खपड़ैल की छोटी दुकान से शुरू हुई कहानी! आज कलावती गट्टा बना कन्नौज की शान, विदेशों तक फेमस
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Kannauj Kalawati Gatta Sweet History: कन्नौज की गलियों से निकलकर सात समंदर पार तक अपनी मिठास घोलने वाला कलावती गट्टा आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. 103 साल पहले एक महिला के छोटे से प्रयास और खपड़ैल की दुकान से शुरू हुआ यह सफर अब एक गौरवशाली विरासत बन चुका है. आज चौथी पीढ़ी के युवा इस पारंपरिक मिठाई को केसर, अखरोट और गुलाब जैसे आधुनिक फ्लेवर के साथ नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. महज 60 रुपये से शुरू होने वाला यह गट्टा न केवल अपनी किफायती कीमत बल्कि अपने बेमिसाल स्वाद के कारण भी हर त्यौहार की पहली पसंद बना हुआ है.
कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज अपनी खुशबू के साथ-साथ अब अपने पारंपरिक स्वाद के लिए भी दुनिया भर में मशहूर हो रही है. करीब 103 साल पहले एक महिला ने बहुत ही छोटे स्तर पर मिठाई का काम शुरू किया था. उस समय शायद किसी ने यह कल्पना भी नहीं की होगी कि यह मामूली सा प्रयास एक दिन शहर की पहचान बन जाएगा. खपड़ैल की एक छोटी सी दुकान से शुरू हुआ कलावती गट्टा आज कन्नौज की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत का एक अटूट हिस्सा बन चुका है.
चौथी पीढ़ी सहेज रही है परदादी की विरासत
समय बदला, दौर बदला, लेकिन इस मिठाई का स्वाद और शुद्धता आज भी वैसी ही बनी हुई है. वर्तमान में इस व्यापार की बागडोर चौथी पीढ़ी के दो युवा व्यापारियों के हाथों में है. जो अपनी परदादी द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को न केवल जिंदा रखे हुए हैं, बल्कि इसे नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं. उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि यह पारंपरिक मिठाई आज बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रही है.
दो वैरायटी से शुरू हुआ सफर, अब 5 से ज्यादा फ्लेवर में उपलब्ध
कन्नौज की इस पहचान को शुरू करने वाली कलावती के पोते अभिषेक वैश्य बताते है कि उनकी दुकान पर मिलने वाले गट्टे का स्वाद अब सिर्फ पारंपरिक सादे रूप तक सीमित नहीं रहा. बदलते समय और ग्राहकों की पसंद को देखते हुए आज इसमें कई प्रयोग किए जा रहे हैं. शुरुआत में जहां सिर्फ दो तरह के गट्टे मिलते थे, वहीं आज बाजार में पांच से ज्यादा वैरायटी धूम मचा रही हैं. इनमें सादा गट्टा, गरी फूल वाला, बीज-किशमिश, काजू-बादाम, अखरोट-चिरौंजी और गुलाब फ्लेवर गट्टा शामिल हैं. हर फ्लेवर का अपना एक अलग जादू है, जो चखने वाले को अपना मुरीद बना लेता है.
सात समंदर पार पहुंची कन्नौज की मिठास
कलावती गट्टा की लोकप्रियता अब सिर्फ उत्तर प्रदेश या भारत तक ही सीमित नहीं है. इस मिठाई का स्वाद अब विदेशों में रहने वाले भारतीय और विदेशी नागरिकों तक भी पहुंच चुका है. लोग खास तौर पर कन्नौज से इसे मंगवाते हैं. त्यौहारों और शादी-ब्याह के मौकों पर इसकी मांग इतनी बढ़ जाती है कि इसे पूरा करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. लोग इसे उपहार के रूप में अपने रिश्तेदारों को भेजना बहुत पसंद करते हैं.
किफायती दाम और हर वर्ग की पसंद
इस मिठाई की सबसे बड़ी खासियत इसका किफायती होना है. बाजार में इसकी कीमत ₹60 प्रति किलो से शुरू होकर वैरायटी के अनुसार ₹300 प्रति किलो तक जाती है. कम कीमत और बेहतरीन स्वाद के कारण यह हर वर्ग के व्यक्ति की पहुंच में है. यही वजह है कि आम दिनों से लेकर खास उत्सवों तक, हर घर में कलावती गट्टा की मौजूदगी जरूर रहती है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें