अमेठी की शहनाज बानो बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल, खिलौना व्यवसाय से 11 महिलाओं को दिया रोजगार
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अमेठी की शहनाज बानो ने स्वयं सहायता समूह से जुड़कर खिलौना व्यवसाय शुरू किया और अपनी मेहनत से न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि करीब 11 महिलाओं को भी रोजगार दिया. कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली शहनाज आज हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं और महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल बन गई हैं.
अमेठी. महिलाओं की दृढ इच्छा शक्ति के बल पर उनकी सोच समाज में बदलने लगी है, आज महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही हैं और महिलाओं को खुद का रोजगार उनकी किस्मत को संवारने में मददगार साबित हो रहा है. अमेठी जिले में भी महिलाएं लगातार आत्मनिर्भर बन रही हैं. एक आत्मनिर्भरता की मिसाल अमेठी की शहनाज बानो भी हैं जिन्होंने खुद के व्यवसाय से अपनी किस्मत बदली कभी चंद पैसों के लिए मोहताज रहने वाली शहनाज आज खुद रोजगार करने के साथ करीब 11 महिलाओं को रोजगार देकर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही है.
समूह से सशक्तिकरण तक
दरअसल, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूह का संचालन पूरे प्रदेश भर में किया जाता है. जहां ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को समूह में जोड़कर उन्हें खुद के रोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जाता है. इसी क्रम में अमेठी की शहनाज बानो की कहानी भी संघर्षों से भरी है. शहनाज बानो, अमेठी के मुसाफ़िरखाना के भनौली की रहने वाली है, उनके परिवार में कुल पांच सदस्य हैं और पहले उनका जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में बीत रहा था. परिवार की आय का मुख्य साधन मजदूरी था, शहनाज बताती है कि पहले उन्हें परिवार का भरण पोषण करने में काफी समस्या थी, जितना पैसा आता था वह भी परिवार में पूरा नहीं था. भरण पोषण में काफी दिक्कतें और समस्याएं थी, वह अपनी जरूरत नहीं पूरी कर सकती थी. ऐसे में उन्होंने समूह में जाने का फैसला लिया पहले परिवार के लोगों से बात की तो परिवार के लोगों ने मना कर दिया. फिर बाद में परिवार ने उनकी दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर उनका साथ देना शुरू कर दिया, जिसके बाद आज शहनाज ने अपनी किस्मत बदल ली.
ऋण लेकर शुरू किया व्यवसाय आज कमाई का बना साधन
लोकल 18 से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने ऋण लेकर पहली बार अपना खिलौने का व्यवसाय शुरू किया. शुरुआत में डर भी लगा लेकिन उन्होंने बिना डरे बिना हारे अपनी हिम्मत को बरकरार रखा. अपने व्यवसाय में मेहनत करनी शुरू कर दी और आज उन्हें वृद्धि हो रही है. इसके साथ ही वह दिन भर में गुड़िया हजारों रुपए में बेचकर 30 से 40 हजार की आमदनी कर लेती हैं. उन्होंने कहा कि वे 100- 200 गुड़िया खुद तैयार करती हैं. इसके साथ ही करीब चार से पांच महिलाएं हैं जो उनके इस काम में उनका साथ देकर मेहनत कर खिलौने तैयार करने का काम करती हैं. उन्हें भी समूह में जुड़कर फायदा हो रहा है उन्होंने कहा कि पहले सिर्फ घर के काम जिसमें चूल्हा चौका तक ही उनका जीवन सीमित था. समूह में जुड़ना उनके जीवन का पहला बड़ा निर्णय था. शुरुआत में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी जिसकी देन है कि आज वह सफल है और उन्होंने अपने पूरे परिवार में भरण पोषण का जिम्मा उठाया है और मिलकर आज वे अच्छी कमाई समूह के जरिए कर रही हैं.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें