्मेदारियां थीं. राजस्व की वसूली करना. सरकार के आदेशों को लागू कराना. स्थानीय प्रशासन की निगरानी करना.

अवध में चकला व्यवस्था
इतिहासकार और पत्रकार राजेश्वर सिंह ने अपनी किताब “सुल्तानपुर इतिहास की झलक” में लिखा है कि मुगल शासन के अंतिम दौर में और उसके बाद अवध जैसे क्षेत्रों में ‘चकला’ व्यवस्था काफी प्रचलित हो गई थी. अवध सूबे में कई बड़े-बड़े चकले बनाए गए थे, जिनके अधीन कई परगने आते थे. इससे प्रशासन को स्थानीय स्तर पर काम करने में आसानी होती थी और शासन ज्यादा व्यवस्थित तरीके से चल पाता था. आज भी कई पुराने सरकारी कागजात, रिकार्ड और ऐतिहासिक दस्तावेजों में ‘चकला’ शब्द मिलता है. ये दस्तावेज उस समय की प्रशासनिक व्यवस्था और ढांचे को समझने में बहुत मदद करते है.



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