आखिर सहारनपुर स्लीपर सेल्स का क्यों बना सुरक्षित ठिकाना? कई आतंकी गिरफ्तार

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आखिर सहारनपुर स्लीपर सेल्स का क्यों बना सुरक्षित ठिकाना? कई आतंकी गिरफ्तार


सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद से एक बार फिर से एटीएस ने यूपी में बड़े ब्लास्ट की साजिश रच रहे 4 युवकों को गिरफ्तार किया है, जिनका कनेक्शन पाकिस्तानी आतंकी मॉड्यूल से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. यह पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी देश में कही भी आतंकी घटना हुई है, उसके तार सहारनपुर से लगभग जुड़े हुए पाए गए हैं. आखिरकार सहारनपुर से कब-कब आतंकी संगठनों से जुड़े हुए लोगों की गिरफ्तारी हुई इस खबर में आज हम जानेंगे.

अगर हम बात कुछ साल पहले की करें तो 2019 में पुलवामा हमले के बाद, एटीएस ने देवबंद क्षेत्र से जैश-ए-मोहम्मद के दो कश्मीरी संदिग्ध आतंकियों (शाहनवाज तेली और आकिब अहमद मलिक) को गिरफ्तार किया था. जबकि 2022 में एटीएस ने गंगोह (सहारनपुर) से जैश-ए-मोहम्मद और तहरीक-ए-तालिबान के एक संदिग्ध आतंकी मोहम्मद नदीम को गिरफ्तार किया था, जिसे नूपुर शर्मा की हत्या करने और फिदायीन हमले की साजिश रचने का टास्क दिया गया था.

अलकायदा से जुड़े लोगों की भी गिरफ्तारी
वहीं 2022 में एटीएस ने सहारनपुर के देवबंद से आस मोहम्मद नामक संदिग्ध को गिरफ्तार किया था. इसके तार अलकायदा (AQIS) और जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) से जुड़े थे. जबकि नवंबर 2025 में एटीएस ने सहारनपुर से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े डॉ. आदिल अहमद को गिरफ्तार किया था, जो श्रीनगर में आतंकी संगठनों के समर्थन में पोस्टर लगाने और दिल्ली बम धमाकों के मामले से जुड़ा था.

अब 2026 मई में एक बार फिर से यूपी एटीएस और एसटीएफ ने एक संयुक्त कार्रवाई में सहारनपुर से 4 संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया. इन पर पाकिस्तानी हैंडलर्स और गैंगस्टर शहजाद भट्टी के इशारे पर स्लीपर सेल बनाने, युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और स्कूलों-अस्पतालों की रेकी करने का आरोप था. इससे पहले भी सहारनपुर में स्लीपर सेल के रूप में आतंकवादी संगठन से जुड़े हुए लोग गिरफ्तार होते रहे हैं.

स्लीपर सेल के लिए सुरक्षित ठिकाना
वरिष्ठ पत्रकार रोशन लाल सैनी ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि जिला सहारनपुर में कस्बा देवबंद जहां पर विश्व विख्यात मुस्लिम शिक्षण संस्थान दारुल उलूम है, जहां पर देशभर के तमाम राज्यों से मुस्लिम समाज के लोग शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं. सहारनपुर के कस्बा देवबंद की बात करें तो देवबंद में लगभग 70% मुस्लिम आबादी है, जबकि सहारनपुर शहर की बात करें तो यह तीन प्रदेशों हरियाणा, हिमाचल, उत्तराखंड से जुड़ा हुआ है. यहां पर लोगों का आना-जाना पर्यटकों के रूप में भी लगा रहता है.

यहां पर जो मुस्लिम शिक्षण संस्थान दारुल उलूम है या फिर यहां पर मदरसों की संख्या बड़ी तादाद में है, जबकि मुस्लिम समाज के लोगों की संख्या भी यहां पर 30 से 35% है. इसलिए ऐसे लोगों को मुस्लिम आबादी में आसानी से रहने के लिए किराए पर जगह मिल जाती है. किराया सस्ता है, खाना-पीना सस्ता है, रहना सस्ता है और तमाम चीजें यहां पर आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं.

सहारनपुर को अपना ठिकाना आसानी
कहीं ना कहीं कहा जाए तो चाहे वह पाकिस्तानी आतंकी संगठन से जुड़ा हुआ कोई व्यक्ति हो या फिर बांग्लादेश से जुड़े हुए लोग, सहारनपुर को अपना ठिकाना आसानी से बना लेते हैं. यही कारण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जो कस्बा देवबंद है जहां पर दारुल उलूम देवबंद जैसा शिक्षण संस्थान है, वहां पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एटीएस सेंटर भी स्थापित किया है. इसके बाद से यहां पर बड़े खुलासे होते हुए नजर आ रहे हैं.

गैंगस्टर का मेन ठिकाना
जब से एटीएस केंद्र खुला है तब से 4 से 5 बार जो आतंकी संगठन और उनसे जुड़े हुए लोग या फिर आतंकी संगठनों के एजेंट या फिर वहां के जो गैंगस्टर हैं उनसे जुड़े हुए लोग यहां से पकड़े गए हैं. जबकि पिछले वर्ष की बात है कि पड़ोसी जनपद मुजफ्फरनगर से दो संदिग्ध पकड़े गए थे. हाल ही में सहारनपुर से चार लोग पकड़े गए जो दो सहारनपुर के एक गांव के रहने वाले हैं, जबकि एक रुड़की और एक बिजनौर का रहने वाला है. कहीं ना कहीं देखा जाए तो तमाम चीजें वहीं आकर टिक जाती हैं जो सहारनपुर का कस्बा देवबंद है और जो सहारनपुर के आसपास की जगह है. वह इतनी सुरक्षित है कि वहां पर यह लोग आसानी से अपना ठिकाना बना लेते हैं.



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