बिना केमिकल के आगरा में किसान जैविक तरीके से तैयार कर रहे हैं देशी लौकी

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बिना केमिकल के आगरा में किसान जैविक तरीके से तैयार कर रहे हैं देशी लौकी


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आगरा में लौकी की फसल करने वाले किसान तुलाराम ने बताया कि लौकी की खेती से उन्हें काफी अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि इस फ़सल में लागत भी बेहद कम आती है और लाभकारी मूल्य अधिक मिलता है. किसान तुलाराम ने कहा कि यदि एक बीघा में लौकी की फ़सल की जाती है तो उसमे सिर्फ दो लेबर ही लगाई जाती है जो आसानी से लौकी की फ़सल को उगाते है.

आगरा: आगरा में ताजमहल ही नहीं बल्कि यहां की खेती और फसल भी काफी मशहूर है. कई तरह की फसल आगरा में की जाती है नौ अन्य राज्यों और जिलों तक सप्लाई की जाती है. आगरा की लौकी की यदि बात करें तो बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है. किसान बिना केमिकल और इंजेक्शन के लौकी की खेती करते है जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती है. लौकी की खेती जैविक खाद से की जाती है, जिससे उसकी ग्रोथ काफी अच्छा होती है. आगरा के किसानों ने बताया कि लौकी की लौकी की खेती कम लागत और अच्छा मुनाफा देती है.

एक से डेढ़ हाथ की दुरी पर होता है बीज रोपण

आगरा में लौकी की खेती कर रहे किसान तुलाराम ने बताया कि वह पिछले कई वर्षो से लौकी की खेती कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लौकी की फ़सल के लिए एक से डेढ़ हाथ की दुरी पर बीज रोपा जाता है. क्योंकि अधिक पास बेल होने पर उसकी पैदवार अच्छी नहीं हो पाती है. उन्होंने कहा कि बीज रोपण के साथ खाद, डीएपी आदि डाली जाती है. जिससे लौकी काफी अच्छी पैदा होती है. उन्होंने कहा कि बीज रोपण के बाद पानी डाला जाता है और गर्मी में होने वाली लौकी की फसल के लिए पानी सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है.

अन्यथा बेल सुख जाएगी और फसल आने से पहले खराब हो सकती है. किसान ने बताया कि बीज रोपण के करीब 55-60 दिनों में अच्छी और बड़ी लौकी तैयार हो जाती है. जिसे समय समय पर तोड़ लिया जाता है और एकत्र करके मंडी में बेच दिया जाता है. उन्होंने कहा कि एक बार बीज रोपण के करीब तीन से चार महीने तक बेल पर अच्छी पैदावार होती है जिससे अच्छा मुनाफा होता है.

कम लागत से अच्छा मुनाफा देती है लौकी की खेती

आगरा में लौकी की फसल करने वाले किसान तुलाराम ने बताया कि लौकी की खेती से उन्हें काफी अच्छा मुनाफा होता है. उन्होंने कहा कि इस फ़सल में लागत भी बेहद कम आती है और लाभकारी मूल्य अधिक मिलता है. किसान तुलाराम ने कहा कि यदि एक बीघा में लौकी की फ़सल की जाती है तो उसमे सिर्फ दो लेबर ही लगाई जाती है जो आसानी से लौकी की फ़सल को उगाते है. उन्होंने कहा की आगरा की लौकी आस पास के क्षेत्रों में भी काफी मशहूर है. किसान ने बताया कि वह बिना केमिकल और इंजेक्शन वाली लौकी की खेती करते है जिस कारण बाजार में इसकी अच्छी कीमत और भारी मांग होती है. उन्होंने कहा कि वह पुरी फ़सल देशी खाद और डी. ए. पी के माध्यम से करते है जिससे अच्छी और भारी मात्रा में उनकी फ़सल ग्रोथ करती है और उन्हें अच्छा मुनाफा कमा कर देती है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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