साहू परिवार ने रखी थी यूपी के इस 125 वर्ष पुराने मेडिकल कॉलेज की नींव

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साहू परिवार ने रखी थी यूपी के इस 125 वर्ष पुराने मेडिकल कॉलेज की नींव


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Pilibhit News : पीलीभीत का राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय, जिसकी नींव साहू परिवार ने 1899 में रखी थी, उत्तर प्रदेश का ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान है. यह कॉलेज राज्य के 17 जिलों को हर्बल दवाइयां सप्लाई करता है और इ…और पढ़ें

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शहर स्थित आयुर्वेदिक महाविद्यालय.

हाइलाइट्स

  • पीलीभीत का राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय 125 वर्ष पुराना है.
  • साहू परिवार ने महाविद्यालय की नींव रखी और भूमि दान की.
  • कॉलेज 17 जिलों को हर्बल दवाइयां सप्लाई करता है.

पीलीभीत. उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में स्थित राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय शहर की प्राचीनतम इमारत में शुमार होने के साथ ही साथ एक ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान है. एक शताब्दी से भी अधिक समय पूर्व इस संस्थान की नींव रखी गई थी, जिसके लिए शहर के साहू परिवार ने अहम योगदान दिया था.

महाविद्यालय के इतिहास पर अधिक जानकारी देते हुए प्राचार्य प्रो. सुदीप सहाय बेदार ने बताया कि दरअसल जिसे आज हम ललित हरि राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के नाम से जानते हैं उसकी स्थापना वर्ष 1899 में पीलीभीत शहर में संस्कृत और आयुर्वेद का ज्ञान प्रदान करने के लिए की गई थी. शहर के साहू ललिता प्रसाद व उनके छोटे भाई साहू हरि प्रसाद ने इस संस्थान के लिए भूमि दान में दी थी. यह महाविद्यालय राज्य और देश के सबसे पुराने आयुर्वेद महाविद्यालयों में से एक है.

1971 में कानपुर विश्वविद्यालय से मिली मान्यता
वर्ष 1939 में महाविद्यालय के प्रबंधन ने इसे आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में चलाने का निर्णय लिया, जिसके बाद वर्ष 1959 में राज्य सरकार ने महाविद्यालय का प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया. शुरू में तीन वर्षीय ‘वैद्य भूषण'(आयुर्वेद शास्त्री) कार्यक्रम और उसके बाद दो वर्षीय वैद्य राज डिग्री प्रदान की जाने लगी. समय बीतने के साथ डिग्री का नाम बदलकर DIMS, AMBS और बाद में BAMS कर दिया गया. 1971 में इसे कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दिया गया और 10 अक्टूबर 1974 को इसे राज्य सरकार ने पूरी तरह से अपने अधीन कर लिया और इसे सरकारी कॉलेज घोषित कर दिया,तब से यह कॉलेज देश भर के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है.

17 जिलों को दवा करता है सप्लाई
इतना ही नहीं कॉलेज में एक बड़ा हर्बल गार्डन है, जिसे स्वर्गीय आचार्य विश्वनाथ द्विवेदी ने स्थापित किया था, जिसमें औषधीय पौधों की 300 प्रजातियां हैं. कॉलेज में हर्बल दवाओं की खेती के लिए 40 एकड़ क्षेत्र में फैला एक कृषि फार्म भी है , वही अच्छी तरह से सुसज्जित GMP प्रमाणित फार्मेसी है जो राज्य के 17 पश्चिमी जिलों को दवाइयां सप्लाई करती है.

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