कभी अमरोहा से लेकर मुजफ्फरनगर तक फैली थी हस्तिनापुर की विरासत, फिर मुगलों ने बदल दी पहचान
विशाल भटनागर/ मेरठ : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ से 45 किलोमीटर दूर हस्तिनापुर भले ही वर्तमान समय में एक ब्लॉक तक सीमित रह चुका हो. लेकिन अगर इसकी पुराने ऐतिहासिक पहलुओं की बात की जाए, तो यह अपने आप में विरासत के तौर पर जाना जाता था. महाभारत कालीन दौर में यह कुरु की राजधानी के रुप में जाना जाता था. पांचों पांडव एवं कौरवों का यह क्षेत्र था. जिसकी परिसीमा मुजफ्फरनगर से लेकर अमरोहा तक मानी जाती थी. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए लोकल 18 की टीम द्वारा हस्तिनापुर एक्सपर्ट एवं विभिन्न धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन कर चुके शोभित विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियंक भारती से खास बातचीत की.
देश आजाद होने के बाद हुई थी जीणोद्धार की कोशिश
लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए हस्तिनापुर एक्सपर्ट प्रियंक भारती ने बताया कि वर्ष 1947 में देश आजाद होने के पश्चात देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भी हस्तिनापुर का वर्ष 1949 में विजिट किया था. तब हस्तिनापुर की विरासत को देखते हुए उन्होंने इसके जीणोद्धार के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए थे. जिसके बाद हस्तिनापुर का एक नक्शा तैयार किया गया था. जिसमें कि पर्यटन की दृष्टि के साथ-साथ वर्तमान समय के सापेक्ष विभिन्न प्रकार के चीजों को यहां बनाया जाना था. जिसमें सहकारी संघ केंद्र की भी यहां स्थापना की गई. जहां आईएएस अधिकारी व्यवस्थाओं का संचालन करते थे. लेकिन धीरे-धीरे यह भी एक ऐतिहासिक पन्नों में ही सिमट कर रह गया. उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में हस्तिनापुर सिर्फ महाभारत कालीन यादों को अपने अंदर संजोए है.
मौर्य काल तक यथावत रही स्थिति
प्रियंक भारती बताते हैं कि अगर आप ऐतिहासिक पन्नों का अध्ययन करेंगे, तो हस्तिनापुर की अगर बात करें तो मौर्य काल तक महाभारत कालीन सल्तनत के द्वारा हस्तिनापुर की विरासत चलती आई. लेकिन जब मुगलों का राज भारत में हुआ तब शासक अकबर द्वारा हस्तिनापुर को एक परगना में तब्दील कर दिया. तब से लेकर अब तक यही यथावत स्थिति यहां जारी है.
पर्यटन को मिले बढ़ावा तो हो सकता है मुख्य केंद्र
प्रियंक भारती कहते हैं कि भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हस्तिनापुर के लिए कार्य किए जाएं. तो यह पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण केंद्र हो सकता है. क्योंकि यहां महाभारत कालीन विभिन्न ऐतिहासिक विरासत आज भी देखने को मिलती हैं. जहां देश भर से लोग घूमने के लिए आते हैं.
ऐसे में अगर यहां बेहतर व्यवस्थाएं संचालित की जाए. तो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. क्योंकि हस्तिनापुर सेंचुरी से लेकर यहां महाभारत कालीन कर्ण मंदिर, द्रौपदी मंदिर, पांडेश्वर मंदिर, द्रौपदी घाट, बूढ़ी गंगा सहित विभिन्न प्रकार के ऐसे स्थान देखने को मिलते हैं. जिनके प्रति लोगों की काफी आस्था बनी हुई है.
ऐसे में अगर यहां बेहतर व्यवस्थाएं संचालित की जाए. तो पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है. क्योंकि हस्तिनापुर सेंचुरी से लेकर यहां महाभारत कालीन कर्ण मंदिर, द्रौपदी मंदिर, पांडेश्वर मंदिर, द्रौपदी घाट, बूढ़ी गंगा सहित विभिन्न प्रकार के ऐसे स्थान देखने को मिलते हैं. जिनके प्रति लोगों की काफी आस्था बनी हुई है.
जैन समाज ने विकसित किया पर्यटन केंद्र
हस्तिनापुर में ही अगर आप जाएंगे तो जैन समाज द्वारा विभिन्न प्रकार के ऐसे मंदिर पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं. जो कि अपनी आप में अद्भुत कार्यशाली को दर्शाते हैं. देश भर से लोग इन पर्यटन केंद्र पर घूमने के लिए आते हैं ऐसे में अगर महाभारत कालीन ऐतिहासिक धरोहर को भी इसी तरह से विकसित किया जाए तो निश्चित तौर पर हस्तिनापुर पर्यटन का बेहतर स्थान साबित हो सकता है.