बच्चा पैदा होते ही शुरू हो जाएगी कमाई, भेड़ पालन की ये ट्रिक सबसे हिट

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बच्चा पैदा होते ही शुरू हो जाएगी कमाई, भेड़ पालन की ये ट्रिक सबसे हिट


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बच्चा पैदा होते ही शुरू हो जाएगी कमाई, भेड़ पालन की ये ट्रिक सबसे हिट

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Sheep farming tips : भेड़ पालन किसानों के लिए हमेशा से फायदे का सौदा रहा है. खेती में घटती आय की वजह से किसान तेजी से पशुपालन की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. भेड़ पालन भी इनमें से एक है. लोकल 18 से रामपुर के भेड़ पालक सोनू बताते हैं कि किसान शुरुआत में कम संख्या में भेड़ें रखकर अपना काम शुरू कर सकते हैं. भेड़ों से मीट के अलावा ऊन, बच्चे और जैविक खाद बेचकर भी आमदनी की जा सकती है. चराई की सुविधा हो तो चारे का खर्च भी काफी कम हो सकता है. भेड़ पालन शुरू करने से पहले सबसे जरूरी काम सही नस्ल का चुनाव करना है. सिर्फ किसी के कहने पर भेड़ खरीदने की बजाय स्थानीय पशु विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. खरीदते समय भेड़ की सेहत, उम्र, वजन और बीमारी के लक्षण जरूर देखें.

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रामपुर के पशुपालक सोनू बताते हैं कि भेड़ पालन की सबसे बड़ी खासियत है इसे शुरू करने के लिए बहुत बड़ा फार्म या भारी भरकम बजट जरूरी नहीं. किसान शुरुआत में कम संख्या में भेड़ें रखकर अपना काम शुरू कर सकते हैं और अनुभव बढ़ने के साथ झुंड भी बढ़ा सकते हैं. इसके लिए बस साफ सूखा बाड़ा, पानी और खाने की सही व्यवस्था सबसे जरूरी है. चराई की सुविधा हो तो चारे का खर्च भी काफी कम किया जा सकता है. इसलिए गांव में छोटे किसान भी कम लागत में भेड़ पालन शुरू करके इसे कमाई का जरिया बना रहे हैं.

सोनू के मुताबिक, अगर आपको लगता है कि भेड़ पालन में कमाई सिर्फ मीट बेचकर होती है तो आपको अभी भेड़ पालन में होने वाले तगड़े मुनाफे के बारे में पूरी जानकारी नहीं है. भेड़ों से मीट के अलावा ऊन, बच्चे और जैविक खाद बेचकर भी आमदनी की जा सकती है. अच्छे वजन वाली भेड़ों की बाजार में बेहतर कीमत मिलती है जबकि स्वस्थ और अच्छी नस्ल के मेमनों की मांग ब्रीडिंग के लिए रहती है. गोबर को खेतों में खाद के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यानी एक ही पशु से कमाई के कई रास्ते खुल जाते हैं.

भेड़ पालन शुरू करने से पहले सबसे जरूरी काम सही नस्ल का चुनाव करना है. हर इलाके की जलवायु और उपलब्ध चारे के हिसाब से नस्ल का प्रदर्शन अलग हो सकता है, इसलिए सिर्फ किसी के कहने पर भेड़ खरीदने के बजाय स्थानीय पशु विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है. बीकानेरी, मारवाड़ी और जैसलमेरी देसी नस्लें हैं. खरीदते समय भेड़ की सेहत, उम्र, वजन और बीमारी के लक्षण जरूर देखें. भेड़ की सही नस्ल का चुनाव आगे की कमाई पर सीधा असर डालता है.

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सोनू बताते हैं कि भेड़ पालन में सबसे बड़ा खर्च चारे का होता है लेकिन थोड़ी समझदारी से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. भेड़ें आमतौर पर घास, झाड़ियों और कई तरह के हरे चारे पर आसानी से पलती हैं. अगर आपके आसपास चराई की सुविधा है तो रोजाना खरीदा जाने वाला चारा कम किया जा सकता है. साफ पानी और जरूरत के हिसाब से संतुलित दाना देना भी जरूरी है.

भेड़ पालन में मेमनों की बिक्री भी कमाई का मजबूत जरिया बन सकती है. स्वस्थ मादा भेड़ से समय के साथ फार्म में नए बच्चे जुड़ते रहते हैं जिससे झुंड बढ़ता है. अच्छी देखभाल मिलने पर स्वस्थ मेमनों को दूसरे पशुपालक, ब्रीडिंग फार्म या मीट के लिए खरीद सकते हैं. लेकिन इसके लिए जन्म के बाद से ही बच्चों की साफ सफाई, पोषण और बीमारी से बचाव पर ध्यान देना जरूरी है. कमजोर मेमने जल्दी बेचने के बजाय पहले उनकी सेहत सुधारना कई बार ज्यादा फायदेमंद हो सकता है. मेमना पालन और भेड़ ब्रीडिंग कमाई बढ़ाने का अच्छा तरीका है.

भेड़ों के लिए महंगा और चमचमाता शेड बनाना जरूरी नहीं है. सबसे ज्यादा जरूरी है कि उनका बाड़ा साफ, सूखा और हवादार रहे. बारिश के मौसम में पानी जमा होने से भेड़ों को परेशानी हो सकती है, इसलिए फर्श पर पानी बिल्कुल नहीं रुकना चाहिए. बीमार या कमजोर भेड़ को बाकी झुंड से अलग रखें. बाड़े की नियमित सफाई करने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है. इस तरह फार्म शेड की सही व्यवस्था पर ध्यान देकर खर्च भी नियंत्रित किया जा सकता है. इससे पशु भी स्वस्थ रहेंगे.

भेड़ पालने वालों के लिए ऊन भी अतिरिक्त कमाई का जरिया है. हालांकि ऊन की मात्रा और गुणवत्ता नस्ल, मौसम और पशु की देखभाल पर निर्भर करती है. ऊन निकालने के बाद भेड़ को गंदगी और नमी से बचाकर रखना जरूरी है. अलग-अलग जगहों पर ऊन की कीमत उसकी गुणवत्ता और स्थानीय बाजार के हिसाब से बदल सकती है. बेचने से पहले आसपास के खरीदारों और व्यापारियों से रेट की जानकारी लेना समझदारी है. सोनू कहते हैं कि भेड़ की ऊन से कमाई को नजरअंदाज करने के बजाय इसे फार्म की अतिरिक्त आय के रूप में देखा जा सकता है.

भेड़ पालन में सिर्फ पशु खरीदना ही काफी नहीं है. बाजार पहले से समझना जरूरी है. भेड़ पालक सोनू के मुताबिक, आपके इलाके में मीट के खरीदार कौन हैं, मेमनों की मांग कब बढ़ती है और ऊन कहां बिकती है, इसकी जानकारी पहले जुटा लें. स्थानीय व्यापारी, पशु बाजार और आसपास के दूसरे पशुपालकों से भाव की जानकारी ली जा सकती है. बिना बाजार समझे ज्यादा संख्या में भेड़ खरीद लेना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए शुरुआत छोटी रखें और बिक्री का रास्ता पहले तय करें. भेड़ पालन बिजनेस प्लान और मार्केटिंग समझकर करेंगे तो तगड़ा मुनाफा मिलना तय है.



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