गर्मी में क्यों मरने लगती हैं मछलियां? जानिए बचाने के आसान उपाय
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अगर आप मछली पालन करते हैं, तो गर्मी का मौसम आपके लिए चुनौती भरा हो सकता है. तेज धूप और बढ़ते तापमान के कारण तालाब का पानी खराब हो सकता है, जिससे मछलियों की सेहत पर असर पड़ता है. ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर आप मछलियों को स्वस्थ रख सकते हैं और नुकसान से बच सकते हैं.
मछली पालन का व्यवसाय आज के समय में मुनाफेदार जरूर है, लेकिन गर्मी के दौरान तालाब की विशेष देखभाल बेहद जरूरी हो जाती है. तेज धूप के कारण तालाब का पानी जल्दी गर्म होकर खराब होने लगता है, जिससे पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और मछलियां बीमार पड़ सकती हैं. इससे मछली पालकों को दवाइयों पर अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता है. इस समस्या से बचने और तालाब के पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कुछ देसी उपाय हैं, जिनकी मदद से मछलियों की अच्छी देखभाल की जा सकती है और उन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है.

बाराबंकी जिले के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गनेश प्रसाद ने बताया कि गर्मियों में तापमान बढ़ने से तालाब में पाली जाने वाली मछलियां बीमार हो सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि मौसम के साथ-साथ पानी का तापमान भी नियमित रूप से जांचते रहें, क्योंकि इसका सीधा असर पानी में ऑक्सीजन की मात्रा पर पड़ता है. इस दौरान मछलियों को बीमारियों से बचाने के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं, जिनसे गर्मी के मौसम में उन्हें स्वस्थ रखा जा सकता है.

मई-जून की गर्मी में तालाब का पानी जल्दी गर्म और गंदा हो जाता है, जिससे मछलियों की सेहत पर सीधा असर पड़ता है. ऐसे में मछली पालने वाले किसानों को चाहिए कि वे नियमित रूप से पानी की जांच करें और समय-समय पर उसे बदलते रहें. खास ध्यान रखें कि तालाब में पानी का स्तर 5 से 5.5 फीट के बीच बना रहे. यदि पानी कम होगा तो तापमान तेजी से बढ़ेगा, जिससे मछलियों को तनाव, बीमारी या मौत का खतरा हो सकता है. इस सावधानी से नुकसान टाला जा सकता है.
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खासकर गर्मी के मौसम में तालाब का पानी गर्म हो जाता है, जिससे उसमें ऑक्सीजन की मात्रा घट जाती है. इसका सीधा असर मछलियों की सेहत पर पड़ता है, वे सुस्त हो जाती हैं और बीमार पड़ने लगती हैं. ऐसे में किसान भाइयों को चाहिए कि पानी में समय-समय पर उचित मात्रा में चूना मिलाएं, क्योंकि चूना पानी का पीएच संतुलित करता है और ऑक्सीजन स्तर बनाए रखने में मदद करता है. इससे मछलियों की सेहत बनी रहती है और उनके मरने की संभावना भी घटती है.

गर्मी के दिनों में तालाब में गंदगी बढ़ जाती है, जिससे मछलियों को स्किन इंफेक्शन और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इस स्थिति से बचने के लिए किसान तालाब के पानी में हल्की मात्रा में पोटेशियम परमैग्नेट का छिड़काव कर सकते हैं. यह एक प्रभावी कीटाणुनाशक है, जो पानी को साफ करता है और मछलियों को संक्रमण से बचाने में मदद करता है. इससे मछलियों की सेहत सुरक्षित रहती है और उत्पादन पर भी कोई असर नहीं पड़ता.

अगर किसी तालाब में मछलियों की संख्या ज्यादा हो जाती है, तो ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में बेहतर होगा कि कुछ मछलियों को दूसरे तालाब में स्थानांतरित कर दिया जाए. इससे उन्हें पर्याप्त जगह और ऑक्सीजन मिलती है, उनका तनाव कम होता है और उनकी ग्रोथ भी सही ढंग से होती है. साथ ही, बीमारी के फैलाव को भी रोका जा सकता है.

गर्मी के मौसम में मछलियों को सूखा चारा देने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे उनके पाचन में दिक्कत हो सकती है. इसकी जगह किसान ताजे पानी में थोड़ा मीठा गुड़ या ग्लूकोज घोलकर उसमें विटामिन C मिलाएं और उसे मछलियों को आहार के रूप में दें. यह न सिर्फ मछलियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, बल्कि उन्हें स्वस्थ रखने में भी मदद करता है.