नोएडा के मजदूर गुस्से में क्यों? मेहनत अधिक, पैसा दिल्ली-हरियाणावालों से कम, सैलरी का लोचा
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Why noida Workers Angry: नोएडा में न्यूनतम मजदूरी और महंगाई के अंतर को लेकर मजदूरों का हिंसक विरोध जारी है. मजदूरों का कहना है कि पिछले 10 साल में दिल्ली और हरियाणा के मुकाबले नोएडा-गाजियाबाद में न्यूनतम मजदूरी में सबसे कम बढ़ोत्तरी की गई है, जबकि महंगाई इसके मुकाबले कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ी है.
नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम के मजदूरों की सैलरी में कितना अंतर है जानें.
Minimum Wages UP Noida-delhi-Haryana: नोएडा में मजदूरों का विरोध प्रदर्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. मजदूरों के अंदर का आक्रोश बार-बार फूट रहा है. बढ़ती महंगाई में न्यूनतम मजदूरी से लेकर फैक्ट्री की नौकरी में सुरक्षा और पीएफ की मांग कर रहे मजदूर अपनी मांग इसलिए भी मजबूती से उठा रहे हैं क्योंकि क्योंकि दिल्ली-हरियाणा के मुकाबले उत्तर प्रदेश के मजदूर खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं. मेहनत ज्यादा करने के बावजूद दोनों राज्यों के मुकाबले इनकी सैलरी में पिछले 10 साल में काफी कम बढ़ोत्तरी हुई है.
नोएडा और गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी में सिर्फ 42 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पड़ोसी दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद में यह बढ़ोतरी करीब 90 प्रतिशत रही है. इस अंतर ने नोएडा के एक्सपोर्ट यूनिटों में काम करने वाले हजारों मजदूरों में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है, जो हाल ही में हिंसक प्रदर्शनों में बदल गया है. आइए विस्तार से जानते हैं तीनों राज्यों के मजदूरों और मजदूरी का हाल..
दिल्ली में सबसे ज्यादा है न्यूनतम मजदूरी
- . दिल्ली में न्यूनतम मजदूरी की बात करें तो वह यूपी और हरियाणा के मुकाबले ज्यादा है. सरकार ने पिछले 10 सालों में राजधानी में न्यूनतम मजदूरी में करीब 90 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है.
- . अब दिल्ली में एक मजदूर की न्यूनतम मजदूरी अक्टूबर 2016 के 9,724 रुपये से बढ़कर 18,456 रुपये प्रति माह हो गई है. यह 90 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. वहीं महंगाई की बात करें तो नोएडा और गुरुग्राम के मुकाबले दिल्ली में महंगाई भी कम है. ऐसे में यहां मजदूरों को दोनों राज्यों के मुकाबले ज्यादा फायदा है.
हरियाणा में मजदूर और मजदूरी का हाल
- . हरियाणा में भी स्थिति पहले नोएडा जैसी ही थी. जुलाई 2016 में अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 8,070 रुपये थी, जो 9 अप्रैल 2026 से पहले 11,274 रुपये तक बढ़ाई गई. यानि सैलरी में सिर्फ 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी.
- . हरियाणा के दो शहरों में महंगाई दर हरियाणा के बाकी हिस्से के मुकाबले काफी ज्यादा है और ये शहर हैं गुरुग्राम और फरीदाबाद. गुरुग्राम में महंगाई 52.7 प्रतिशत और फरीदाबाद में 48.1 प्रतिशत होने के कारण मानेसर और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में संगठित मजदूरों ने विरोध प्रदर्शन किया.
- . मजदूरों के विरोध के बाद हरियाणा सरकार ने 9 अप्रैल को न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत की बढ़ोतरी की. अब हरियाणा में अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी 15,221 रुपये पहुंच गई है, जो 2016 के मुकाबले 88.6 प्रतिशत ज्यादा है.
सबसे ज्यादा पिछड़ गया नोएडा
- . उत्तर प्रदेश में न्यूनतम मजदूरी का हाल दिल्ली और हरियाणा के मुकाबले काफी खराब है, जबकि नोएडा में रह रहे मजदूरों को महंगाई के चलते दो जून की रोटी के लिए ज्यादा खर्च करना पड़ता है.
- . दस साल पहले अक्टूबर 2016 में उत्तर प्रदेश में दुकानों और प्रतिष्ठानों में काम करने वाले अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मासिक मजदूरी 7,936 रुपये थी, जो अब बढ़कर 11,314 रुपये हो गई है. यानी कुल 42.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
- . 42 फीसदी सैलरी बढ़ोत्तरी के मुकाबले महंगाई देखें तो इसी अवधि में गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में औद्योगिक मजदूरों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI-IW) आधारित महंगाई 51.3 प्रतिशत बढ़ गई है. नतीजा यह हुआ कि वास्तविक (रियल) मजदूरी दस साल पहले से भी कम हो गई है. महंगाई ने मजदूरी की बढ़ोतरी को पूरी तरह निगल लिया है.
ऐसे में आसपास मौजूद शहरों और राज्यों के बीच न्यूनतम मजदूरी में इतना बड़ा अंतर NCR जैसे क्षेत्र में श्रमिकों को एक जगह से एक जगह से दूसरी जगह खींचता है और औद्योगिक शांति को प्रभावित करता है. नोएडा में निर्यात आधारित गारमेंट और अन्य यूनिटें पहले से ही ठेका मजदूरों पर निर्भर हैं, जहां प्रॉविडेंट फंड, ओवरटाइम भुगतान और यथार्थवादी टारगेट जैसी सुविधाएं भी अक्सर नदारद रहती हैं.
यही वजह है कि मजदूर उत्तर प्रदेश सरकार से भी हरियाणा और दिल्ली की तर्ज पर न्यूनतम मजदूरी में उचित संशोधन करने की मांग कर रहे हैं. ताकि महंगाई से जूझ रहे परिवारों का गुजारा चल सके और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर असर न पड़े. फिलहाल नोएडा में तनाव बना हुआ है और अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह असंतोष और फैल सकता है.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें