यूपी के वो नेता जिन्होंने हाथ देखकर बताया भाग्य, संयोग से उन्हीं की कुर्सी पलट बने CM
यूं गढ़ी गई राजनाथ सिंह के यूपी के मुख्यमंत्री बनने की कहानी
बात साल 1976 की है जब देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से देश पर थोपे गए आपातकाल का दौर चल रहा था. राजनीतिक रूप से भारतीय जनसंघ (आज की बीजेपी) और समाजवादी विचारधारा के नेता इमरजेंसी को पुरजोर विरोध कर रहे थे. इमरजेंसी का विरोध करने के चलते ही जनसंघ के वरिष्ठ नेता राम प्रकाश गुप्त को मिर्जापुर जेल में कैद कर दिया जाता है. वहां उनकी मुलाकात जनसंघ के एक युवा कार्यकर्ता राजनाथ सिंह से मुलाकात हुई. उस दौर में राम प्रकाश गुप्त यूपी के राजनीति में बड़ा नाम थे, क्योंकि जब चौधरी चरण सिंह यूपी के सीएम थे तो उसी सरकार में राम प्रकाश गुप्त उपमुख्यमंत्री का पद संभालते रहे.
इतने बड़े राजनेता को जेल में अपने साथ देखकर युवा राजनाथ सिंह बेहद उत्साहित हो गए और अपने स्तर पर जो भी संभव होता वह राम प्रकाश गुप्त की मदद करते. कहा जाता है कि राम प्रकाश गुप्त ने शौक में हस्तरेखा पढ़ने की विद्या सीखी थी. खुद के प्रति इतना सम्मान देखकर एक दिन राजनाथ सिंह की आग्रह पर राम प्रकाश गुप्त उनका हाथ पढ़ने को तैयार हो गए.
हाथ पर नजर दौड़ाते ही राम प्रकाश गुप्त ने पूछा, तुम्हारी उम्र कितनी है?
जवाब में राजनाथ सिंह ने कहा, जी 24 साल.
इसके बाद राम प्रकाश ने कहा- ‘तुम्हें पता है आगे चलकर तुम्हें कितनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है.’
राजनाथ सिंह थोड़ा अचंभित हुए और पूछा- ‘जी हमको ये सब कैसे पता होगा, आप ही बताइए’
इसके बाद राम प्रकाश गुप्ता थोड़ी देर के लिए शांत हो गए और राजनाथ सिंह के हाथों की लकीरों को ध्यान से पढ़ने की कोशिश करने लगे. ऐसा लगा मानो पहली नजर में हाथ देखकर उनके मन में जो विचार आया था वो उसकी पुष्टि कर रहे हों.
जेल की काल कोठरी में जब ये सारी प्रक्रिया चल रही थी तो वहां मौजूद दूसरे कैदी भी राम प्रकाश गुप्त को घेरकर कुछ खड़े तो कुछ बैठे थे. इतने में ही राम प्रकाश गुप्त ने बेहद गंभीरता और भरोस से कहा- ‘तुम एक दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनोगे.’
यह बात यह सुनते ही वहां मौजूद खुद राजनाथ सिंह और अन्य कैदी हंसने लगे. लेकिन राम प्रकाश गुप्त फिर से दोहराया कि तुम लोग हंसो नहीं, मैं जितना हाथ को पढ़कर समझ पा रहा हूं उसके हिसाब से यह सच होने वाला है.
संयोग कहें या रामप्रकाश गुप्त के हस्तरेखा पढ़ने की सटीकता करीब 24 साल बाद राजनाथ सिंह 28 अक्टूबर 2000 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने और 8 मार्च 2002 तक इस पद पर रहते हुए कई ऐसे फैसले लिए जिसे आज तक याद किया जाता है.
राम प्रकाश गुप्त को हटाकर राजनाथ सिंह उत्तर प्रदेश के सीएम बने थे.
