सदियों पुरानी परंपरा आज भी कायम, गोंडा के इस मंदिर में क्यों दी जाती है बलि?
Last Updated:
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि बहुत समय पहले इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था. उस समय यहां म्लेच्छ नाम का एक राजा रहता था. कहा जाता है कि वह अत्यंत अत्याचारी था और जब भी किसी गांव की बारात या डोली इस रास्ते से गुजरती थी, वह उसे रोक लेता था.
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विकासखंड मुजेहना में स्थित मां परमेश्वरी माता मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर से जुड़ी एक अनोखी और सदियों पुरानी परंपरा आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. मान्यता है कि यहां हर लड़की की शादी के समय एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसमें म्लेच्छ राजा के नाम पर सूअर के बच्चे की बलि दी जाती है.
क्या है मान्यता
लोकल 18 से बातचीत के दौरान मंदिर के पुजारी देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि बहुत समय पहले इस क्षेत्र में घना जंगल हुआ करता था. उस समय यहां म्लेच्छ नाम का एक राजा रहता था. कहा जाता है कि वह अत्यंत अत्याचारी था और जब भी किसी गांव की बारात या डोली इस रास्ते से गुजरती थी, वह उसे रोक लेता था. उसके डर से आसपास के गांवों के लोग काफी परेशान रहते थे और अपनी बेटियों की शादी को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे.
क्यों दी जाती है बलि
देवेंद्र मिश्रा ने बताया कि लोगों ने इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए मां परमेश्वरी की आराधना शुरू की और उनसे रक्षा की प्रार्थना की. मान्यता है कि माता ने एक व्यक्ति को स्वप्न में दर्शन दिए और उसे मंदिर की स्थापना करने का निर्देश दिया. साथ ही यह भी कहा कि जब भी किसी लड़की की शादी हो, तब म्लेच्छ राजा के नाम पर सूअर के बच्चे की बलि दी जाए. ऐसा करने से बेटियों की शादी बिना किसी बाधा के संपन्न होगी और परिवार पर किसी प्रकार का संकट नहीं आएगा.
आज तक चली आ रही है परंपरा
इसके बाद लोगों ने माता के बताए अनुसार मंदिर की स्थापना की और इस परंपरा का पालन शुरू कर दिया. स्थानीय लोगों का कहना है कि तब से लेकर आज तक यह परंपरा लगातार चली आ रही है. गांव और आसपास के क्षेत्रों में जब भी किसी लड़की की शादी होती है, तो परिवार के लोग इस परंपरा को निभाने के लिए मंदिर पहुंचते हैं और बलि अर्पित करते हैं.
मां परमेश्वरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं करती हैं पूरी
देवेंद्र मिश्रा बताते हैं कि मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं. लोगों का विश्वास है कि मां परमेश्वरी अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं और परिवार की खुशहाली बनाए रखती हैं. विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है.
यह परंपरा स्थानीय मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित है. पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही इस परंपरा को आज भी लोग श्रद्धा और आस्था के साथ निभा रहे हैं. यही वजह है कि मां परमेश्वरी माता मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी अनोखी परंपरा के कारण भी लोगों के बीच खास पहचान बनाए हुए है.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें