‘ थर्ड फ्लोर से कूद गई’, आग वाली कोचिंग में काम कर रही लवप्रीत ने बताया हाल
Lucknow Coaching Fire Eyewitness Story: लखनऊ अग्निकांड हादसे की प्रत्यक्षदर्शी ने लवप्रीत पूरा हाल सुनाया. उसने बताया कि आग कैसे लगी, लोगों ने छत से कूद कर कैसे जान बचाई. फायर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे. आखिर कैसे 15 लोगों की जान चली गई, इस घटना से जुड़े सभी बात उन्होंने न्यूज18 इंडिया टीम को बताई है. उन्होंने बताया कि वह इस सेंट में पिछले पांच महीने से नौकरी कर रही हैं.
लवप्रीत ने बताया कि इमारत में अचानक बहुत ज़्यादा धुआं फैल गया था. सीढ़ियों पर धुआं होने के कारण लोग वहां से नहीं निकल पाए और वेंटिलेशन न होने की वजह से सबका दम घुटने लगा था. सीढ़ियों का रास्ता बंद होने के कारण लवप्रीत और अन्य लोगों ने बिजली का पाइप पकड़कर तीसरी मंज़िल से नीचे छलांग लगाई, जिसमें नीचे मौजूद लोगों ने भी उनकी मदद की. घटना के समय वहां करीब 20 से 25 या उससे भी ज़्यादा लोग मौजूद थे. लवप्रीत वहां पिछले 5 महीनों से काम कर रही थीं.
बस घर जाना है, और कुछ नहीं…
उन्होंने बताया कि हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने अस्पताल आकर मुलाकात की और इलाज का पूरा ध्यान रखने तथा सब ठीक होने का आश्वासन दिया. गंभीर स्थिति और दिमागी तनाव के कारण लवप्रीत फ़िलहाल किसी भी कार्रवाई या लापरवाही पर बात नहीं कर पा रही हैं. वह मूल रूप से बिलासपुर की रहने वाली हैं और सिर्फ़ अपने घर जाना चाहती हैं.
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लवप्रीत के साथ पूरी बातचीत का डिटेल
नीचे… नीचे सेफ्टी लॉक, और वो थंब लॉक रहता है. उसकी वजह से क्या हुआ? कुछ ऐसा? मतलब, सेंटर लॉक था?
लवप्रीत- नहीं, नहीं वो चल रहा था लॉक, हम उससे बाहर निकले हैं. हम बस सीढ़ियों से नहीं जा पाए क्योंकि बहुत ज़्यादा धुँआ था. शटर लॉक चल रहा था, उससे कारण हम उससे नहीं आए.
अच्छा. सीढ़ियों के अलावा और कोई निकलने की जगह नहीं थी? कोई वेंटिलेशन कहीं पर?
लवप्रीत : नहीं.
सब कुछ लॉक था? चारों तरफ से बंद था?
लवप्रीत- हां.
जिसकी वजह से दम घुटने की वजह से लोग.
लवप्रीत: हां.
हां, ये… वहां आप अकेले थे? कितने लोग थे आप?
लवप्रीत- हम 20 से 25 लोग थे. 25 से ज़्यादा ही होंगे. मुझे कुछ याद नहीं है अभी.
सवाल तो आप… आप कूद गईं थीं?
लवप्रीत- हां.
नीचे? कौन से फ्लोर से कूदी थीं?
लवप्रीत- थर्ड.
नीचे ऐसे ज़मीन पर कूदीं या कहां?
लवप्रीत- पाइप पकड़ के कूदी थीं. तो लोग, नीचे वाले हेल्प… पकड़ने में… और… और… वो रास्ता देखा, वो बिजली का पाइप पकड़ के कूद रहे थे हम वहां से नीचे पहुंच गए.
तो अब… इसे किसकी लापरवाही कहेंगी आप?
लवप्रीत- मुझे अभी तो कुछ नहीं पता लापरवाही के… अभी तो कुछ भी कहने की हालत में नहीं हूं. मुझे किसी भी हाल में घर जाना है.
नाम क्या हुआ मैम आपका?
लवप्रीत- लवप्रीत
यहां आप पढ़ने के लिए आई थीं या काम करती थीं?
लवप्रीत- काम करती हूं.
कितने सालों से काम करती हैं?
लवप्रीत 5 महीने
अच्छा. आपके कुछ दोस्त वगैरह भी वहां थे जो… जिनको आपने देखा दम घुटते हुए?
लवप्रीत- हां, वो सबका… सबका दम घुट रहा था. मैं भी घुट रही थी तब वहां पर. हम सब थे. हम बस कोशिश कर रहे थे निकलने की. मैं जब तक नीचे आई, मुझे चक्कर आ चुके थे, मैं नीचे उठने… होश में नहीं रही. मुझे पता भी नहीं कौन-कौन निकल पाया, कौन-कौन नहीं.
मुख्यमंत्री जी ने क्या बात की, क्या कहा?
लवप्रीत- मुझे कुछ नहीं पता. मैं सच बोलूं, अभी मेरा दिमाग़ नहीं चल रहा है. मेरे को ना समझ आ रहा है अच्छे से.
मुख्यमंत्री जी आए थे? उन्होंने क्या आश्वासन दिया? इलाज वगैरह का…
लवप्रीत- ठीक हो जाएगा, सब बोला. मुझे एग्जैक्टली वर्ड याद नहीं हैं. पर वह अपनी तरफ़ से बोल के गए थे कि ध्यान रखें हमारा सब.
किस तरह की कार्रवाई की मांग करेंगी मैम आप?
लवप्रीत- जो भी… मैं अपनी इस हालत में कुछ बोलूं… मुझे बस अपने घर जाना है.
जी?
लवप्रीत- मुझे बस अपने घर जाना है.
कहां की रहने वाली हैं मैम?
लवप्रीत- बिलासपुर. लवप्रीत: बिलासपुर में ही है घर. बस, अब मैं भी और बात नहीं कर पाऊंगी.