राजनाथ सिंह के राजनीतिक जीवन को जानने में आपका ज्यादा समय बर्बाद ना हो इसलिए आगे की कहानी प्वाइंटर में जानते हैं- :
- राजनाथ सिंह 1993 के विधानसभा चुनाव में शिक्षा मंत्री रहते हुए वह लखनऊ के पास महोना सीट से चुनाव हार गए. यह उनके करियर का बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और संघर्ष में लगे रहे.
- साल 2000 में विधानमंडल के किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. राजनाथ सिंह की सीएम कुर्सी बरकरार रखने के लिए कांग्रेस के विधायक पुत्तू अवस्थी ने अपनी सीट हैदरगढ़ सीट छोड़ी. उपचुनाव में जीतकर राजनाथ सिंह ने अपनी सीएम की कुर्सी बरकरार रख पाए. इससे पता चलता है कि राजनाथ सिंह की शुरुआती दौर से ही दूसरे दलों के नेताओं के साथ कितने अच्छे रिश्ते रहे हैं.
- 1990 के दशक के आखिर में बीजेपी के भीतर कल्याण सिंह और केंद्रीय नेतृत्व के बीच मतभेद बढ़ गए. इसके बाद कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा और पार्टी ने राम प्रकाश गुप्त को मुख्यमंत्री बनाया.
- राम प्रकाश गुप्त का कार्यकाल केवल 11 महीने चला. इसके बाद बीजेपी नेतृत्व ने उन्हें हटाकर राजनाथ सिंह को मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंप दी. वही युवा, जिसके बारे में कभी जेल में भविष्यवाणी हुई थी, अब उत्तर प्रदेश की कमान संभाल रहा था.
- आज के दौर में पेपर लीक का मुद्दा गरमाया हुआ है. ऐसे में राजनाथ सिंह के बतौर यूपी के शिक्षामंत्री उठाए गए कदम को याद किया जाना चाहिए. 1991 में राम मंदिर आंदोलन के बाद बनी बीजेपी की सरकार मुख्यमंत्री कल्याण सिंह मुख्यमंत्री और राजनाथ सिंह शिक्षा मंत्री बने.
- राजनाथ सिंह ने परीक्षा में नकल रोकने के लिए सख्त कानून लागू किया. इस कानून के तहत नकल करने वाले छात्र और ड्यूटी पर मौजूद शिक्षक, दोनों के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान था. इसका असर इतना व्यापक हुआ कि उत्तर प्रदेश का परीक्षा रिजल्ट काफी गिर गया. उस दौर में पास होने वाले छात्र मजाक में कहते थे कि यह ‘कल्याण सिंह वाली सेकेंड डिवीजन’ है.
- 2005 में लालकृष्ण आडवाणी के पाकिस्तान दौरे और जिन्ना पर दिए गए बयान के बाद बीजेपी में बड़ा विवाद खड़ा हो गया. संघ के दबाव में आडवाणी को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा. कई दावेदारों के बीच संगठन ने राजनाथ सिंह पर भरोसा जताया और उन्हें पहली बार भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया.
- दूसरी बार भी कुछ इसी तरह राजनाथ सिंह ने बीजेपी अध्यक्ष पद संभाला. नितिन गडकरी के दोबारा अध्यक्ष बनने की तैयारी थी, लेकिन पूर्ति समूह से जुड़े विवाद के चलते उनका नाम पीछे हट गया. इसके बाद संघ ने एक बार फिर राजनाथ सिंह को पार्टी की कमान सौंप दी.
- राजनाथ सिंह ने समय रहते यह समझ लिया था कि भाजपा में अगला बड़ा चेहरा नरेंद्र मोदी बनने जा रहे हैं. उन्होंने मोदी के साथ तालमेल बनाया और संगठन में उनकी राह मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई.
- चंदौली में जन्मे और मिर्जापुर से राजनीति की शुरुआत करने वाले राजनाथ सिंह ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक लंबा सफर तय किया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, दो बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और बाद में केंद्र सरकार में पहले गृह मंत्री और अब रक्षा मंत्री का पद निरंतर संभाल रहे हैं.