सुल्तानपुर की पहली मार्केट ‘अलीगंज बाजार’, जानें 231 साल पुराना इतिहास

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सुल्तानपुर की पहली मार्केट ‘अलीगंज बाजार’, जानें 231 साल पुराना इतिहास


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Sultanpur First Market:आज का युग पूरी तरह बाजारवाद का है, जहां बाजार ही देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की सबसे पहली मार्केट कब, कहां और किसके द्वारा शुरू की गई थी? हम बात कर रहे हैं ऐतिहासिक ‘अलीगंज बाजार’ की, जिसे सुल्तानपुर की पहली मार्केट होने का गौरव प्राप्त है. साल 1795 से शुरू हुआ इस बाजार का सफर आज भी जारी है, जहां कई दुकानों को उनकी चौथी-पांचवीं पीढ़ी संभाल रही है. आइए जानते हैं इतिहास के झरोखे से इस बाजार की पूरी कहानी.

Sultanpur First Market: आज बाजारवाद का युग है. बाजार ही देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ऐसे में यह जानना काफी आवश्यक हो जाता है कि सुल्तानपुर जिले की पहली मार्केट कब और कहां पर खुली थी. हम बात कर रहे हैं अलीगंज बाजार की, जिसे सुल्तानपुर की पहली मार्केट के रूप में जाना जाता है. इसका 1795 का इतिहास जुड़ा हुआ है. यह लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थित बाजार है, जहां पर लोग खरीदारी करने जाते थे. यहां पर कई ऐसी दुकानें हैं, जिनकी पीढ़ियां आज भी दुकानें लगा रही हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि क्या है इस बाजार का इतिहास.

यह है अलीगंज बाजार का इतिहास
वरिष्ठ पत्रकार बृजेंद्र विक्रम सिंह ‘लोकल 18’ को बताते हैं कि सुल्तानपुर में बाजार का इतिहास 1795 ईस्वी से माना जाता है. सुल्तानपुर जिले में बाजार के नाम पर मनियारपुर रियासत की तरफ से साल 1795 ई. के समय मनियारी गांव में ‘अलीगंज’ नाम से पहला बाजार लखनऊ-सुल्तानपुर मार्ग पर बनाया गया था. जिसे 1795 ई. से लेकर आज भी अलीगंज बाजार के नाम से ही जाना जाता है. यह बाजार किसी एक वस्तु पर केंद्रित नहीं है, बल्कि इसमें कई तरह के सामान और दुकानें उपलब्ध हैं.

पहली बाजार होने का है गौरव
अलीगंज के राहुल तिवारी बताते हैं कि उन्होंने जब अलीगंज बाजार को सुल्तानपुर जिले की पहली बाजार के रूप में जाना, तो वह काफी गौरवान्वित महसूस करते हैं. दरअसल, अलीगंज बाजार सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर लखनऊ-वाराणसी हाईवे पर स्थित है. यहां पर यह बाजार पहले मनियारपुर रियासत का हिस्सा थी. साल 2010 में जब सुल्तानपुर जिले का बंटवारा हुआ, तब अलीगंज बाजार का कुछ हिस्सा अमेठी जनपद में आने लगा.

इतिहास के मुताबिक नहीं हुई डेवलप
लगभग 231 साल पुरानी सुल्तानपुर की यह बाजार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भले ही महत्वपूर्ण रही हो, लेकिन इतिहास के हिसाब से यह वर्तमान में डेवलप नहीं हो पाई. यहां पर मूलभूत सुविधाओं की आज भी कमी है. बाजार का व्यवस्थित ढांचा अतिक्रमण और अनदेखी की भेंट चढ़ चुका है. ऐसे में स्थानीय लोग इस ऐतिहासिक बाजार को वैश्विक बाजार के रूप में विकसित करने की मांग भी कर रहे हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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