पीतल नगरी से देशभर के मंदिरों में जा रहा ‘त्रिशूल कलश’, सावन में बढ़ी भारी डिमांड

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पीतल नगरी से देशभर के मंदिरों में जा रहा ‘त्रिशूल कलश’, सावन में बढ़ी भारी डिमांड


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Moradabad Brass Industry: सावन के पावन महीने के आगमन के साथ ही उत्तर प्रदेश की विश्वप्रसिद्ध ‘पीतल नगरी’ मुरादाबाद का हस्तशिल्प बाजार बम-बम बोल रहा है. देशभर के शिवालयों और सिद्धपीठों से भगवान भोलेनाथ के पूजन और मंदिर शिखरों के लिए पीतल निर्मित धार्मिक सामग्रियों के ऑर्डर आ रहे हैं. इस बार सबसे अधिक मांग 3 से 16 फीट तक के विशेष ‘त्रिशूल कलश’ की है, जिसकी सबसे बड़ी खेप वाराणसी स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर समेत देश-विदेश के प्रमुख मंदिरों के लिए तैयार की जा रही है.

Moradabad Brass Industry: उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद जिला पूरी दुनिया में ‘पीतल नगरी’ के नाम से जाना जाता है. यहां तैयार किए जाने वाले पीतल के उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर एक्सपोर्ट किए जाते हैं. सावन का महीना नजदीक आते ही पीतल नगरी में निर्मित विभिन्न हस्तशिल्प उत्पादों के बीच इस समय ‘त्रिशूल कलश’ की मांग में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. श्रद्धालुओं और मंदिर समितियों को यह त्रिशूल कलश काफी पसंद आ रहा है. कांवड़ यात्रा और सावन उत्सव के चलते स्थानीय बाजारों से लेकर बाहरी राज्यों तक इसकी बिक्री जोरों पर है. यह खास कलश अलग-अलग साइज में तैयार किया जा रहा है.

देशभर के शिवालयों में सप्लाई हो रहा सामान
पीतल कारोबारी किशन खन्ना ने बताया कि उनके यहां पीतल का हर प्रकार का निर्माण कार्य होता है, जिसमें मूर्तियों से लेकर मंदिर की सजावट से जुड़े तमाम उत्पाद शामिल हैं. सावन का महीना शुरू होने वाला है, ऐसे में भगवान भोलेनाथ के मंदिरों के शिखर, गर्भगृह और गंगाजल से संबंधित पूजा-सामग्री की मांग कई गुना बढ़ गई है. प्रदेश के साथ-साथ देश के जिस भी कोने में भगवान शिव का मंदिर है, वहां मुरादाबाद में बना पीतल का सामान शिव भक्तों और मंदिर प्रशासनों की सेवा के लिए भेजा जाता है.

3 से 16 फीट तक के साइज में उपलब्ध
व्यापारी ने बताया कि इसी साख के कारण देशभर से लोग मुरादाबाद आकर खरीदारी करते हैं. बात अगर त्रिशूल कलश की करें, तो यह 3 फीट से लेकर 16 फीट तक के विशाल साइज में उपलब्ध कराया जा रहा है. इसका उपयोग मुख्य रूप से बड़े मंदिरों के निर्माण व सौंदर्यीकरण में होता है. इसके साथ ही भगवान भोलेनाथ के हाथ में सुशोभित होने वाला पारंपरिक त्रिशूल भी सभी छोटे-बड़े साइज में तैयार किया जा रहा है.

काशी विश्वनाथ मंदिर से सबसे ज्यादा डिमांड, ₹1200 किलो है कीमत
इन दिनों सबसे ज्यादा ऑर्डर वाराणसी के सुप्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से प्राप्त हुए हैं. इसके अलावा देश के अन्य छोटे-बड़े मंदिरों से भी भगवान शिव की सेवा के लिए इन धार्मिक वस्तुओं की बड़ी मांग आ रही है. कीमत के बारे में बात करते हुए कारोबारी ने बताया कि इसे ₹1200 प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा रहा है. जहाँ-जहाँ भी सनातन धर्म से जुड़े लोग और श्रद्धालु निवास कर रहे हैं, वहाँ से इसके ऑर्डर मिल रहे हैं. सावन के सीजन में इसकी रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की जा रही है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…

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