यूपी का ये वकील कर देगा क्रिमिनल जस्टिस वाले माधव मिश्रा की छुट्टी… हिंदी, अंग्रेजी नहीं संस्कृत में पेश करते है दलीलें

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यूपी का ये वकील कर देगा क्रिमिनल जस्टिस वाले माधव मिश्रा की छुट्टी… हिंदी, अंग्रेजी नहीं संस्कृत में पेश करते है दलीलें


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Varanasi news : बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी और सुरवीन चावला की कोर्ट ड्रामा वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस सीजन 4 इन दिनों धूम मचा रहा है. लेकिन वाराणसी में एक वकील ऐसा भी है जो माधव मिश्रा की छुट्टी कर सकता है.

वाराणसी : कोर्ट रूम में आपने हिंदी और अंग्रेजी भाषा में दलीलें सुनी होंगी लेकिन क्या आपने संस्कृत में कभी किसी वकील को बहस करते देखा और सुना है. बाबा विश्वनाथ के शहर बनारस में एक ऐसे वकील है जो सिर्फ संस्कृत में भी अपनी दलीलें पेश करते हैं. कोर्ट रूम में इस अनोखे वकील की दलीलें सुन अच्छे-अच्छे वकीलों के पसीने छूट जाते हैं. कभी-कभी तो जज भी इनकी दलीलों को समझने के लिए ट्रांसलेटर रखते हैं. यानि कुल मिलाकर कहें तो बनारस के ये वकील माधव मिश्रा को भी पानी पीला सकते हैं. गौरतलब है कि इन दिनों एक वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस धूम मचा रही है. जिसमें अभिनेता पकंज त्रिपाठी माधव मिश्रा का रोल निभा रहे हैं जो शुद्ध हिन्दी में केस लड़ते हैं.

सिर पर शिखा माथे पर तिलक लगाएं ये है वकील आचार्य श्याम जी उपाध्याय. हर दिन कचहरी में आने के बाद इनकी दिनचर्या पूजा-पाठ से शुरू होती है. अपने चौकी पर ही इन्होंने महादेव को स्थापित कर रखा है. जिसका हर रोज ये विधिवत पूजन अर्चन करते हैं. आचार्य श्याम जी उपाध्याय ने बताया की वो 47 सालों से संस्कृत भाषा में ही मुकदमा लड़ते चले आ रहें हैं. उनका दावा है कि आज तक उन्हें किसी भी मुदकमें में हार नहीं मिली है.

पिता के ताना बना संकल्प की वजह
श्याम जी उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट में एप्लिकेशन देना हो या फिर बहस वो अपना सारा काम संस्कृत भाषा में ही करते हैं. 1978 से उन्होंने इसकी शुरुआत की थी. बस तब से उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय संकठा प्रसाद अक्सर उनसे कहते थे कि कचहरी में सारे काम आज हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू भाषा में होता है. संस्कृत में कुछ भी नहीं होता. बस तभी उन्होंने मन में संकल्प लिया था कि वो संस्कृत भाषा में ही कचहरी का काम काज करेंगे.

47 साल से लड़ रहे मुकदमा
आचार्य श्याम जी उपाध्याय ने बताया कि बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्होंने 47 सालों में सैकड़ों मुकदमे संस्कृत भाषा में लड़ा है लेकिन किसी में भी उन्हें हार नहीं मिली है. बल्कि उनके बहस को सुनने के लिए संस्कृत भाषा के प्रेमी कोर्ट रूम में भी आते हैं.

संस्कृत मित्र अवार्ड से सरकार ने किया था सम्मानित
बताते चलें कि संस्कृत भाषा के उत्थान के लिए उन्हें अब तक कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं. भारत सरकार ने साल 2003 में उन्हें संस्कृत मित्र नेशनल अवॉर्ड से भी नवाजा था.

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