कलेक्टर साहब या गुरुजी? जब मार्कर लेकर NEET छात्रों को पढ़ाने लगे डीएम
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Lakhimpur Khiri DM: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के डीएम अंजनी कुमार सिंह शुक्रवार को एक अलग ही अंदाज में नजर आए. डीएम साहब ने अपनी अफसरी छोड़ कुछ देर के लिए ‘गुरुजी’ बन गए. उन्होंने पहले मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित कोचिंग में NEET की तैयारी कर रहे छात्रों को व्हाइट बोर्ड पर कठिन कॉन्सेप्ट समझाए और सफलता के मूल मंत्र दिए. इसके बाद वे एक प्राथमिक विद्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पांचवीं कक्षा के बच्चों से सवाल-जवाब कर उनके ज्ञान को परखा और सही जवाब मिलने पर तालियां भी बजवाईं.
बच्चों के शिक्षक बन गए लखीमपुर खीरी के डीएम.
लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले डीएम शुक्रवार को अफसरी छोड़ टीचर बन गए. डीएम अंजनी कुमार सिंह फाइलों और प्रशासनिक बैठकों से इतर अचानक ‘गुरुजी’ की भूमिका में आ गए. उन्होंने न सिर्फ नीट (NEET) की तैयारी कर रहे युवाओं को पढ़ाया, बल्कि छोटे बच्चों के साथ भी वक्त बिताकर उनकी प्रतिभा को परखा. एक ही दिन में उनके इस दोहरे अवतार की तस्वीरें अब काफी सुर्खियां बटोर रही हैं.
शुक्रवार को डीएम अंजनी कुमार सिंह मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के तहत संचालित एक कोचिंग सेंटर में पहुंचे. वहां का नजारा देखकर पहली नजर में किसी को भी यही लगा कि कोई शिक्षक क्लास ले रहा है. हाथ में मार्कर और सामने व्हाइट बोर्ड डीएम साहब पूरी तन्मयता के साथ टीचर की भूमिका निभाई. उन्होंने वहां NEET और UPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को कई कठिन कॉन्सेप्ट बड़ी ही सरलता से समझाए और उनकी सवालों का जवाब दिया.
छात्रों को सफलता का मूल मंत्र
छात्रों से बात करते हुए अंजनी कुमार सिंह ने उन्हें सफलता के गुर सिखाए. उन्होंने छात्रों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, ‘प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता पाने का कोई शॉर्टकट नहीं होता है. अगर आपको अपनी मंजिल तक पहुंचना है, तो आपके बेसिक कॉन्सेप्ट मजबूत होने चाहिए. नियमित रूप से स्वाध्याय (सेल्फ स्टडी) और जीवन में अनुशासन का होना ही सफलता का एकमात्र रास्ता है.
प्राथमिक विद्यालय में किया औचक निरीक्षण
कोचिंग सेंटर के बाद डीएम का ‘गुरुजी’ वाला अंदाज यहीं नहीं रुका. जनता दर्शन का कार्यक्रम निपटाने के बाद उनका काफिला सीधे राजापुर के एक इंग्लिश मीडियम प्राथमिक विद्यालय पहुंच गया. स्कूल प्रशासन को जब तक इस औचक निरीक्षण की भनक लगती, उससे पहले ही डीएम साहब पांचवीं कक्षा के बच्चों के बीच पहुंच चुके थे.
सही जवाब मिलने पर बजवाईं तालियां
कक्षा में पहुंचते ही डीएम ने बच्चों से पर्यावरण और अन्य विषयों से जुड़े कुछ सवाल पूछने शुरू कर दिए. जब कक्षा के छात्र आरुष और छात्रा लक्ष्मी देवी ने उनके सवालों का बिल्कुल सटीक जवाब दिया, तो डीएम के चेहरे पर मुस्कान आ गई. उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ाने के लिए पूरी क्लास से उनके लिए तालियां बजवाईं. इसके बाद उन्होंने श्यामपट्ट (ब्लैकबोर्ड) पर अंग्रेजी विषय का अधिगम स्तर भी परखा.
डीएम अंजनी कुमार सिंह ने स्कूल के शिक्षकों को भी एक कड़ा लेकिन साफ संदेश दिया कि बच्चों को सिर्फ किताबी ज्ञान रटाना नहीं है, बल्कि उनमें समझने और सोचने की क्षमता को विकसित करना है. एक ही दिन में एक तरफ युवाओं को राह दिखाना और दूसरी तरफ छोटे बच्चों की नींव परखना – डीएम के इस शानदार कदम की पूरे जिले में जमकर तारीफ हो रही है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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