यूनेस्को के दौरे से पहले बदलेगी सारनाथ की पट्टिका, होगा यह बड़ा बदलाव, जानें मा

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यूनेस्को के दौरे से पहले बदलेगी सारनाथ की पट्टिका, होगा यह बड़ा बदलाव, जानें मा


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Varanasi News: यूनेस्को टीम के दौरे से पहले एएसआई सारनाथ की पट्टिका में बदलाव कर बाबू जगत सिंह को श्रेय देगा, जिनकी खुदाई से 1787-88 में बौद्ध अवशेष मिले थे.

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वाराणसी. यूनेस्को की टीम का सारनाथ का दौरा होने वाला है. इससे पहले यहां एक अहम बदलाव होने जा रहा है. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने निर्णय लिया है कि यहां लगी मुख्य पट्टिका को संशोधित कर ब्रिटिश अधिकारियों की जगह स्थानीय शासक परिवार के सदस्य बाबू जगत सिंह को श्रेय दिया जाएगा. एएसआई के अनुसार जगत सिंह के वंशजों ने यह प्रस्ताव दिया था कि 1787-88 में सारनाथ के पुरातात्विक महत्व को पहली बार जगत सिंह ने सामने लाया था, जबकि मौजूदा पट्टिका में इसे 1798 में ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा खोजा गया बताया गया है.

मौजूदा पट्टिका में उल्लेख है कि 1798 में ब्रिटिश अधिकारियों श्री डंकन और कर्नल ई. मैकेंजी ने सारनाथ के महत्व को सामने लाया. इसके बाद एलेक्जेंडर कनिंघम, मेजर किट्टो, एफओ ओर्टेल, सर जॉन मार्शल, एमएच हारग्रीव्स और दयाराम साहनी जैसे अधिकारियों ने उत्खनन कार्य किया, लेकिन अब एएसआई नई जानकारी के आधार पर वर्ष और श्रेय को संशोधित करने की तैयारी में है.

जानकारों के अनुसार जगत सिंह ने 1787-88 में इस प्राचीन स्थल पर खुदाई करवाई थी, जिसके दौरान बौद्ध अवशेषों वाला एक कास्केट भी मिला. जगत सिंह, काशी नरेश चौत सिंह के परिवार से थे. उनके वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने एएसआई को प्रस्ताव भेजा है कि पट्टिका के साथ-साथ सांस्कृतिक नोटिस बोर्ड पर भी बदलाव कर भ्रामक जानकारी को सुधारा जाए.

बता दें कि इस साल की शुरुआत में धर्मराजिका स्तूप पर लगी पट्टिका बदली गई थी, जिसमें पहले जगत सिंह को ‘दीवान’ और ‘विध्वंसक’ बताया गया था. नई पट्टिका में यह विवरण हटाकर लिखा गया कि यह संरचना उनके कारण प्रकाश में आई और इसे कभी ‘जगत सिंह स्तूप’ कहा जाता था.

वहीं इस साल भारत ने सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची (2025-26 चक्र) में शामिल करने के लिए आधिकारिक नामांकन भेजा है. सारनाथ में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर 11वीं शताब्दी तक बने कई बौद्ध स्मारक मौजूद हैं. यह स्थान भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश से जुड़ा होने के कारण विश्वभर के बौद्ध अनुयायियों के लिए आस्था का केंद्र है.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस…और पढ़ें

पिछले एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हूं. पत्रकारिता की शुरुआत 2010 में नई दुनिया अखबार से की, जिसके बाद सफर लगातार आगे बढ़ता गया. हिंदुस्तान, शुक्रवार पत्रिका, नया इंडिया, वेबदुनिया और ईटीवी जैस… और पढ़ें

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