लागत 12 से 15 हजार…कमाई लाखों…इस खेती ने जमकर पैसा कूट रहा किसान, खेत से ही बिक रही फसल

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लागत 12 से 15 हजार…कमाई लाखों…इस खेती ने जमकर पैसा कूट रहा किसान, खेत से ही बिक रही फसल


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Agriculture News: बाराबंकी के रसूलपुर गांव के रमन गुलाब की खेती से कम लागत में लाखों रुपये मुनाफा कमा रहे हैं. गुलाब की बाजार में सालभर मांग रहती है , जबकि इस खेती में जोखिम भी कम है.

संजय यादव /बाराबंकी: आज के समय में पारंपरिक खेती से अलग गुलाब की खेती किसानों के लिए लाभदायक विकल्प बन रही है. धान और गेहूं जैसी फसलों की तुलना में गुलाब की खेती में कम लागत में अधिक मुनाफा मिल रहा है. गुलाब के फूलों की बाजार में सालभर निरंतर मांग बनी रहती है. गुलाब की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसानों को कम निवेश में बेहतर आय प्राप्त होती है. पारंपरिक फसलों की तुलना में गुलाब की खेती में जोखिम भी कम होता है. बाजार में गुलाब के फूलों की निरंतर मांग के कारण किसानों क़ो कई गुना अधिक कमाई कर पा रहे हैं. बाराबंकी जिले के रसूलपुर गांव के रहने वाले युवा किसान रमन ने अन्य फसलों के साथ-साथ गुलाब की खेती की शुरुआत की, जिसमें उन्हें अच्छा फायदा देखने को मिला. आज वह इस खेती से एक फसल में  लाखों रुपये तक मुनाफा कमा रहे हैं.

इसकी खेती कर रहे युवा किसान रमन ने बताया ज्यादातर मैं सब्जियों  की खेती करता हूं. लेकिन इधर दो सालों से गुलाब की खेती कर रहा हूं, क्योंकि इस खेती में लागत कम मुनाफा ज्यादा है. गुलाब को एक बार लगाने के बाद 2 से 3 सालों तक फसल मिलती रहती है. इस समय उन्होंने  करीब डेढ़ बीघे में गुलाब की खेती की है, जिसमें लागत एक बीघे में 12 से 15 हजार रुपये आती है. वहीं मुनाफे की बात करें एक फसल पर 90 हजार से एक लाख रुपए तक आराम से हो जाता है. क्योंकि सीजन के हिसाब से यह फूल 100  रूपये से लेकर 200  रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक जाते हैं. वहीं अगर बाजार में रेट अच्छा मिल गया तो मुनाफा और भी बढ़ जाता है. जिससे आमदनी और भी बढ़ सकती है.

इसकी खेती करना काफ़ी आसान है. गुलाब की खेती दो तरह से की जाती है. लेकिन मैं कलम विधि से करता हूं. इसकी खेती के लिए सबसे पहले खेत की गहरी  जुताई  करनी पड़ती है. उसके बाद खेत को समतल कर गोबर की खाद का छिड़काव किया जाता है. उसके बाद खेत में दो-दो फीट की दूरी पर लाइन टू लाइन  गड्ढे खोद दिए जाते हैं. फिर गुलाब के पौधे को लगा दिया जाता हैं. फिर इसकी सिंचाई की जाती है. फिर 4  से 5 महीने में पेड़ तैयार हो जाता है.  जिसमें फूल निकलना शुरू हो जाते हैं, जिसकी तोड़ाई कर प्रतिदिन बाजारों में बेचा जा सकता है. लेकिन ज्यादातर व्यापारी हमारे खेतों से ही खरीद कर ले जाते हैं. हमें मंडी जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती.

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