पूरे झुंड में फैल जाएगा ये रोग, मुर्गियों को सांस की बीमारी से कैसे बचाएं?
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Poultry farming tips : पशु पालकों के लिए मुर्गी पालन आय का मजबूत आधार बन चुका है, लेकिन मानसूनी दिनों में सावधान होने की जरूरत है. बदलते मौसम की वजह से मुर्गियों में सांस संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे समय में वायरल, बैक्टीरियल और माइकोप्लाज्मा संक्रमण तेजी से फैलते हैं. बलिया के पशु चिकित्सक डॉ. एसडी द्विवेदी लोकल 18 से बताते हैं कि अगर एक मुर्गी संक्रमित हो जाए, तो पूरे झुंड में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ जाता है. पोल्ट्री शेड में खराब वेंटिलेशन, अधिक नमी, गंदगी, धूल, अमोनिया गैस का बढ़ना और जरूरत से ज्यादा भीड़ बीमारी को बढ़ावा देते हैं. फार्म में आने-जाने वाले लोगों, वाहनों और उपकरणों की नियमित सफाई और कीटाणुशोधन जरूरी है. नई मुर्गियों को सीधे पुराने झुंड में न रखें, बल्कि कुछ दिनों तक अलग रखकर उनकी निगरानी करें.
बारिश, सर्दी या मौसम में अचानक बदलाव के कारण मुर्गियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्युनिटी पावर घट जाती है. ऐसे समय में वायरल, बैक्टीरियल और माइकोप्लाज्मा संक्रमण तेजी से फैलते हैं. यदि एक पक्षी संक्रमित हो जाए, तो पूरे झुंड में बीमारी फैलने का खतरा बढ़ सकता है. अतः मौसम बदलते ही पोल्ट्री फार्म की निगरानी और देखभाल पहले से अधिक जरूरी हो जाता है. थोड़ी सी लापरवाही उत्पादन और आय पर सीधा असर डाल सकता है.
सांस संबंधी बीमारी को शुरुआती दौर में ही पहचानना जरूरी है. मुर्गियों में छींक आना, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, मुंह खोलकर सांस लेना, नाक से पानी बहना, आंखों में सूजन या पानी आना और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार पक्षी गर्दन फैलाकर सांस लेने की कोशिश करते हैं. दाना और पानी कम होने से वजन भी घट जाता है और अंडा उत्पादन भी कम हो सकता है.
राजकीय पशु चिकित्सालय नगर बलिया के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. एसडी द्विवेदी के अनुसार, पोल्ट्री शेड में खराब वेंटिलेशन, अधिक नमी, गंदगी, धूल, अमोनिया गैस का बढ़ना और जरूरत से ज्यादा भीड़ बीमारी को बढ़ावा देते हैं. संक्रमित पक्षियों का संपर्क भी दूसरी मुर्गियों के लिए खतरनाक होता है. यदि शेड का वातावरण स्वच्छ और संतुलित न हो, तो स्वस्थ मुर्गियां भी जल्द संक्रमित हो सकती हैं. इसके लिए साफ और खुला वातावरण बहुत लाभप्रद है.
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इन बीमारियों से बचाव के लिए पोल्ट्री शेड की नियमित सफाई करें. बिछावन गीला होने पर तुरंत बदलें, ताकि नमी और बदबू न बढ़े. शेड में ताजी हवा का उचित इंतजाम रखें, लेकिन ठंडी हवा सीधे मुर्गियों पर को न लगे. पीने का पानी हमेशा साफ और ताजा हो. संतुलित और पौष्टिक दाना देने से इम्युनिटी पावर मजबूत और संक्रमण का खतरा कम होता है.
यदि किसी मुर्गी में बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत बाकी झुंड से उन्हें अलग हटाएं. इससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सकता है. फार्म में आने-जाने वाले लोगों, वाहनों और उपकरणों की नियमित सफाई और कीटाणुशोधन बहुत जरूरी है. नई मुर्गियों को सीधे पुराने झुंड में न रखें, बल्कि कुछ दिनों तक अलग रखकर उनकी निगरानी करें.
डॉ. द्विवेदी के अनुसार, नियमित टीकाकरण को सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय माना जाता है. सही समय पर टीकाकरण कराने से कई गंभीर श्वसन रोगों से बचाव हो सकता है. यदि फार्म में लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अचानक अधिक मौतें होने लगें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से परामर्श लें. समय पर जांच और उपचार नुकसान के जोखिम को कम करने में मदद करते हैं.
बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या किसी भी दवाओं का सेवन न कराएं. गलत दवा या मात्रा बीमारी को और जटिल बना देती है. इलाज के साथ-साथ फार्म में जैव सुरक्षा नियमों का पालन भी बहुत जरूरी है. साफ-सफाई, नियंत्रित आवाजाही और नियमित स्वास्थ्य जांच संक्रमण की समस्या को रोक सकता है.
मुर्गी पालन में सफलता न केवल अच्छे दाने से जुड़ा होता है, बल्कि बेहतर प्रबंधन पर आधारित होता है. मौसम के अनुसार देखभाल, समय पर लक्षणों की पहचान, स्वच्छ वातावरण, संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण और पशु चिकित्सक की सलाह अपनाकर किसान अपने झुंड को स्वस्थ रख खूब मुनाफा कमा सकते हैं. स्वस्थ मुर्गियां बेहतर ग्रोथ के साथ अंडा उत्पादन भी बढ़ाती हैं.