क्या है अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC का विवाद, जिसे CM योगी ने LDA को सौंपा

0
क्या है अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC का विवाद, जिसे CM योगी ने LDA को सौंपा


Last Updated:

Lucknow JPNIC Controversy: राजधानी लखनऊ स्थित जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर को योगी सरकार ने LDA के हवाले कर दिया है. अखिलेश यादव का यह ड्रीम प्रोजेक्ट पिछले आठ सैलून से बंद पड़ा था. गुरुवार को कैबिनेट बैठक म…और पढ़ें

Lucknow JPNIC Controversy: अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC को योगी सर्कार ने LDA को सौंपा

हाइलाइट्स

  • अखिलेश यादव के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC अब LDA के हवाले
  • कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने इस प्रस्ताव पर लगाई मुहर
  • अखिलेश यादव के इस प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर सियासत देखने को मिल सकता है
Lucknow JPNIC Controversy: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में वैसे तो 30 प्रस्तावों पर मुहर लगी, लेकिन उसमें  सबसे अहम था राजधानी लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर. जिसका जिम्मा अब लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपा गया है. कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने अखिलेश यादव के इस ड्रीम प्रोजेक्ट में खर्च हुए 821.74 करोड़ रुपए भी कर्ज के तैर पर LDA को ट्रांसफर कर दिया है जिसे उसे तीस साल में सरकार को लौटाना होगा.

योगी सरकार के इस फैसले के बाद राजधानी लखनऊ में पिछले आठ सालों से बंद पड़े जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (JPNIC) को लेकर सियासत एक बार फिर सियासत के गरमाने के पूरे आसार हैं. दरअसल, समाजवादी पार्टी के सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर के तौर पर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. इस प्रोजेक्ट का 80-90 परसेंट काम पूरा भी हो गया था. लेकिन 2017 में सपा की हार के बाद योगी सरकार में भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद इस प्रोजेक्ट को बंद कर दिया गया था. मई महीने में सरकार ने इस प्रोजेक्ट को लखनऊ विकास प्राध्यकरण को सौंपने का फैसला लिया था, जिस पार आज कैबिनेट में मुहर लग गई.
दरअसल, अखिलेश यादव का यह प्रोजेक्ट सियासी अखाड़ा बनने का बेजोड़ उदहारण भी पेश करता है.  पिछले दो सालों से जयप्रकाश नारायण की जयंती पर अखिलेश यादव के JPNIC जाने और पुलिस द्वारा उन्हें रोकने का जबरदस्त ड्रामा भी देखने को मिलता रहा है. अखिलेश यादव इस मुद्दे को हर बार उठाते हुए बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हैं. अखिलेश ने तो यहां तक कह दिया था कि अगर बीजेपी सरकार जेपीएनआईसी को बेचना चाहती है, तो समाजवादी पार्टी इसे खरीदने को तैयार है. उन्होंने देश और प्रदेश के समाजवादियों से इसके लिए चंदा देने की भी अपील की थी.

जेपीएनआईसी का इतिहास

जेपीएनआईसी की नींव 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने रखी थी. इसे दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर की तर्ज पर एक बहुउद्देशीय सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना थी. इस परियोजना में समाजवादी आंदोलन पर आधारित एक संग्रहालय, आधुनिक सभागार, खेल परिसर, और कला दीर्घाएं शामिल थीं. 2016 में अखिलेश ने इसका उद्घाटन किया था, लेकिन 2017 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद इस परियोजना पर काम रुक गया.  तब से यह केंद्र अधूरा और बंद पड़ा है.

बीजेपी पर अखिलेश का हमला

अखिलेश ने बीजेपी सरकार पर जेपीएनआईसी को जानबूझकर उपेक्षित करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, “यह केंद्र समाजवादी विचारधारा का प्रतीक है, जो जयप्रकाश नारायण के संघर्ष और आपातकाल के खिलाफ उनके आंदोलन को दर्शाता है. बीजेपी इसे बेचने की साजिश रच रही है, क्योंकि उनकी विचारधारा स्वतंत्रता सेनानियों और समाजवादी नेताओं के प्रति सम्मान की नहीं है.” अखिलेश ने यह भी दावा किया कि बीजेपी ने जेपीएनआईसी के रखरखाव के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और इसे निजी हाथों में सौंपने की योजना बना रही है.

बीजेपी का पलटवार

बीजेपी ने अखिलेश के आरोपों को खारिज करते हुए इसे सस्ती राजनीतिक नौटंकी करार दिया. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा, “जेपीएनआईसी समाजवादी पार्टी के भ्रष्टाचार का प्रतीक है. अखिलेश यादव ने इस परियोजना में भारी अनियमितताएं की थीं, जिसके कारण इसकी लागत अनुमानित 265 करोड़ रुपये से बढ़कर 800 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी.” उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश समाजवादी विचारधारा का दुरुपयोग कर सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं.

homeuttar-pradesh

क्या है अखिलेश के ड्रीम प्रोजेक्ट JPNIC का विवाद, जिसे CM योगी ने LDA को सौंपा



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *