गर्मियों में ठंडक का एहसास दिलाता कन्नौज का खास रुह खस इत्र, गर्मियों में ठंडक का एहसास
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कन्नौज में बनने वाला ‘रुह खस’ इत्र अपनी ठंडी तासीर के कारण गर्मियों में खास पसंद बन जाता है. यह न केवल मन को सुकून देता है, बल्कि शरीर को भी ठंडक पहुंचाने में मददगार माना जाता है. शरबत, पान और कूलर के पानी में इस्तेमाल होने वाला यह प्राकृतिक इत्र लू के दौरान राहत देने के लिए भी जाना जाता है, जिसकी गर्मी बढ़ने के साथ मांग तेजी से बढ़ रही है.
कन्नौज. इत्र नगरी कन्नौज में बनने वाला ‘रुह खस’ इत्र अपनी खास ठंडी तासीर के लिए देशभर में जाना जाता है. यह इत्र खास तौर पर गर्मियों के मौसम में लोगों की पहली पसंद बन जाता है. इसकी खुशबू न सिर्फ मन को सुकून देती है, बल्कि शरीर को भी ठंडक पहुंचाने का काम करती है. यही वजह है कि बढ़ती गर्मी के साथ इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. भीषण गर्मी और लू के दौरान ‘रुह खस’ इत्र काफी लाभकारी माना जाता है. इत्र व्यापारियों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को लू लग जाए तो इस इत्र को सुंघाने से उसे तुरंत राहत महसूस होती है. इसकी प्राकृतिक ठंडक शरीर के तापमान को संतुलित करने में मदद करती है. यही कारण है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं.
शरबत और पान में बढ़ाता है स्वाद
‘रुह खस’ इत्र का उपयोग सिर्फ खुशबू तक सीमित नहीं है, गर्मियों में इसका इस्तेमाल शरबत, पान और अन्य ठंडे पेय पदार्थों में भी किया जाता है. इसकी कुछ बूंदें ही किसी भी पेय को खास सुगंध और ताजगी से भर देती हैं. इससे न सिर्फ स्वाद बढ़ता है, बल्कि शरीर को ठंडक का एहसास भी मिलता है.
कीमत और अन्य उपयोग
‘रुह खस’ इत्र की कीमत लगभग ₹800 प्रति 10 ग्राम है, जो इसकी गुणवत्ता और शुद्धता को दर्शाती है. इसके अलावा, लोग इस इत्र का इस्तेमाल घरों के कूलर या पानी में भी करते हैं, जिससे ठंडी हवा के साथ खुशबूदार वातावरण बनता है और ठंडक का एहसास और भी बढ़ जाता है. कन्नौज का ‘रुह खस’ इत्र न सिर्फ एक सुगंधित उत्पाद है, बल्कि गर्मियों में राहत देने वाला प्राकृतिक उपाय भी है. इसकी ठंडी तासीर इसे खास बनाती है, जो हर साल गर्मी के मौसम में लोगों की पहली पसंद बन जाता है.
क्या बोले इत्र व्यापारी
इत्र व्यापारी निशीष तिवारी बताते हैं कि इस खास इत्र को तैयार करने की प्रक्रिया बेहद मेहनत भरी होती है. सर्दियों के मौसम में खस (वेटिवर) की जड़ों को खेतों से निकाला जाता है. इसके बाद पारंपरिक तरीके से आसवन (डिस्टिलेशन) की प्रक्रिया शुरू होती है, जो कई हफ्तों तक चलती है. लंबे समय और मेहनत के बाद ही ‘रुह खस’ इत्र तैयार हो पाता है. गर्मियों में इस इत्र की मांग इतनी अधिक होती है कि इसे तेजी से तैयार कर पाना संभव नहीं होता. यही वजह है कि बाजार में इसकी उपलब्धता सीमित रहती है. लोग पहले से ही इसकी खरीदारी कर लेते हैं ताकि गर्मी के मौसम में उन्हें इसकी कमी न हो.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें