कभी अफीम कोठी का खेप, आज ‘साकेत सदन’ के नाम पर विकसित हो रहा यह भवन
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Ayodhya News: अयोध्या का दिलकुशा महल, जिसे अफीम कोठी भी कहा गया, अब साकेत भवन बनकर आस्था और संस्कृति का नया केंद्र बन रहा है, जिसमें प्रभु राम से जुड़े प्रसंग और म्यूजियम शामिल हैं.
लेकिन समय का पहिया घूमते-घूमते इस महल की तस्वीर बदल गई. 1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने नवाबों की शान को ठेस पहुंचाने के लिए इस महल को अफीम की खरीद-बिक्री का केंद्र बना दिया. तभी से यह इमारत अफीम कोठी के नाम से जानी जाने लगी. स्वतंत्रता के बाद भी दशकों तक यह ऐतिहासिक धरोहर उपेक्षा की शिकार रही.
आज यह भवन सिर्फ एक ऐतिहासिक स्मारक नहीं, बल्कि आस्था का केंद्र बनने जा रहा है यहां देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालु और पर्यटक यहां दर्शन कर सकेंगे. दिलकुशा से अफीम कोठी और अब साकेत भवन, यह यात्रा केवल नाम बदलने की नहीं, बल्कि अतीत की धरोहर को सम्मान देने और भविष्य की पीढ़ियों को आस्था से जोड़ने की मिसाल है. अयोध्या का यह नया सांस्कृतिक प्रतीक आने वाले वर्षों में पर्यटकों और भक्तों के लिए एक विशेष आकर्षण बनकर उभरेगा.
डीएम अयोध्या निखिल टीकाराम ने बताया कि साकेत भवन का निर्माण किया जा रहा है. जो अंतिम चरण में है दीपोत्सव के पहले यह अनुमान लगाया जा रहा है कि राम भक्तों के लिए साकेत भवन खोल दिया जाएगा. इसमें प्रभु राम से संबंधित जीवन लीला के प्रसंग बनाए गए हैं… एक म्यूजियम बनाया गया है.
न्यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.
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